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रांची की दो बहनों की कामयाबी की दास्तां: फैशन डिजाइनिंग से बनाई अपनी पहचान और फाउंडेशन से बदल रही हैं हजारों की जिंदगीव्यापार
10 जुल॰ 2026, 6:49 am (45 दिन पहले)· 5

रांची की दो बहनों की कामयाबी की दास्तां: फैशन डिजाइनिंग से बनाई अपनी पहचान और फाउंडेशन से बदल रही हैं हजारों की जिंदगी

रांची की रहने वाली दो बहनें, पर्सी और अंचल, अपने अनोखे फैशन कलेक्शन से देश भर में नाम कमा रही हैं। वे अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने हेल्पज फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा और जरूरतमंदों की सेवा में खर्च करती हैं।

झारखंड की राजधानी रांची से निकली दो बहनें, पर्सी और अंचल, आज फैशन की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुकी हैं। उन्होंने अपने काम और अपनी सेवा भावना से न केवल व्यावसायिक सफलता हासिल की है, बल्कि समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन कर रही हैं। रांची में स्थित उनके तीन बुटीक उनकी मेहनत और हुनर का प्रमाण हैं। जहां एक ओर उनका फैशन ब्रांड देश भर में अपनी धाक जमा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनका हेल्पज फाउंडेशन हजारों लोगों के जीवन में उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।

फैशन की दुनिया में अनूठा सफर

पर्सी ने बताया कि फैशन डिजाइनिंग का क्षेत्र उनके परिवार में काफी पुराना है। उन्होंने इस पेशे के लिए कोई औपचारिक डिग्री या कोर्स नहीं किया है, बल्कि अपनी मां को पिछले 25 वर्षों से काम करते हुए देखकर इस कला को बारीकी से सीखा है। उनकी बहन अंचल ने बताया कि वे पहले बेंगलुरु में एक कॉर्पोरेट नौकरी में थीं, जहां उनका वेतन एक लाख रुपये से अधिक था, लेकिन उनका मन इस काम में नहीं रमता था। अपनी बहन के साथ मिलकर अपने खुद के सपने को साकार करने के उद्देश्य से उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने बुटीक व्यवसाय को विस्तार देने का फैसला किया।

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बेहतरीन कलेक्शन और मौलिक डिजाइन

उनके बुटीक में मिलने वाले परिधान अपने आप में खास हैं। यहां ग्राहकों को साड़ियों, काफ्तान, अफगान और सलवार सूट का एक विस्तृत और अनूठा कलेक्शन देखने को मिलता है। विशेष रूप से उनकी 3D प्रिंट वाली साड़ियां काफी लोकप्रिय हैं। ये प्रिंट इतने सजीव होते हैं कि दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे धागों से बारीक कढ़ाई की गई हो, जबकि करीब से देखने पर उनकी प्रिंटिंग तकनीक का पता चलता है। शुद्ध रेशम पर आधारित उनका यह 3D कलेक्शन मार्केट में अन्यत्र देखने को नहीं मिलता है। उनका मानना है कि हर पीस मौलिक है और उसे कॉपी करना संभव नहीं है, क्योंकि वे रोजाना नई चीजों का अवलोकन करती हैं और अपने हर उत्पाद में कुछ नया प्रयोग करने की कोशिश करती हैं।

पैन इंडिया में पहुंच और सोशल मीडिया का महत्व

अपनी विशिष्टता के कारण आज उनके ब्रांड की पहुंच पूरे भारत में है। बेंगलुरु से लेकर कोलकाता और दिल्ली से लेकर कन्याकुमारी तक उनके ग्राहक फैले हुए हैं। अंचल ने बताया कि इस सफलता में सोशल मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से वे अपने उत्पादों के छोटे वीडियो साझा करती हैं और अपने संपर्क सूत्र भी साथ में डालती हैं। इसी डिजिटल उपस्थिति के दम पर उन्हें रोजाना 5 से भी अधिक ऑर्डर मिल जाते हैं। वे मानती हैं कि यदि उत्पाद भरोसेमंद और अद्वितीय हों, तो ग्राहक खुद ब खुद जुड़ते चले जाते हैं।

समाज सेवा का संकल्प

इन बहनों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनका हेल्पज फाउंडेशन है। वे अपनी कुल कमाई का 35 प्रतिशत हिस्सा इस संस्था को समर्पित करती हैं। पिछले 4 वर्षों से यह फाउंडेशन गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के साथ-साथ अनाथ बच्चों और बेसहारा बुजुर्गों को आश्रय प्रदान करने का नेक कार्य कर रहा है। आज हजारों लोगों का जीवन इस फाउंडेशन के माध्यम से संवर रहा है। दोनों बहनों के अनुसार, व्यवसाय से होने वाली आय और समाज के प्रति सेवा का यह तालमेल उन्हें अत्यधिक संतुष्टि देता है और वे इसे अपना मुख्य दायित्व मानती हैं।

सवाल-जवाब

रांची की इन दो बहनों के नाम क्या हैं?
इन दो बहनों के नाम पर्सी और अंचल हैं।
पर्सी और अंचल क्या काम करती हैं?
ये दोनों बहनें फैशन डिजाइनर हैं और रांची में अपने बुटीक चलाती हैं।
उनके बुटीक में किस तरह के कपड़े मिलते हैं?
उनके पास साड़ियों, काफ्तान, अफगान और सलवार सूट का एक अनोखा कलेक्शन मिलता है, जिसमें विशेष रूप से 3D प्रिंट वाली साड़ियां शामिल हैं।
वे अपनी कमाई का कितना हिस्सा फाउंडेशन में खर्च करती हैं?
वे अपनी कुल कमाई का 35 प्रतिशत हिस्सा अपने हेल्पज फाउंडेशन के माध्यम से समाज सेवा में लगाती हैं।
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