क्रिकेट के खेल में अक्सर कहा जाता है कि रिकॉर्ड समय के साथ टूट जाते हैं, लेकिन कुछ उपलब्धियां ऐसी भी होती हैं जो काल के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाती हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी सौरव गांगुली के नाम एक ऐसा ही अनोखा रिकॉर्ड है, जिसका टूट पाना लगभग असंभव है। यह रिकॉर्ड उनके टेस्ट करियर की शुरुआत और अंतिम पारी से जुड़ा हुआ है।
деб्यू और अंतिम पारी का विरोधाभास
सौरव गांगुली दुनिया के इकलौते ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने अपने टेस्ट डेब्यू मैच में शानदार शतक जमाया था, लेकिन अपने करियर की आखिरी टेस्ट पारी में वे गोल्डन डक का शिकार हो गए। यह विरोधाभास ही इस रिकॉर्ड को खास बनाता है। कोई भी खिलाड़ी अपने पदार्पण मैच में यादगार प्रदर्शन करना चाहता है, जैसा कि गांगुली ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर शतक लगाकर किया था। वहीं, किसी भी क्रिकेटर का सपना नहीं होता कि वह अपने करियर का अंत शून्य पर आउट होकर करे। एक ही खिलाड़ी का अपने करियर की शुरुआत और विदाई पर इतना अलग प्रदर्शन करना इसे एक दुर्लभ उपलब्धि बनाता है जिसे दोहराना बेहद मुश्किल है।
उपलब्धियों से भरा शानदार सफर
सौरव गांगुली का अंतरराष्ट्रीय करियर ढेरों उपलब्धियों का गवाह रहा है। उन्होंने भारतीय टीम के लिए 113 टेस्ट और 311 वनडे मैचों में हिस्सा लिया। भारतीय क्रिकेट के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में कप्तानी की बागडोर संभालने वाले गांगुली ने टीम को एक नई दिशा दी। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने अपने करियर के दौरान 7212 रन बनाए, जिसमें 16 शतक और 35 अर्धशतक शामिल रहे।
वनडे प्रारूप में भी उनका प्रदर्शन बेमिसाल रहा है, जहां उन्होंने 11363 रन बनाए। वनडे करियर में गांगुली ने 22 शतक और 72 अर्धशतकीय पारियां खेलकर अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया। केवल बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी और वनडे क्रिकेट में 100 विकेट हासिल किए। उनकी यह बहुआयामी प्रतिभा और करियर का यह उतार-चढ़ाव भरा रिकॉर्ड उन्हें क्रिकेट इतिहास का एक खास नाम बनाता है।











