क्रिकेट की दुनिया में कई ऐसे किस्से दबे हैं जो प्रशंसकों को हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से जुड़ा हुआ है। अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआत करने से पहले ही वह पड़ोसी देश की टीम के लिए मैदान पर उतर चुके थे। यह बात तब की है जब वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम भी नहीं रख पाए थे और घरेलू स्तर पर अपनी पहचान बना रहे थे।
यह अनूठा वाकया साल 1987 का है। मुंबई का ऐतिहासिक ब्रेबोर्न स्टेडियम क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया की स्वर्ण जयंती के जश्न का गवाह बन रहा था। उस अवसर पर भारत और पाकिस्तान के बीच एक विशेष पच्चीस-पच्चीस ओवर का प्रदर्शनी मुकाबला खेला जा रहा था। पाकिस्तानी टीम उन दिनों भारत के दौरे पर थी और दिग्गज ऑलराउंडर इमरान खान टीम की कमान संभाल रहे थे। उस समय सचिन तेंदुलकर महज तेरह-चौदह साल के एक युवा उभरते हुए खिलाड़ी थे जिन्हें इस मुकाबले के लिए रिजर्व यानी अतिरिक्त खिलाड़ी के रूप में रखा गया था।
दोस्ताना मुकाबले के दौरान जब लंच का समय समाप्त हुआ तो पाकिस्तानी खेमे के दो अनुभवी खिलाड़ी जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर विश्राम करने के लिए पवेलियन लौट गए। इसके चलते मैदान पर खिलाड़ियों की कमी महसूस होने लगी। ऐसी स्थिति को देखकर पाकिस्तानी कप्तान इमरान खान ने आयोजन समिति से कुछ क्षेत्ररक्षकों को भेजने का आग्रह किया। जैसे ही मौका मिला, कम उम्र के सचिन ने बिना कोई देर किए पाकिस्तानी टीम की अभ्यास जर्सी अपने जिस्म पर चढ़ाई और सीधे मैदान के भीतर दौड़ लगा दी।
मैदान पर उतरते ही उन्हें बाउंड्री के पास तैनात किया गया। इमरान खान ने उन्हें लॉन्ग-ऑन और मिड-ऑन के हिस्से की जिम्मेदारी सौंपी थी। मास्टर ब्लास्टर ने पूरी ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई। खेल के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जब भारतीय दिग्गज कपिल देव ने हवा में एक शॉट खेला। सचिन ने गेंद को लपकने के लिए तेजी से दौड़ लगाई, लेकिन गेंद उनकी पहुंच से कुछ इंच दूर जमीन पर गिर गई। उन्होंने अपनी आत्मकथा में इसका जिक्र करते हुए बताया था कि यदि उनकी फील्डिंग पोजीशन थोड़ी आगे होती, तो वह वह शानदार कैच आसानी से पूरा कर लेते। हालांकि, कप्तान इमरान खान ने उन्हें अपनी तय सीमा में ही मुस्तैद रहने का निर्देश दिया था। कुछ ही देर बाद जब मुख्य खिलाड़ी वापस लौटे, तो इस अनूठे सफर का अंत हो गया।
इस दिलचस्प घटना के ठीक दो साल बाद यानी पंद्रह नवंबर 1989 को सचिन तेंदुलकर ने कराची के मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ ही अपने टेस्ट करियर का आधिकारिक आगाज किया। संयोग देखिए कि जिस देश के गेंदबाजों के सामने उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहली बड़ी चुनौती का सामना किया, उसी देश के लिए उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में अभ्यास मैच के दौरान फील्डिंग की थी। यह यादगार प्रसंग आज भी खेल प्रेमियों के बीच बड़े चाव से याद किया जाता है और यह साबित करता है कि खेल हमेशा सरहदों की दीवारों से कहीं ऊपर होता है।



















