जुलाई का महीना करदाताओं के लिए बेहद व्यस्त रहता है, क्योंकि आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई निर्धारित की गई है। वित्त वर्ष 2026 के लिए भी यह डेडलाइन अपरिवर्तित है। चूंकि अब महीने का एक सप्ताह बीत चुका है और लगभग 40% करदाताओं ने ही प्रक्रिया पूरी की है, ऐसे में आने वाले दिनों में 4 करोड़ से अधिक लोग वेबसाइट पर अपना विवरण दर्ज करेंगे। इस जल्दबाजी में अक्सर लोग छोटी-छोटी लेकिन गंभीर गलतियां कर बैठते हैं। आपको यह समझना होगा कि रिटर्न दाखिल करना केवल प्रक्रिया का एक हिस्सा है, और यदि आपने एक महत्वपूर्ण कदम छोड़ दिया, तो आपका रिफंड फंस सकता है और आपको दंड का सामना करना पड़ सकता है।
रिटर्न की वैधता के लिए सत्यापन की भूमिका
आयकर रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक आप उसे संबंधित नियमों के अनुसार सत्यापित नहीं करते हैं। विशेष रूप से उन युवाओं के लिए, जो पहली बार वेतनभोगी के रूप में अपना रिटर्न भर रहे हैं, यह प्रक्रिया नई हो सकती है। जानकारी की कमी के कारण कई लोग अपना आईटीआर सबमिट करने के बाद उसे वैलिडेट करना भूल जाते हैं। आयकर अधिनियम 1961 के प्रावधानों के अनुसार, बिना सत्यापन के दाखिल किया गया रिटर्न अमान्य माना जाता है। यह चूक न केवल आपको रिफंड पाने के अधिकार से वंचित कर सकती है, बल्कि विभाग द्वारा आप पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
सत्यापन क्यों है अनिवार्य
आयकर कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के भीतर उसे सत्यापित करना अनिवार्य है। जब तक आप यह सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं करते, विभाग उस फॉर्म को अपूर्ण या इनवैलिड की श्रेणी में रखता है। यदि आप समय सीमा के भीतर इसे वैलिडेट नहीं करते हैं, तो आपका रिफंड प्रोसेस नहीं किया जाएगा। सत्यापन वास्तव में एक तरह का हलफनामा है जो यह पुष्टि करता है कि आपके द्वारा दी गई सभी वित्तीय जानकारी पूरी तरह से सटीक और प्रामाणिक है।
रिफंड और सत्यापन का संबंध
कई करदाताओं को यह गलतफहमी होती है कि जैसे ही आईटीआर का डेटा ऑनलाइन भर दिया गया, विभाग द्वारा रिफंड जारी कर दिया जाएगा। वास्तविकता यह है कि इनकम टैक्स विभाग रिफंड प्रक्रिया को शुरू ही तब करता है जब करदाता द्वारा ई-वेरिफिकेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया जाता है। यदि आपका रिफंड बनता भी है, तब भी विभाग उसे तब तक नहीं भेजेगा जब तक आप आईटीआर को वैलिडेट नहीं कर लेते। यह छोटी सी लापरवाही आपके हजारों रुपए के रिफंड को अनिश्चित काल के लिए रोक सकती है।
जुर्माने और दंड के प्रावधान
यदि आप निर्धारित 30 दिनों की विंडो मिस कर देते हैं, तो धारा 234एफ के तहत दंड की कार्रवाई शुरू हो सकती है। यदि आपकी कुल वार्षिक आय 5 लाख रुपए से अधिक है, तो 30 दिन की डेडलाइन के बाद आपको 5000 रुपए का जुर्माना भरना होगा। यदि आपकी आय 5 लाख रुपए से कम है, तो यह दंड 1000 रुपए का होगा। इतना ही नहीं, यदि आपके ऊपर कोई टैक्स लायबिलिटी यानी बकाया कर बनता है, तो जुर्माने के साथ-साथ आपको उस बकाया राशि पर ब्याज का भुगतान भी करना होगा, जो आपकी कुल वित्तीय देनदारी को काफी बढ़ा सकता है।
चूक होने पर अगला कदम क्या हो
यदि अनजाने में आप 30 दिनों की समय सीमा पार कर चुके हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत आयकर प्राधिकरण से संपर्क करें। आप अपनी शिकायत को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए दर्ज करा सकते हैं या संबंधित विभाग को ईमेल के माध्यम से सूचित कर सकते हैं। आपको देरी का स्पष्ट और उचित कारण बताना होगा। यदि कर अधिकारी आपकी दलील और चूक की प्रकृति से संतुष्ट होते हैं, तो वे वैलिडेट न कर पाने की आपकी समस्या पर विचार कर सकते हैं और आपके आवेदन को स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।











