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सोमवार व्रत को लेकर छाया कन्फ्यूजन, जानिए सावन 2026 में असल में कितने सोमवार पड़ेंगेराशिफल
2 घंटे पहले· 1

सोमवार व्रत को लेकर छाया कन्फ्यूजन, जानिए सावन 2026 में असल में कितने सोमवार पड़ेंगे

सावन 2026 में उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार कुल चार ही सोमवार पड़ेंगे, यहां जानिए सही तारीखें और पांच सोमवार वाले भ्रम की असली वजह।

डॉ. आदित्य शर्माडॉ. आदित्य शर्मावैदिक विद्वान 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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हर साल सावन शुरू होने से पहले एक ही सवाल हर शिवभक्त के मन में उठता है, इस बार सोमवार का व्रत चार बार रखना होगा या पांच बार। भगवान शिव की भक्ति के लिए साल का सबसे पवित्र और खास महीना माने जाने वाले सावन में करोड़ों श्रद्धालु मंदिरों में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ सोमवारी व्रत रखते हैं। हर साल सोशल मीडिया पर सोमवार की गिनती को लेकर अलग अलग दावे चलते रहते हैं, जिससे आम लोगों के बीच उलझन बनी रहती है। आइए साफ तौर पर समझते हैं कि साल 2026 के सावन में असल में कितने सोमवार पड़ रहे हैं और इनकी सही तारीखें क्या हैं।

सावन कब शुरू होगा और कब होगा समापन

उत्तर भारत में जिस पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है, उसके हिसाब से साल 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगा। यह पवित्र महीना 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ खत्म होगा। यानी करीब एक महीने तक चलने वाले इस पर्व काल में शिवभक्तों के लिए पूजा पाठ, रुद्राभिषेक और व्रत का सिलसिला लगातार चलता रहेगा। पूरे महीने मंदिरों में विशेष श्रृंगार, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान होंगे, जिनमें शामिल होने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। कांवड़ यात्रा से लेकर मंदिरों में लगने वाली लंबी कतारों तक, सावन का यह पूरा महीना आस्था और भक्ति के माहौल में डूबा रहता है। शहर हो या गांव, इस महीने भर छोटे-बड़े शिव मंदिरों में रोजाना सुबह-शाम आरती और जलाभिषेक का क्रम बना रहता है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है।

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चार या पांच सोमवार, कन्फ्यूजन की असली वजह क्या है

उत्तर भारत के पंचांग के मुताबिक इस साल सावन में कुल चार ही सोमवार पड़ेंगे। लेकिन हर साल सोशल मीडिया पर पांच सोमवार होने की बातें भी खूब चलती हैं, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन जाती है। दरअसल इसकी वजह यह है कि पूरे देश में सावन शुरू होने और खत्म होने की तारीख एक जैसी नहीं होती। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का चलन है, जबकि दक्षिण भारत और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अमांत पंचांग को माना जाता है। पूर्णिमांत पंचांग में महीना पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर अगली पूर्णिमा तक चलता है, जबकि अमांत पंचांग में महीने की गिनती अमावस्या से अगली अमावस्या तक की जाती है। दोनों पंचांगों में महीने की गणना का यह अलग अलग तरीका ही असली वजह है कि एक ही सावन महीने की शुरुआत और समाप्ति की तारीखों में अंतर देखने को मिलता है। यही कारण है कि किसी इलाके में सावन के चार सोमवार बनते हैं तो किसी दूसरे इलाके में पांच सोमवार भी बन जाते हैं। इसीलिए जब भी सोमवार व्रत की तारीखों से जुड़ी कोई जानकारी पढ़ें, तो पहले यह जरूर देख लें कि वह जानकारी किस पंचांग के आधार पर दी गई है, वरना कन्फ्यूजन बना रह सकता है और व्रत या मंदिर दर्शन की योजना गड़बड़ा सकती है।

सावन 2026 की सोमवारी व्रत की पूरी तारीखें

30 जुलाई गुरुवार से शुरू होकर 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ खत्म होने वाले इस सावन में उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार कुल चार सोमवार पड़ रहे हैं। पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को, दूसरा सावन सोमवार 10 अगस्त को, तीसरा सावन सोमवार 17 अगस्त को और चौथा व आखिरी सावन सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा। यानी इन चार सोमवार को व्रत रखकर श्रद्धालु शिव मंदिरों में जलाभिषेक कर सकेंगे। इन चारों तारीखों पर मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद रहती है और पूरे दिन जलाभिषेक व रुद्राभिषेक का कार्यक्रम चलता रहता है। जो श्रद्धालु दूर के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, वे इन चार तारीखों को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा और दर्शन का कार्यक्रम पहले से तय कर सकते हैं, ताकि भीड़ और लंबी कतारों में भी परेशानी न हो।

सोमवार व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना लेकर यह व्रत रखते हैं, वहीं विवाहित लोग अपने परिवार में सुख समृद्धि बनाए रखने के लिए सोमवारी व्रत करते हैं। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ रखा गया सावन सोमवार का व्रत भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देता है। यही वजह है कि सावन के महीने में शिव मंदिरों के बाहर हर सोमवार को लंबी कतारें देखने को मिलती हैं और भक्त घंटों इंतजार करके भी जलाभिषेक करने से पीछे नहीं हटते। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी शहरों और गांवों में उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है, जितनी पहले निभाई जाती थी।

इसका आप पर असर

  • व्रत रखने वालों के लिए: जो श्रद्धालु सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, वे 3, 10, 17 और 24 अगस्त की तारीखें अभी से नोट कर लें ताकि व्रत और मंदिर दर्शन की तैयारी समय पर हो सके।
  • कन्फ्यूजन से बचने के लिए: सोशल मीडिया पर सोमवार की गिनती को लेकर चलने वाले अलग अलग दावों पर भरोसा करने से पहले यह जरूर देख लें कि जानकारी किस पंचांग पर आधारित है, ताकि व्रत की योजना गड़बड़ा न जाए।

सवाल-जवाब

साल 2026 में सावन कब से शुरू होगा?
उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार सावन 30 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगा।
सावन 2026 का समापन कब होगा?
सावन का समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा।
सावन 2026 में कुल कितने सोमवार पड़ेंगे?
उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार इस बार सावन में कुल चार सोमवार पड़ेंगे।
सावन सोमवार की सही तारीखें क्या हैं?
पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को पड़ेगा।
कुछ जगह सावन में 5 सोमवार होने की बात क्यों कही जाती है?
यह अंतर उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग और दक्षिण-पश्चिम भारत के अमांत पंचांग की अलग अलग गणना के कारण आता है, जिससे कहीं चार तो कहीं पांच सोमवार बन जाते हैं।
सोमवार व्रत में शिवलिंग पर क्या अर्पित किया जाता है?
श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करते हैं।
सोमवार का व्रत रखने से क्या मान्यता जुड़ी है?
मान्यता है कि इस व्रत से अविवाहितों को अच्छा जीवनसाथी मिलता है और विवाहितों के परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है।
डॉ. आदित्य शर्मा
लेखक के बारे मेंडॉ. आदित्य शर्मावैदिक विद्वान वाराणसी
विशेषज्ञतागणित ज्योतिष (गणित ज्योतिषा), ज्योतिष शास्त्रों की पाठ-समीक्षा, वास्तु शास्त्र समन्वय, ऐतिहासिक कुंडलियों का ज्योतिषीय डेटा संरक्षण एवं डिजिटल कैटलॉगिंग और व्याख्या

20 वर्षों से अधिक अनुभव वाले वैदिक ज्योतिष विद्वान (ज्योतिष आचार्य), जो जन्म कुंडलियों और प्राचीन संस्कृत ग्रंथों की व्याख्या करते हैं। खगोलीय गणित और मानवीय संभावनाओं के बीच की खाई को पाटने के प्रति समर्पित।

आदित्य शर्मा एक विद्वान हैं जो वैदिक ज्योतिष प्रणालियों के कठोर तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित हैं। उनका काम शास्त्रीय संस्कृत ग्रंथों में मिलने वाली प्राचीन गणनात्मक विधियों का विश्लेषण और संरक्षण करना है। उन्होंने पारंपरिक कुंडलियों और तकनीकों के विविध संग्रहों का कैटलॉग व व्याख्या की है, और ज्योतिष परंपरा के आधार बनने वाली गणितीय परिशुद्धता पर ध्यान केंद्रित किया है। वे ज्योतिष की खगोलीय व गणनात्मक जड़ों पर विशेष परामर्श, कार्यशालाओं और व्याख्यानों के लिए उपलब्ध हैं।

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