पाकिस्तान, इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेली जा रही त्रिकोणीय सीरीज के आगाज के साथ ही क्रिकेट गलियारों में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने कमेंट्री पैनल से जाने-माने पूर्व क्रिकेटरों नासिर हुसैन और माइकल एथरटन को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। छह सदस्यीय पैनल की हाल ही में हुई घोषणा में इन दोनों दिग्गजों के नाम शामिल नहीं किए गए, जिसके बाद से क्रिकेट जगत में इस फैसले पर लगातार चर्चा हो रही है।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें इसी साल इंग्लैंड दौरे पर गईं पाकिस्तानी टीम के दौरान हुए एक इंटरव्यू से जुड़ी हैं। स्काई स्पोर्ट्स ने उस दौरान माइकल एथरटन के जरिए जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटों कासिम खान और सुलेमान खान का एक विशेष इंटरव्यू प्रसारित किया था। गौर करने वाली बात यह है कि जब साल 2024 में इंग्लैंड की टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था, तब नासिर हुसैन और माइकल एथरटन दोनों ही आधिकारिक कमेंट्री पैनल का हिस्सा थे, लेकिन इस बार समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान प्रसारित हुआ था इंटरव्यू
माइकल एथरटन द्वारा लिया गया यह इंटरव्यू लॉर्ड्स टेस्ट मैच के दौरान लंच ब्रेक में प्रसारित किया गया था। जैसे ही इस प्रसारण की भनक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को लगी, उन्होंने तुरंत अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। बोर्ड ने यहां तक चेतावनी दे दी थी कि यदि यह इंटरव्यू दिखाया गया, तो पाकिस्तानी खिलाड़ी लंच के बाद दोबारा मैदान पर नहीं उतरेंगे। हालांकि तमाम विरोध और दबाव के बावजूद स्काई स्पोर्ट्स ने तय कार्यक्रम के अनुसार इंटरव्यू का प्रसारण जारी रखा, लेकिन पाकिस्तान के सरकारी प्रसारक पीटीवी ने देश के भीतर इसके प्रसारण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।
बेटों ने लगाए थे सरकार और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप
स्काई स्पोर्ट्स पर प्रसारित उस इंटरव्यू के दौरान कासिम और सुलेमान ने पाकिस्तान सरकार और वहां की व्यवस्था पर बेहद संगीन आरोप जड़े थे। उन्होंने दावा किया था कि जेल में बंद उनके पिता इमरान खान को खत्म करने की साजिश रची जा रही है और अधिकारी उनकी जान लेने की कोशिश में जुटे हैं। इसके अलावा दोनों ने यह भी कहा था कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री और साल 1992 के विश्व कप विजेता कप्तान को दिन में 23 घंटे से भी अधिक समय तक एक बेहद छोटी सी कोठरी में अकेले रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी शिकायत की थी कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने जानबूझकर तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया था, जिससे वे अपने पिता से मिल नहीं पा रहे हैं।



















