टाइफून मेसाक के चलते आई भीषण बाढ़ ने दक्षिणी चीन के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। लेकिन इस बार बाढ़ के पानी ने सिर्फ घरों और बुनियादी ढांचे को ही नुकसान नहीं पहुंचाया है, बल्कि एक अनोखा और बेहद डरावना संकट भी पैदा कर दिया है। चीन के हेंगझोउ शहर में बाढ़ का पानी अपने साथ सैकड़ों जहरीले सांपों को बहाकर बस्तियों में ले आया है। शहर में अचानक चारों तरफ तैरते हुए खतरनाक सांप दिखाई देने लगे हैं, जिससे स्थानीय आबादी में दहशत का माहौल है। विभिन्न ब्रीडिंग सेंटरों से लगभग 900 सांप, जिनमें से कई बेहद जहरीले कोबरा भी शामिल हैं, बाढ़ के पानी के साथ बहकर खेतों, रिहाइशी इलाकों और सड़कों पर पहुंच गए हैं। इस भयावह स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने बेहद सतर्कता बरतने की सलाह दी है और लोगों से अपील की है कि वे रात के समय किसी भी हाल में अपने घरों से बाहर न निकलें।
जैस्मीन कैपिटल और सांपों का कारोबार
हेंगझोउ शहर को ऐतिहासिक रूप से चमेली के फूलों के व्यापार के लिए जाना जाता है, जिसके कारण इसे चीन की 'जैस्मीन कैपिटल' भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में पिछले लगभग 500 वर्षों से चमेली की खेती की जा रही है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से प्रसिद्ध जैस्मीन टी बनाने के लिए किया जाता है। हालांकि, हाल के कुछ दशकों में इस इलाके ने एक अलग और बेहद मुनाफे वाले कारोबार की तरफ कदम बढ़ाया, जिससे यह देश का सबसे बड़ा स्नेक फार्मिंग हब बन गया। वियतनाम की सीमा से सटे गुआंग्शी प्रांत में सांपों की 100 से अधिक प्रजातियां प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं। साल 2020 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में 14 हजार से अधिक स्नेक फार्म काम कर रहे थे, जिनमें सांपों की कुल आबादी लगभग 2 करोड़ थी। पहले इन सांपों का उपयोग मुख्य रूप से खाने के लिए किया जाता था, लेकिन अब इनका पालन बड़ी दवा कंपनियों और बायोमेडical रिसर्च के लिए किया जाता है।
दीवारें टूटने से फैला जहरीला खतरा
मूसलाधार बारिश और बेकाबू बाढ़ के पानी ने इस बार कई स्नेक फार्मों की सुरक्षा दीवारों को ढहा दिया। इसके परिणामस्वरूप, खेतों और बस्तियों में अचानक भारी संख्या में सांप फैल गए। आजाद होने वाले इन जीवों में बेहद घातक चाइनीज कोबरा, क्रेट और ग्रीन पिट वाइपर जैसी प्रजातियां शामिल हैं। इस तबाही के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें इन खतरनाक सांपों को बाढ़ के गंदे पानी में तैरते हुए देखा जा सकता है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक कुल 39 लोगों की मौत हो चुकी है। इस आंकड़े में एक स्थानीय महिला भी शामिल है, जिसकी जान सांप के काटने की वजह से गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में बहकर आए किसी फार्म के जहरीले कोबरा ने ही महिला को अपना शिकार बनाया होगा।
गुइगांग चिड़ियाघर में मची तबाही
बाढ़ का यह भीषण प्रकोप केवल सांपों के फार्मों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने गुइगांग चिड़ियाघर को भी बुरी तरह प्रभावित किया। पानी का स्तर बढ़ने के कारण चिड़ियाघर के कई बाड़े टूट गए, जिससे दो जेब्रा, एक हंपबैक ऑक्स, तीन छोटे घोड़े, दो गधे, शुतुरमुर्ग, एमू और रैकून जैसे कई जानवर बाहर निकलकर भाग गए। इस गंभीर संकट के दौरान चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए सबसे पहला काम खतरनाक हिंसक जानवरों को सुरक्षित रखने का किया। उन्होंने शेरों के बाड़े को पूरी तरह से बंद कर दिया ताकि वे किसी भी हाल में बाहर न निकल सकें। चिड़ियाघर के मालिक यिन फेइफेइ ने बताया कि अत्यधिक जोखिम के बावजूद हिंसक शिकारियों को बाहर जाने से रोकना बेहद जरूरी था, क्योंकि उनके बाहर आने पर इंसानी जिंदगी को बड़ा खतरा हो सकता था। हालांकि, इस सुरक्षा प्रयास के बीच एक दुखद हादसा भी हुआ। पानी का स्तर लगातार बढ़ने के कारण तीन शेर अपने बाड़े के भीतर ही बाढ़ के पानी में डूब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
सांपों को पकड़ने का महाअभियान
अब प्रशासन और बचाव टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन फैले हुए सांपों को दोबारा सुरक्षित पकड़ने की है। स्थानीय स्नेक कैचर टीम के सदस्य झू ने बताया कि उनकी 7 से 8 लोगों की टीम ने बिना सोए लगातार दो दिनों तक दिन और रात काम किया है। इस कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान केवल दो दिनों के भीतर ही लगभग 2,000 से 3,000 सांपों को पकड़ा गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि इनमें से अधिकांश सांप बिना जहर वाले रैट स्नेक थे, लेकिन इनके साथ-साथ कई अत्यंत विषैले सांपों को भी काबू में किया गया है। क्षेत्र में अभी भी सांपों की मौजूदगी के खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से रात में बाहर न निकलने और सतर्क रहने का आग्रह किया है।











