लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड को दुनिया भर में क्रिकेट का मक्का माना जाता है। किसी भी खिलाड़ी के लिए इस ऐतिहासिक मैदान पर उतरना एक सपना होता है, लेकिन वर्षों से यह गौरव केवल पुरुष क्रिकेटरों तक ही सीमित रहा है। अब 142 साल के लंबे इंतजार के बाद, इतिहास बदलने वाला है। 10 जुलाई को भारत और इंग्लैंड की महिला क्रिकेट टीमें पहली बार इस मैदान पर एक टेस्ट मैच खेलने के लिए उतरेंगी, जो महिला क्रिकेट के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।
कोच अमोल मजूमदार की भावनाएं
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर बेहद उत्साहित हैं। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मजूमदार ने स्वीकार किया कि उन्हें यह जानकर हैरानी हुई कि लॉर्ड्स में महिला टेस्ट मैच का आयोजन अब तक नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी टीम इस खास मौके का काफी समय से इंतजार कर रही है और टी20 विश्व कप से पहले भी खिलाड़ी इसके बारे में चर्चा कर रही थीं। अपने करियर में 171 प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले मजूमदार ने खुद को इस पल का साक्षी बनने के लिए बेहद भाग्यशाली माना।
खिलाड़ियों के लिए गर्व का पल
कोच के अनुसार, किसी भी भारतीय क्रिकेटर के लिए टेस्ट मैच पहनना सम्मान की बात है, लेकिन लॉर्ड्स में सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरना उनके करियर का सबसे बड़ा अनुभव होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मैच में हिस्सा लेने वाली हर खिलाड़ी को इस उपलब्धि पर गर्व महसूस होगा। भारतीय टीम ने इस लाल गेंद के मुकाबले की तैयारी के लिए वर्म्सले क्रिकेट ग्राउंड में विशेष अभ्यास किया है। गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय महिला टीम ने अपना पिछला टेस्ट मैच इस साल मार्च में खेला था, जबकि इससे पहले पूरे एक साल तक टीम को टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला था। यह मैच टीम के लिए न केवल एक बड़ी परीक्षा है, बल्कि एक ऐतिहासिक गौरव हासिल करने का बेहतरीन अवसर भी है।











