अंक शास्त्र में व्यक्ति की जन्मतिथि के आधार पर निकाले जाने वाले मूलांक का सीधा संबंध उसके स्वभाव और व्यवहार से जोड़ा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुछ खास मूलांकों से ताल्लुक रखने वाले लोगों के भीतर माता-पिता के प्रति अगाध प्रेम, गहरा सम्मान और अटूट जिम्मेदारी का भाव कूट-कूट कर भरा होता है। इन खास अंकों में मूलांक 2, मूलांक 6 और मूलांक 9 को सबसे ऊपर माना गया है। ये जातक अपने बुजुर्गों की हर खुशी का खास ख्याल रखते हैं और परिवार के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। जन्मतिथि के अंकों का यह प्रभाव इंसान के भीतर के संस्कारों और उसके पैतृक जुड़ाव को एक नई दिशा देता है, जिससे पारिवारिक रिश्ते और अधिक मजबूत होते चले जाते हैं।
मूलांक 2: भावनाओं और संवेदनशीलता से भरा समर्पण
किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को जन्म लेने वाले जातकों का मूलांक 2 बनता है। अंक ज्योतिष के नियमों के मुताबिक इस अंक के स्वामी चंद्रमा हैं, जिनका सीधा नाता इंसान के मन और उसकी भावनाओं से होता है। यही वजह है कि मूलांक 2 वाले लोग स्वभाव से बेहद कोमल, भावुक और संवेदनशील होते हैं। इनके लिए अपने माता-पिता की खुशी से बढ़कर दुनिया में कुछ भी मायने नहीं रखता है। ये लोग अपने परिवार के साथ अधिक से अधिक वक्त बिताना पसंद करते हैं और अपनों के करीब रहना इनकी प्राथमिकता होती है। इनके व्यवहार में माता-पिता की छोटी से छोटी बात पर भी पूरा ध्यान देने की प्रवृत्ति पाई जाती है। वे अपने बुजुर्गों को कभी भी अकेला या असहज महसूस नहीं होने देते हैं और जरूरत पड़ने पर उनका मजबूत सहारा बनकर खड़े रहते हैं।
मूलांक 6: प्रेम, अपनापन और रिश्तों की डोर
जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 6 होता है। अंक शास्त्र में इस अंक का सीधा संबंध शुक्र ग्रह से माना गया है, जिसे प्रेम, आपसी सौहार्द और पारिवारिक रिश्तों का कारक माना जाता है। इस मूलांक से जुड़े लोग अपने परिवार की खुशियों को अपनी जिंदगी में सर्वोच्च स्थान देते हैं। ये माता-पिता की भावनाओं को गहराई से समझते हैं और उनकी हर जरूरत का खास ख्याल रखते हैं। घर के भीतर एक सुखद और सकारात्मक माहौल बनाए रखने में इनकी बहुत बड़ी भूमिका होती है। मूलांक 6 वाले जातकों के स्वभाव में अपनों के प्रति अनूठा अपनापन साफ झलकता है। यदि माता-पिता पर कोई संकट आ जाए या उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी हो, तो ये सबसे आगे आकर उनकी मदद संभालते हैं। कई बार ये अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग करके भी घरवालों की खातिर डटे रहते हैं और माता-पिता के हर फैसले का पूर्ण सम्मान करते हैं।
मूलांक 9: साहस, ऊर्जा और अटूट जिम्मेदारी
किसी भी महीने की 9, 18 या 27 तारीख को जन्म लेने वाले लोगों का मूलांक 9 होता है। अंक शास्त्र की गणना में इस अंक का स्वामी मंगल ग्रह को बताया गया है, जो साहस, अदम्य ऊर्जा और जीवन के संघर्षों का प्रतीक है। मूलांक 9 वाले जातक अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को अत्यंत गंभीरता से निभाते हैं। जब कभी भी माता-पिता के सामने कोई मुश्किल परिस्थिति आती है, तो ये जातक ढाल बनकर उनके आगे खड़े हो जाते हैं। इन लोगों के मन में माता-पिता की सुरक्षा और परिवार की भलाई को लेकर एक विशेष चिंता और समर्पण भाव रहता है। हालांकि इनका स्वभाव कभी-कभी थोड़ा तेज या आक्रामक हो सकता है, लेकिन इनके दिल में माता-पिता के प्रति सम्मान कभी कम नहीं होता। परिवार के लिए हरसंभव प्रयास करना और हर संकट में उनका साथ देना इनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी है।
व्यक्तिगत स्वभाव और परवरिश का मिलाजुला असर
अंक ज्योतिष की मान्यताओं के अनुसार मूलांक 2, 6 और 9 वाले जातकों में माता-पिता की सेवा और आदर का भाव अनोखे ढंग से प्रकट होता है। कोई अपनी भावनाओं और संवेदनशीलता के जरिए परिवार का हाथ थामता है, तो कोई अपनी दृढ़ जिम्मेदारियों के बल पर माता-पिता का संबल बनता है। इन तीनों ही मूलांकों में अपनों के प्रति लगाव अलग-अलग रूपों में नजर आता है। हालांकि अंक शास्त्र इंसान के व्यक्तित्व के केवल कुछ खास पहलुओं की तरफ इशारा भर करता है, लेकिन किसी का भी पूरा व्यवहार केवल उसके मूलांक से तय नहीं होता। इंसान के व्यक्तित्व को संवारने में उसके घर के माहौल, मिले हुए संस्कारों, शिक्षा, संगति और जीवन के तमाम अनुभवों की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है। असल जिंदगी में माता-पिता के प्रति प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा व्यक्ति के व्यक्तिगत संस्कारों पर भी निर्भर करती है।


















