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जुलाई के अंत में शनि बदलेंगे चाल, साढ़ेसाती की चपेट में तीन राशियों की मुश्किलें बढ़ने के आसारराशिफल
6 जुल॰ 2026, 11:18 am (45 दिन पहले)· 2

जुलाई के अंत में शनि बदलेंगे चाल, साढ़ेसाती की चपेट में तीन राशियों की मुश्किलें बढ़ने के आसार

29 जुलाई को शनि मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं, जिसका असर सभी राशियों पर माना जाता है, लेकिन साढ़ेसाती से गुजर रहीं मेष, मीन और कुंभ राशि के लिए यह दौर खास तौर पर सतर्क रहने वाला बताया जा रहा है।

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर माना जाता है, और अगले कुछ हफ्तों में सबसे ज्यादा चर्चा शनि की चाल को लेकर होने वाली है। 29 जुलाई को शनि मीन राशि में वक्री हो जाएंगे, यानी अपनी दिशा उल्टी कर लेंगे। यह बदलाव सभी बारह राशियों को किसी न किसी रूप में छूता है, लेकिन जिन राशियों पर पहले से साढ़ेसाती चल रही है, उनके लिए इस दौर की अहमियत कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। फिलहाल मेष, मीन और कुंभ राशि के जातक इसी साढ़ेसाती के दायरे में आते हैं, इसलिए शनि की यह उल्टी चाल इन तीनों राशियों के लिए एक तरह की परीक्षा जैसी साबित हो सकती है।

वक्री शनि का ज्योतिषीय मतलब क्या है

ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मफल देने वाला ग्रह कहा जाता है, यानी इंसान ने जैसे कर्म किए हैं, वैसा ही फल शनि उसे लौटाता है। जब कोई ग्रह वक्री होता है, तो पृथ्वी से देखने पर वह अपनी तय दिशा से उल्टा चलता हुआ दिखाई देता है। ज्योतिष में इस दौर को आत्ममंथन, पुराने फैसलों की समीक्षा और अधूरे कामों को निपटाने का समय माना जाता है। यही वजह है कि शनि जब वक्री होते हैं, तो बहुत से लोगों के रुके हुए काम अचानक फिर से गति पकड़ सकते हैं, जबकि कुछ लोगों को अपनी मेहनत का पूरा फल मिलने में देर भी लग सकती है। दोनों ही स्थितियां इस बात पर निर्भर करती हैं कि जन्म कुंडली में शनि किस स्थिति में बैठा है।

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साढ़ेसाती के तीन चरण और इसका महत्व

ज्योतिष में साढ़ेसाती शनि के गोचर से जुड़ी करीब साढ़े सात साल की वह अवधि होती है, जिसमें शनि व्यक्ति की चंद्र राशि से पहले, उसी राशि पर और फिर उसके बाद वाली राशि से होकर गुजरता है। इसे तीन चरणों में बांटा जाता है, और हर चरण का असर जिंदगी के अलग अलग हिस्सों पर अलग तरीके से पड़ता माना जाता है। मेष, मीन और कुंभ राशि के जातक फिलहाल इसी साढ़ेसाती के अलग अलग चरणों से गुजर रहे हैं, इसलिए शनि की वक्री चाल का असर तीनों पर एक जैसा नहीं, बल्कि उनके चरण के हिसाब से अलग अलग रहने की संभावना जताई जा रही है।

मेष राशि: पहला चरण, खर्च और जल्दबाजी से बचें

मेष राशि पर इस समय साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। इस दौर में खर्च बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे बजट संभालना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। काम का दबाव भी महसूस हो सकता है, ऐसे में दिमाग पर बेवजह का बोझ ले लेना आसान है। इसी वजह से जल्दबाजी में कोई भी बड़ा फैसला लेने से साफ बचने की सलाह दी जा रही है। नौकरी हो या अपना कारोबार, दोनों ही जगह धैर्य बनाए रखना बेहतर रहेगा, क्योंकि उतावलापन नुकसान की वजह बन सकता है। इसके अलावा शनि के वक्री होने के साथ मेष राशि वालों को अपने स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी, क्योंकि इस दौर में शरीर पर भी दबाव पड़ सकता है।

मीन राशि: दूसरा चरण, जिम्मेदारियां बढ़ने के आसार

मीन राशि के जातक साढ़ेसाती के दूसरे चरण से गुजर रहे हैं। शनि की वक्री चाल के दौरान काम की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ सकती हैं, जिससे रोजमर्रा की व्यस्तता में इजाफा हो सकता है। ऐसे समय में सेहत और पैसों से जुड़े मामलों में लापरवाही बिल्कुल न बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि जरा सी चूक आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है। हालांकि इस दौर का एक सकारात्मक पहलू भी है, पुराने अटके हुए काम पूरे करने का मौका इसी दौरान मिल सकता है, इसलिए जो काम लंबे समय से टलते आ रहे हैं, उन्हें निपटाने के लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है।

कुंभ राशि: आखिरी चरण, राहत के साथ सतर्कता भी जरूरी

कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का आखिरी चरण चल रहा है, और इसी वजह से लंबे समय से चली आ रही कुछ परेशानियों में राहत मिलने के संकेत मिल सकते हैं। हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि सावधानी छोड़ दी जाए, कामकाज में अनुशासन बनाए रखना अब भी उतना ही जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में भी सोच-समझकर ही कदम बढ़ाने की सलाह दी गई है, क्योंकि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी आर्थिक फैसला उलटा पड़ सकता है। कुल मिलाकर कुंभ राशि वालों को किसी भी फैसले पर पहुंचने से पहले अच्छी तरह सोच विचार कर लेना चाहिए, तभी राहत का यह दौर पूरा फायदा दे पाएगा।

बाकी नौ राशियों पर भी पड़ेगा असर

शनि की वक्री चाल का असर सिर्फ इन्हीं तीन राशियों तक सीमित नहीं है, ज्योतिष के मुताबिक इसका प्रभाव सभी बारह राशियों पर किसी न किसी रूप में देखने को मिलता है। फर्क सिर्फ इतना है कि जिन राशियों पर साढ़ेसाती या ढैय्या पहले से चल रही होती है, उनके जीवन में यह असर थोड़ा ज्यादा गहराई से महसूस होता है। इसके अलावा हर व्यक्ति की अपनी जन्म कुंडली में शनि की स्थिति भी अलग होती है, इसलिए एक ही राशि के दो लोगों पर भी इसका नतीजा अलग अलग तरीके से सामने आ सकता है। यही वजह है कि सामान्य राशिफल के साथ साथ अपनी निजी कुंडली को समझना भी उतना ही जरूरी माना जाता है, ताकि यह पता चल सके कि 29 जुलाई के बाद का यह दौर निजी तौर पर किस दिशा में असर डालने वाला है।

सवाल-जवाब

शनि कब वक्री होंगे और किस राशि में?
29 जुलाई को शनि मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं।
शनि की वक्री चाल का सबसे ज्यादा असर किन राशियों पर बताया जा रहा है?
मेष, मीन और कुंभ राशि पर, क्योंकि इन तीनों पर फिलहाल साढ़ेसाती चल रही है।
मेष राशि वालों को इस दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
खर्च बढ़ने और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें, नौकरी-कारोबार में धैर्य रखें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
मीन राशि पर साढ़ेसाती का कौन सा चरण चल रहा है?
मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है, जिसमें काम की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं।
कुंभ राशि वालों के लिए इस दौर के क्या संकेत हैं?
कुंभ राशि साढ़ेसाती के आखिरी चरण में है, इसलिए पुरानी परेशानियों में राहत के संकेत मिल सकते हैं, लेकिन अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।
क्या शनि की वक्री चाल का असर सिर्फ इन तीन राशियों तक सीमित है?
नहीं, ज्योतिष के अनुसार यह असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है, बस साढ़ेसाती या ढैय्या वाली राशियों पर यह ज्यादा गहराई से महसूस होता है।
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