ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मफल का ग्रह माना जाता है, यानी हर व्यक्ति के कर्मों का हिसाब समय के साथ सामने लाने वाला ग्रह। यह ग्रह किसी एक राशि में औसतन ढाई साल तक ठहरता है, इसलिए जब यह चंद्र राशि के आसपास से गुजरता है तो साढ़ेसाती और ढैया जैसी असरदार अवधि शुरू हो जाती है। इस समय शनि मीन राशि में गोचर कर रहा है, जिसके चलते तीन राशियां साढ़ेसाती के दायरे में हैं और दो राशियों पर ढैया चल रही है। इसी बीच 27 जुलाई 2026 से शनि वक्री होने वाला है, जिसकी वजह से इससे जुड़े योग और भी सुर्खियों में हैं।
ज्योतिष में शनि के गोचर को खास तौर पर करियर, आर्थिक फैसलों और रिश्तों से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए हर बार जब यह किसी नई राशि में दाखिल होता है, तो जनता के बीच इसे लेकर उत्सुकता और चिंता दोनों देखी जाती है। साढ़ेसाती और ढैया को खासतौर पर लंबी अवधि के दौर के तौर पर देखा जाता है, जिनका असर धीरे-धीरे और चरणों में सामने आता है, न कि अचानक।
मेष, मीन और कुंभ पर साढ़ेसाती के तीन चरण
मेष राशि के जातकों के लिए साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो चुका है। ज्योतिष की मान्यता के अनुसार इस चरण में खर्च अचानक बढ़ सकते हैं, जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता है और धैर्य की परीक्षा देने वाली परिस्थितियां बन सकती हैं।
मीन राशि वालों पर इस समय साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है, जिसे परंपरागत रूप से सबसे भारी और महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। हालांकि ज्योतिषी यह भी जोड़ते हैं कि इसका वास्तविक असर हर व्यक्ति की जन्मकुंडली, चल रही दशा और बाकी ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है, इसलिए एक ही राशि के हर व्यक्ति पर यह एक जैसा असर नहीं डालता।
कुंभ राशि के जातक इस समय साढ़ेसाती के आखिरी और तीसरे चरण से गुजर रहे हैं। मान्यता है कि यह वह दौर है जब पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही मुश्किल परिस्थितियों में धीरे-धीरे राहत मिलना शुरू हो सकती है, यानी सबसे कठिन समय पीछे छूटने लगता है।
सिंह और धनु राशि पर ढैया का असर
शनि के मौजूदा गोचर के हिसाब से सिंह और धनु राशि के जातक ढैया के असर में गिने जाते हैं। इस दौर में कामकाज में सामान्य से ज्यादा मेहनत लगने, फैसले लेने में अतिरिक्त सावधानी बरतने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जाती है, ताकि जल्दबाजी में उठाया कोई कदम बाद में भारी न पड़े।
2027 में शुरू होगा बदलाव, वक्री होकर लौटेगा शनि
शनि का अगला बड़ा राशि परिवर्तन 2027 में होने जा रहा है, जब यह मीन राशि से निकलकर मेष राशि में दाखिल होगा। लेकिन यह प्रवेश तुरंत स्थायी नहीं रहेगा, क्योंकि कुछ समय बाद शनि वक्री होकर दोबारा मीन राशि में लौट आएगा। यह घटनाक्रम बताता है कि किसी राशि में शनि का पहला प्रवेश और उसका स्थायी ठहराव अक्सर अलग-अलग समय पर होता है, इसलिए किसी नई साढ़ेसाती या ढैया के शुरू होने की पुष्टि आखिरी और स्थायी गोचर के बाद ही मानी जाती है।
23 फरवरी 2028: मेष राशि में शनि की स्थायी वापसी
वक्री दौर पूरा होने के बाद शनि 23 फरवरी 2028 को स्थायी रूप से मेष राशि में प्रवेश करेगा। ज्योतिष की मान्यता के मुताबिक यही वह तारीख है जब साढ़ेसाती और ढैया का पूरा क्रम नई राशियों पर शिफ्ट होगा, यानी जिन राशियों पर अभी यह असर चल रहा है, वहां से यह अध्याय बंद होकर दूसरी राशियों पर खुलने लगेगा।
इस स्थायी गोचर के बाद साढ़ेसाती की नई सूची इस तरह बनेगी, वृषभ राशि पर पहला चरण शुरू होगा, मेष राशि पर दूसरा चरण चलेगा और मीन राशि पर तीसरा एवं आखिरी चरण रहेगा। इसके साथ ही कुंभ राशि के जातक साढ़ेसाती के पूरे प्रभाव से पूरी तरह बाहर निकल जाएंगे, यानी उनके लिए यह लंबा दौर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
साढ़ेसाती और ढैया का हिसाब कैसे लगाया जाता है
इसका गणित इस तरह समझा जाता है, शनि जब किसी व्यक्ति की चंद्र राशि से ठीक पहले वाली राशि में प्रवेश करता है, फिर खुद चंद्र राशि से गुजरता है और आखिर में अगली राशि में पहुंचता है, तो इन तीन पड़ावों को पार करने में लगने वाला पूरा समय, करीब साढ़े सात साल, साढ़ेसाती कहलाता है। इसके उलट, चंद्र राशि से चौथे या आठवें घर में शनि के गोचर वाले दौर को ढैया का नाम दिया जाता है।
27 जुलाई 2026 से शनि की वक्री चाल का असर
ज्योतिष में यह भी बताया जा रहा है कि शनि 27 जुलाई 2026 से वक्री होने जा रहा है। वक्री यानी उल्टी चाल की अवस्था में ग्रह अपनी सामान्य गति से पीछे की ओर बढ़ता प्रतीत होता है, और इसी वजह से शनि से जुड़े योग और साढ़ेसाती-ढैया की चर्चा फिलहाल और तेज हो गई है। जो राशियां पहले से साढ़ेसाती या ढैया के दायरे में हैं, उनके लिए यह वक्री दौर मौजूदा परिस्थितियों को और करीब से समझने का एक संकेत माना जा रहा है।
ज्योतिष के नजरिए से यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से जिन राशियों पर साढ़ेसाती और ढैया का असर चल रहा था, वे धीरे-धीरे इस दायरे से बाहर आने वाली हैं, जबकि दूसरी राशियों के लिए यह दौर नए सिरे से शुरू होगा। यही वजह है कि 2027 और 2028 के बीच होने वाले शनि के राशि परिवर्तन को ज्योतिष जगत में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका असर करोड़ों लोगों की दैनिक जिंदगी, फैसलों और मानसिक तैयारी पर पड़ने वाला है।
















