रिश्तों की डोर केवल अच्छे वक्त में नहीं, बल्कि मुश्किल घड़ियों की कसौटी पर परखी जाती है। अंक ज्योतिष की दुनिया में अंकों के प्रभाव से व्यक्ति के बुनियादी स्वभाव, व्यवहार और जीवन मूल्यों को समझने का प्रयास किया जाता है। कई बार देखा गया है कि कुछ खास अंकों के प्रभाव वाले लोग संकट के समय पीछे हटने के बजाय एक मजबूत ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं। न्यूमरोलॉजी के विश्लेषकों के मुताबिक, मूलांक 1, मूलांक 8 और मूलांक 9 से संबंधित जातकों में निष्ठा, सच्चाई और जिम्मेदारी निभाने का जज्बा सबसे ज्यादा देखा जाता है। ये लोग अपनों के प्रति गहरा समर्पण रखते हैं और कठिन समय में भी साथ नहीं छोड़ते हैं।
मूलांक 1 वाले लोगों का नेतृत्व और ईमानदारी भरा अंदाज
कैलेंडर के किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्तियों का मूलांक 1 निर्धारित होता है। अंक शास्त्र में इस अंक का अधिपति सूर्य ग्रह को स्वीकार किया गया है। सूर्य आत्मबल, तेज, ऊर्जा और स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है। इसी खगोलीय प्रभाव के कारण मूलांक 1 के लोगों में आत्मनिर्भरता, स्वतंत्र निर्णय लेने की ताकत और अपने बलबूते जीवन में आगे बढ़ने का मजबूत रुझान पाया जाता है।
जब बात व्यक्तिगत रिश्तों की आती है, तो मूलांक 1 के व्यक्ति हमेशा पारदर्शिता और सीधी बात को प्राथमिकता देते हैं। इन्हें छल-कपट, हेरफेर या झूठ से सख्त नफरत होती है। यदि कोई मित्र या परिजन इनके साथ पूरी सच्चाई से पेश आता है, तो ये उस संबंध को अटूट निष्ठा और गंभीरता के साथ निभाते हैं। जब भी परिवार का कोई सदस्य या नजदीकी दोस्त विपत्ति में फंसता है, तो ये अपनी पूरी सामर्थ्य झोंककर उसकी सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। हालांकि इनके रिश्ते में एक सख्त पहलू भी है। यदि एक बार इनका विश्वास टूट जाए, तो इन्हें दोबारा मनाना और पुराना रिश्ता बहाल करना बेहद कठिन काम होता है। इसलिए इनके साथ सदैव पारदर्शी और साफ-सुथरा व्यवहार बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
मूलांक 8 के जातकों का धैर्य, अनुशासन और अटूट प्रतिबद्धता
अंक ज्योतिष में मूलांक 8 का स्वामी ग्रह शनि को स्वीकार किया गया है। शनि ग्रह कर्म, कड़े अनुशासन, न्याय और असीम धैर्य का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रभाव के कारण मूलांक 8 के अंतर्गत आने वाले लोग बहुत ही गंभीर, परिपक्व और हर कदम फूंक-फूंककर रखने वाले होते हैं। ये किसी भी नए व्यक्ति पर आंख मूंदकर तुरंत भरोसा नहीं करते और किसी को अपने व्यक्तिगत दायरे में लाने तथा रिश्ता जोड़ने में पर्याप्त समय लेते हैं।
धीमी शुरुआत के बावजूद, जब ये किसी व्यक्ति को दिल से अपना मान लेते हैं, तो उस रिश्ते को जीवनभर निभाने का संकल्प रखते हैं। मूलांक 8 वालों का सबसे बड़ा गुण उनका अद्भुत धैर्य है। जब जिंदगी में विपरीत परिस्थितियां आती हैं या इनका कोई साथी मुश्किल दौर से जूझ रहा होता है, तो ये घबराकर या निराश होकर मैदान छोड़ने के बजाय डटकर स्थिति का सामना करते हैं। यदि इनके साथ सत्यनिष्ठा और सच्चाई का भाव रखा जाए, तो ये विकट से विकट संकट में भी साथ नहीं छोड़ते हैं। लेकिन यदि इन्हें विश्वासघात या धोखे का सामना करना पड़े, तो ये भावनात्मक रूप से खुद को उस संबंध से हमेशा के लिए अलग कर लेते हैं।
मूलांक 9 का पराक्रम और अपनों के लिए बिना कहे मदद का भाव
किसी भी महीने की 9, 18 या 27 तारीख को पैदा होने वाले लोगों का मूलांक 9 होता है। अंक शास्त्र के अनुसार इस अंक का प्रतिनिधित्व मंगल ग्रह करता है। मंगल को साहस, अदम्य ऊर्जा, पराक्रम और शौर्य का कारक माना जाता है। इस उग्र ग्रह के प्रभाव से मूलांक 9 के जातक बाहरी तौर पर थोड़े कड़क, मुखर या गुस्सैल दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इनके भीतर की सच्चाई बिल्कुल अलग होती है।
बाहरी आवरण सख्त होने के बावजूद इनके मन में अपने परिजनों और दोस्तों के लिए अगाध स्नेह और अपनापन छिपा रहता है। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये अपनों को परेशानी में देखकर मूकदर्शक बनकर कभी नहीं बैठ सकते हैं। कई बार ऐसी नौबत भी नहीं आती कि सामने वाला अपनी मजबूरी या समस्या शब्दों में बयां करे, उससे पहले ही ये मदद का हाथ आगे बढ़ा देते हैं। दोस्ती हो या खून का रिश्ता, जिसे इन्होंने एक बार अपना मान लिया, उसकी हिफाजत और मदद के लिए ये किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं।
तीनों अंकों में समान निष्ठा, पर व्यक्तित्व के अलग आधार
स्वभाव के स्तर पर मूलांक 1, 8 और 9 के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है, लेकिन अंक ज्योतिष के अनुसार रिश्तों के निर्वहन में तीनों के बीच एक अद्भुत सामंजस्य और समानता मिलती है। तीनों ही अंक भरोसे को सर्वोपरि मानते हैं और अपने करीबियों के साथ चट्टान की तरह खड़े रहते हैं।
रिश्तों की इस डोर में मूलांक 1 की ताकत उसकी ईमानदारी और पारदर्शिता है, मूलांक 8 का संबल उसका धैर्य और ठहराव है, जबकि मूलांक 9 की पहचान उसका अगाध अपनापन और रक्षात्मक रवैया है। हालांकि यह समझना भी उतना ही आवश्यक है कि मनुष्य का सम्पूर्ण व्यक्तित्व केवल मूलांक के आधार पर तय नहीं होता है। व्यक्ति के पारिवारिक संस्कार, परवरिश और जीवन के वास्तविक अनुभवों की भी उसके आचरण और वफादारी में निर्णायक भूमिका होती है।



















