जब भी भारतीय सिनेमा में एक आदर्श पिता या परिवार के मुखिया का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम अभिनेता आलोक नाथ का जेहन में आता है। बड़े पर्दे से लेकर छोटे पर्दे तक, उन्होंने खुद को एक ऐसे 'बाबूजी' के रूप में स्थापित किया है जिसे हर घर में सम्मान मिला। 'मैंने प्यार किया', 'हम आपके हैं कौन' और 'विवाह' जैसी कालजयी फिल्मों में उनके किरदारों ने उन्हें एक ऐसी पहचान दी जो दर्शकों के दिलों में बस गई। लेकिन, यह संस्कारी छवि उनकी पूरी कहानी नहीं है। जिस अभिनेता को आज दुनिया एक सौम्य और शांत पिता के तौर पर देखती है, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में रोमांटिक और बोल्ड किरदारों के साथ भी प्रयोग किए थे।
बोल्ड किरदारों से शुरुआत
साल 1987 में प्रदर्शित फिल्म 'कामाग्नि' उनके अभिनय जीवन का एक ऐसा हिस्सा है जिसे बहुत कम लोग याद करते हैं। उस दौर में आलोक नाथ ने एक रोमांटिक भूमिका निभाई थी, जिसमें उनके कुछ बोल्ड दृश्य भी शामिल थे। ये दृश्य उस समय खासी चर्चा का विषय बने थे, जो आज की उनकी सादगी भरी छवि के बिल्कुल विपरीत नजर आते हैं।
डॉक्टरी छोड़ अभिनय को चुना
आलोक नाथ का जन्म 10 जुलाई 1956 को दिल्ली में हुआ था। एक डॉक्टर पिता और गृहिणी मां के घर पले-बढ़े आलोक के लिए उनके पिता की इच्छा थी कि वह भी चिकित्सा के क्षेत्र में ही अपना करियर बनाएं। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। दिल्ली में अपनी शिक्षा पूरी करने के दौरान उनका रुझान मंच की ओर बढ़ने लगा। वह रुचिका थिएटर ग्रुप से जुड़े और बाद में उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में प्रवेश लिया, जहां से उन्होंने तीन साल तक अभिनय की बारीकियों का बारीकी से अध्ययन किया।
पहला मौका और संघर्ष
उनके करियर की पहली बड़ी सफलता साल 1980 में आई फिल्म 'गांधी' रही। जब कास्टिंग डायरेक्टर डॉली ठाकुर नए चेहरों की तलाश में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा पहुंचीं, तो कई ऑडिशन के बाद आलोक नाथ का चयन हुआ। उस फिल्म के लिए उन्हें 20 हजार रुपये का मेहनताना मिला था। हालांकि, फिल्म की शुरुआत मिलने के बाद भी मुंबई में उनका रास्ता आसान नहीं था। 'गांधी' के बाद दूसरी फिल्म हासिल करने के लिए उन्हें करीब पांच साल के लंबे संघर्ष से गुजरना पड़ा। इस कठिन समय में उन्होंने थिएटर को ही अपना सहारा बनाया। इसी दौरान उन्हें 'मशाल' फिल्म में एक संक्षिप्त भूमिका करने का मौका मिला, जिसने उनके लिए आगे की राह खोली।
पिता की भूमिकाओं में मिली अमर पहचान
साल 1988 में 'कयामत से कयामत तक' फिल्म के बाद आलोक नाथ का करियर सही दिशा में तेजी से आगे बढ़ने लगा। इसके बाद उन्होंने फिल्मों और टेलीविजन के अनगिनत प्रोजेक्ट्स में पिता या परिवार के बड़े बुजुर्ग की भूमिकाएं निभाईं। अपने अब तक के करियर में उन्होंने लगभग 140 फिल्मों और 15 से अधिक टीवी धारावाहिकों में काम किया है। हालांकि, उनके सामने कई बार चुनौतियां भी आईं, जैसे एक बार उन्हें जितेंद्र के पिता की भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। आज आलोक नाथ का नाम भारतीय परिवारों की नैतिकता और परंपराओं का पर्याय बन चुका है।











