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रक्षाबंधन पर बन रहे हैं 7 दुर्लभ शुभ संयोग, जानिए राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त और भद्रा की स्थितिराशिफल
24 अग॰ 2026, 10:24 am (36 दिन पहले)· 2

रक्षाबंधन पर बन रहे हैं 7 दुर्लभ शुभ संयोग, जानिए राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त और भद्रा की स्थिति

इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा और सात अद्भुत शुभ संयोगों के साथ यह पर्व मनाया जाएगा। जानिए पूर्णिमा तिथि, उत्तम मुहूर्त और राहुकाल का पूरा समय।

भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार बेहद खास रहने वाला है। इस साल इस त्योहार पर एक साथ सात अत्यंत शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है, जो इसकी दिव्यता और महत्व को और अधिक बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिसके चलते बहनें पूरे दिन बिना किसी बाधा के अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी। पंचांग के अनुसार यह त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन उदयातिथि में पूर्णिमा तिथि प्राप्त हो रही है।

भद्रा और पूर्णिमा तिथि का पूरा गणित

पंचांग की गणना के अनुसार भद्रा 27 अगस्त को समाप्त हो जाएगी। भद्रा का यह काल गुरुवार 27 तारीख को सुबह नौ बजकर आठ मिनट से शुरू होकर उसी दिन रात्रि में नौ बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अगले दिन यानी 28 अगस्त को शुक्रवार को सुबह नौ बजकर 47 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। चूँकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि व्याप्त है, इसलिए उदयातिथि के नियम के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, उन्हें एक दिन पूर्व यानी 27 अगस्त गुरुवार को व्रत रखना चाहिए। 28 अगस्त को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रहेगी और इसी दिन भाई को राखी बांधी जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रक्षाबंधन का उत्तम मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर 9 बजकर 48 मिनट तक है। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी।

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बन रहे हैं सात खास शुभ संयोग

इस बार रक्षाबंधन के दिन ग्रह और नक्षत्रों की चाल मिलकर कुल सात शुभ योगों का सृजन कर रही है। इस दिन मुख्य रूप से शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसे भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है। शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और इस नक्षत्र का संबंध वरुण देव से भी जोड़ा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शतभिषा नक्षत्र के दौरान किए गए दान, जप, तप और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इसके अलावा इस दिन सुकर्मा योग, त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ ग्रहों की विशिष्ट स्थितियों से बनने वाले अन्य योग भी इस दिन को बेहद फलदायी बना रहे हैं। 28 अगस्त के दिन चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे और शतभिषा नक्षत्र अपना पूरा प्रभाव दिखाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से शतभिषा को एक बेहद खास नक्षत्र माना गया है। इसके साथ ही इस दिन भद्रा का न होना और गुरु का कर्क राशि में होना भी बहुत अच्छे संयोगों में गिने जा रहे हैं।

शुभ चौघड़िया और राहुकाल का समय

दिनभर राखी बांधने के कई अनुकूल अवसर मिल रहे हैं, जिनमें शुभ चौघड़िया का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। दिन में 11 बजकर 45 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 19 मिनट तक शुभ चौघड़िया का योग रहेगा। वहीं दूसरी ओर, दिन का कुछ समय ऐसा भी है जब मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। सुबह 10 बजकर 11 मिनट से लेकर दोपहर 11 बजकर 45 मिनट तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल के इस वर्जित समय के दौरान राखी बांधने से परहेज करना ही बेहतर रहता है।

सवाल-जवाब

इस साल रक्षाबंधन किस तारीख को मनाया जाएगा?
इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा क्योंकि इस दिन उदयातिथि में पूर्णिमा तिथि प्राप्त हो रही है।
क्या इस रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहेगा?
नहीं, इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं है जिससे बहनें पूरे दिन राखी बांध सकेंगी।
राखी बांधने के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त कौन सा है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रक्षाबंधन का उत्तम मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है।
रक्षाबंधन के दिन कौन सा राहुकाल समय वर्जित माना गया है?
सुबह 10:11 बजे से दोपहर 11:45 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसके दौरान राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है।
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