हिंदू धर्म में श्रावण का महीना अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। यह पूरा महीना देवों के देव महादेव की भक्ति, साधना और आराधना को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई भक्त इस पूरे माह निष्ठा, सच्चे मन और विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं अंक ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से देखा जाए तो कुछ विशेष तारीखों में जन्मे जातकों पर भोलेनाथ की विशेष अनुकंपा होती है। ज्योतिषीय गणना बताती है कि मूलांक 2, 7 और 9 से संबंध रखने वाले लोगों के सिर पर शिवजी का वरदहस्त हमेशा बना रहता है। यदि आपका जन्म इन विशिष्ट मूलांकों से जुड़ी तारीखों में हुआ है, तो सावन के दौरान किए जाने वाले कुछ बेहद सरल उपाय जीवन की तमाम परेशानियों और मानसिक तनाव को दूर कर सकते हैं।
अंक ज्योतिष में मूलांक की गणना और सावन का महत्व
अंक शास्त्र में व्यक्ति की जन्म तिथि के योग को मूलांक कहा जाता है। किसी भी महीने की किसी तारीख को यदि एकल अंक में बदल दिया जाए, तो वही उस व्यक्ति का मुख्य मूलांक कहलाता है। सावन का महीना शिव पूजा के लिए विशेष ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। इस अवधि में ब्रह्मांडीय ऊर्जा और ग्रहों का प्रभाव भी भक्तों पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। विशेष रूप से चंद्रमा, केतु और मंगल ग्रह से संचालित मूलांक वाले जातकों के लिए सावन में की गई पूजा त्वरित और स्थायी फल देने वाली मानी गई है।
मूलांक 2: चंद्रमा का प्रभाव और सोमेश्वर पूजा का विधान
यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 2 बनता है। अंक शास्त्र के अनुसार मूलांक 2 का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। भगवान शिव की रूप सज्जा में चंद्रमा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अपने मस्तक पर चंद्र देव को धारण किए हुए हैं। इसी कारण से अंक ज्योतिष की दुनिया में यह माना जाता है कि मूलांक 2 वाले लोगों पर भोलेनाथ की सीधी कृपा होती है।
स्वभाव की बात करें तो मूलांक 2 के जातक आमतौर पर शांत, भावुक और संवेदनशील प्रकृति के होते हैं। दूसरों की सहायता करने के लिए ये लोग सदैव तत्पर रहते हैं। हालांकि, चंद्रमा के प्रभाव के कारण इनमें अत्यधिक विचार करने यानी ओवरथिंकिंग और मन के विचलित होने की प्रवृत्ति भी पाई जाती है।
सावन के विशेष उपाय:
- सावन के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध और सफेद चंदन अर्पित करें।
- पूजा के दौरान निरंतर ॐ सोमेश्वराय नमः मंत्र का जाप करें।
- यह उपाय करने से मानसिक अस्थिरता और अत्यधिक सोचने की समस्या समाप्त होती है तथा मन में स्थायी शांति का वास होता है।
मूलांक 7: केतु का स्वामित्व और बाधा मुक्ति के उपाय
जिन जातकों का जन्म किसी भी महीने की 7, 16 या 25 तारीख को होता है, उनका मूलांक 7 कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र में मूलांक 7 का स्वामी ग्रह केतु को माना गया है। केतु के प्रभाव के कारण इस मूलांक के लोग बेहद जिज्ञासु, शोधकर्ता और नई चीजें सीखने के प्रति समर्पित होते हैं। इनकी सोच सामान्य लोगों से काफी अलग और मौलिक होती है।
केतु ग्रह का संबंध आध्यात्मिक चेतना से भी है और भगवान शिव स्वयं समस्त योगियों और ऊर्जाओं के अधिपति हैं, इसलिए मूलांक 7 के जातकों पर भी शिवजी की असीम अनुकंपा मानी जाती है।
सावन के विशेष उपाय:
- सावन के पूरे महीने प्रतिदिन शिवलिंग पर शुद्ध गंगाजल और आक के फूल अर्पित करें।
- नियमित रूप से रोज शिव चालीसा का पाठ करने का प्रयास करें।
- धार्मिक मान्यता है कि इस उपाय से जीवन में आ रही पुरानी रुकावटें और बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं तथा नकारात्मक सोच पर पूर्ण विराम लगता है।
मूलांक 9: मंगल का पराक्रम और आर्थिक समृद्धि के लिए पूजा
अंक शास्त्र के अनुसार मूलांक 9 वाले जातकों पर भी महादेव का विशेष आशीर्वाद बरसता है। यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 9 बनता है। इस मूलांक का सीधा संबंध ऊर्जा और पराक्रम के कारक मंगल ग्रह से होता है।
मंगल ग्रह की ऊर्जा से युक्त होने के कारण मूलांक 9 के जातक अत्यधिक साहसी, निडर और मेहनती होते हैं। जीवन में आने वाली किसी भी कठिन से कठिन चुनौती का सामना वे डटकर करते हैं। हालांकि, कई बार मंगल के प्रभाव से इनके भीतर गुस्सा या उग्रता देखने को मिलती है।
सावन के विशेष उपाय:
- सावन के दौरान रोजाना शिवलिंग पर लाल चंदन और शहद अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- यह उपाय करने से धन और संपत्ति से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं तथा आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है।
- साथ ही, इस पूजन विधान से अनियंत्रित गुस्से पर काबू पाने और ऊर्जा को सही दिशा देने में मदद मिलती है।
सावन में शिव आराधना के नियम और ध्यान रखने योग्य बातें
भगवान शिव भाव के भूखे माने जाते हैं। मूलांक आधारित इन उपायों को करते समय सावन के दौरान सात्विकता, स्वच्छता और मन की शुद्धता का ध्यान रखना आवश्यक है। सुबह स्नान के पश्चात पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर संबंधित वस्तुएं अर्पित करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।



















