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ज्योतिष में सूर्य को क्यों कहा जाता है ग्रहों का राजा, जानें हर महीने बदलती राशि के पीछे की वजहराशिफल
6 जुल॰ 2026, 7:01 am (45 दिन पहले)· 2

ज्योतिष में सूर्य को क्यों कहा जाता है ग्रहों का राजा, जानें हर महीने बदलती राशि के पीछे की वजह

वैदिक ज्योतिष में सूर्य हर करीब 30 दिन में राशि बदलता है, जिसे सूर्य गोचर कहते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक यही बदलाव सूर्य को ज्योतिष का सबसे शक्तिशाली ग्रह बनाता है।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों में सबसे प्रभावशाली और सम्मानित ग्रह माना जाता है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है इसका हर करीब 30 दिन में एक राशि से दूसरी राशि में जाना। इस बदलाव को सूर्य गोचर कहा जाता है और इसका असर बारहों राशियों पर अलग-अलग तरीके से देखने को मिलता है। आखिर सूर्य को ज्योतिष का इतना ताकतवर ग्रह क्यों माना जाता है, इसे ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने आसान भाषा में समझाया है।

सूर्य गोचर यानी हर महीने बदलती राशि

सूर्य लगभग हर 30 दिन में अपनी राशि बदलता है और करीब एक साल में सभी 12 राशियों का पूरा चक्र तय कर लेता है। ज्योतिष में इस गोचर को बेहद अहम माना जाता है क्योंकि हर बार जब सूर्य नई राशि में प्रवेश करता है, तो अलग-अलग राशियों पर उसका असर अलग ढंग से सामने आता है। कहीं यह गोचर करियर में तेजी लाता है तो कहीं सेहत, रिश्तों या आत्मविश्वास पर सीधा असर डालता है।

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चंद्रमा से कुंडली, तो सूर्य से भी कुंडली

आमतौर पर लोग यही जानते हैं कि कुंडली चंद्रमा की राशि के आधार पर देखी जाती है, लेकिन पंडित नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि कई परंपराओं में सूर्य की स्थिति के आधार पर भी कुंडली तैयार की जाती है। यही वजह है कि ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का अपना अलग और बड़ा महत्व माना गया है, ठीक चंद्रमा जितना ही अहम।

पिता का कारक और ऊर्जा का केंद्र

कुंडली में चंद्रमा को मां का कारक ग्रह माना जाता है, जबकि सूर्य पिता का कारक होता है। इसी वजह से सूर्य को सिर्फ एक ग्रह नहीं बल्कि जीवन देने वाली शक्ति और परिवार की नींव से भी जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य किसी भी कुंडली की ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत होता है। अगर कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में हो, तो व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है, काम करने की ताकत मिलती है और सही समय पर सही फैसला लेने की क्षमता भी बेहतर होती जाती है।

सेहत, सम्मान और नेतृत्व से जुड़ाव

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक सूर्य को रोगों से लड़ने की क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने वाला ग्रह भी माना गया है। इसी वजह से इसे सिर्फ ऊर्जा तक सीमित न रखकर सेहत, सम्मान और नेतृत्व क्षमता से भी जोड़कर देखा जाता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, उसमें नेतृत्व करने का स्वाभाविक गुण भी नजर आता है।

पंचम भाव और सृजन का ग्रह

ज्योतिष में पंचम भाव को संतान और सृजन से जोड़कर देखा जाता है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि काल पुरुष कुंडली में सूर्य का इसी पंचम भाव से खास नाता है, और यही वजह है कि सूर्य को सृजन का ग्रह भी कहा जाता है। जिस तरह धरती पर जीवन के लिए सूर्य की रोशनी और ऊर्जा जरूरी है, ठीक उसी तरह कुंडली में भी सूर्य का मजबूत होना व्यक्ति को नई ऊर्जा देता है और आगे बढ़ने की ताकत देता है।

निष्कर्ष: क्यों है सूर्य सबसे अहम ग्रह

पंडित नरेंद्र उपाध्याय का कहना है कि सूर्य के बिना जीवन की कल्पना करना ही मुश्किल है, और यही कारण है कि वैदिक ज्योतिष में इसे सबसे महत्वपूर्ण ग्रहों में गिना जाता है। यह ग्रह व्यक्ति की ऊर्जा, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और जीवन की दिशा तय करने में सीधी भूमिका निभाता है, और यही वजह है कि हर महीने होने वाला इसका राशि परिवर्तन ज्योतिष में इतना महत्वपूर्ण माना जाता है।

सवाल-जवाब

सूर्य गोचर क्या है?
सूर्य का हर करीब 30 दिन में एक राशि से दूसरी राशि में जाना सूर्य गोचर कहलाता है।
सूर्य कितने समय में सभी 12 राशियों का चक्र पूरा करता है?
सूर्य करीब एक साल में सभी 12 राशियों का पूरा चक्र तय कर लेता है।
ज्योतिष में सूर्य को इतना शक्तिशाली ग्रह क्यों माना जाता है?
सूर्य कुंडली की ऊर्जा का केंद्र और पिता का कारक माना जाता है, जो आत्मविश्वास, फैसले लेने की क्षमता और सेहत को प्रभावित करता है।
कुंडली में सूर्य किसका कारक है?
कुंडली में सूर्य पिता का कारक माना जाता है, जबकि चंद्रमा मां का कारक होता है।
सूर्य को सृजन का ग्रह क्यों कहा जाता है?
काल पुरुष कुंडली में सूर्य का पंचम भाव यानी संतान और सृजन के भाव से खास संबंध माना जाता है, इसलिए इसे सृजन का ग्रह कहा जाता है।
यह जानकारी किसने बताई है?
यह जानकारी ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने दी है।
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