खगोलीय और ज्योतिषीय घटनाक्रम के अनुसार, गुरु अब मिथुन राशि में अस्त होने जा रहे हैं। गुरु का अस्त होना न केवल विशेष राशियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आम जनजीवन में भी बड़े बदलाव लेकर आता है। वर्तमान में गुरु वक्री अवस्था में चलते हुए मिथुन राशि में अस्त हो रहे हैं, जिसके प्रभाव स्वरूप शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त का क्रम थम जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब गुरु अस्त होते हैं, तो विवाह संस्कार संपन्न नहीं किए जाते हैं।
कब से कब तक रहेगा गुरु का अस्त काल
गुरु 15 जुलाई से अस्त होंगे और यह स्थिति लगभग एक महीने तक बनी रहेगी। इसी अवधि के दौरान चतुर्मास का प्रारंभ भी हो रहा है। इस दौरान गुरु की स्थिति में बदलाव के चलते कई राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। गुरु के अस्त होने की स्थिति में किन राशियों को शुभ फल प्राप्त होंगे और किन राशियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है, इसका विवरण नीचे दिया गया है।
किन राशियों के लिए शुभ है यह समय
सामान्यतः गुरु के अस्त होने का अनुकूल प्रभाव बहुत ही कम राशियों पर देखने को मिलता है। ज्यादातर राशियों के लिए यह समय कुछ समस्याओं का संकेत हो सकता है, लेकिन यदि उचित सावधानी बरती जाए, तो प्रतिकूल परिणामों को कम किया जा सकता है। विश्लेषण के अनुसार, तुला राशि और वृषभ राशि के जातकों के लिए गुरु का अस्त होना अच्छे योग निर्मित कर रहा है।
तुला और वृषभ राशि पर प्रभाव
इन दो राशियों के लिए आने वाला समय विशेष रूप से सकारात्मक रहने की संभावना है। गुरु के इस गोचर काल में आपके जीवन में कई सुखद बदलाव आ सकते हैं। करियर और व्यापार के क्षेत्र में आपको लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। हालांकि, इस दौरान अपने स्वास्थ्य और रोगों के प्रति विशेष सतर्कता बरतनी आवश्यक है। यदि आप किसी नए निवेश की योजना बना रहे हैं, तो आप इसे आगे बढ़ा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, जो जातक सरकारी नौकरियों की तैयारी में लगे हैं या किसी प्रवेश परीक्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन्हें सफलता की खुशखबरी मिल सकती है।
सावधानी बरतने वाली राशियां
कुछ विशेष राशियों को इस अवधि के दौरान अत्यंत सजग रहने की सलाह दी जाती है। इसमें धनु राशि, मीन राशि, कर्क राशि और वृश्चिक राशि प्रमुख हैं। आपको अपने दैनिक जीवन में किसी भी प्रकार का निर्णय लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए। संभव है कि आप अनजाने में किसी तरह की राजनीति या विवादों में फंस जाएं। धन के निवेश को लेकर बहुत अधिक सतर्क रहें और ऐसी जगहों पर पैसा न लगाएं जहां से निकासी करना कठिन हो। फिजूलखर्ची करने के बजाय, अपनी भविष्य की योजनाओं को सोच-समझकर तैयार करना ही बुद्धिमानी होगी।











