भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाने वाले अंदाज में एक बार फिर युवा खिलाड़ियों के आक्रामक रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 26 अगस्त 2026 को की गई अपनी एक पोस्ट में उन्होंने यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी के मैदान पर व्यवहार की कड़ी निंदा की। संजय मांजरेकर ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) दोनों को टैग करते हुए यह स्पष्ट किया कि मैदान पर अनुशासनहीनता को अनदेखा करना खेल और खिलाड़ियों दोनों के हित में नहीं है।
सोशल मीडिया पोस्ट और बोर्ड की जवाबदेही का मुद्दा
संजय मांजरेकर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हाल ही में इंडिया ए के लिए खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी और अब यशस्वी जायसवाल का आक्रामक रवैया चिंताजनक है। अगर खिलाड़ियों को इस तरह के व्यवहार से छूट दी जाती रहेगी, तो वे इसे बार-बार दोहराने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बर्ताव न केवल क्रिकेट के खेल के लिए नुकसानदेह है, बल्कि बेहद महत्वपूर्ण रूप से इन दोनों खिलाड़ियों के अपने भविष्य के लिए भी अच्छा नहीं है।
अपनी बात को क्रिकेट गवर्निंग बॉडीज तक पहुंचाने के लिए उन्होंने अपनी पोस्ट में आईसीसी और बीसीसीआई दोनों को सीधे तौर पर टैग किया। इस कदम से साफ झलकता है कि मांजरेकर की यह चिंता केवल मैच रेफरी द्वारा लगाए जाने वाले मैच फीस जुर्माने या डिमेरिट पॉइंट तक ही सीमित नहीं है। उनका मानना है कि टीम प्रबंधन और क्रिकेट बोर्ड को भी इन युवा खिलाड़ियों को सही दिशा देने और उनकी जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।
कोलंबो टेस्ट में यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो का विवाद
संजय मांजरेकर का यह बयान श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में खेले जा रहे टेस्ट मैच के दौरान हुई एक घटना के बाद आया है। भारत और श्रीलंका के बीच जारी इस मुकाबले के पहले दिन यशस्वी जायसवाल और श्रीलंकाई तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच तीखी झड़प देखने को मिली थी। यशस्वी जायसवाल जब आउट होकर पवेलियन की तरफ लौट रहे थे, तभी वे अचानक पीछे मुड़े और फर्नांडो के करीब जाकर उनसे भिड़ गए। दोनों खिलाड़ियों के बीच माहौल काफी गरमा गया था और सिर से सिर टकराने जैसी स्थिति बन गई थी।
मैच के बाद आईसीसी ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया। दोनों खिलाड़ियों को आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.12 का दोषी ठहराया गया, जो किसी खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क या बहस से संबंधित है। इसके तहत आईसीसी ने यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो दोनों पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया और साथ ही उनके खाते में 1-1 डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ दिया।
वैभव सूर्यवंशी का श्रीलंका दौरा और मांजरेकर का पिछला रुख
यशस्वी जायसवाल से पहले वैभव सूर्यवंशी भी श्रीलंका के दौरे पर ही विवादों में घिरे थे। इंडिया ए की टीम से खेलते हुए श्रीलंका ए के खिलाड़ी के साथ उनकी तीखी बहस हो गई थी। उस वक्त मैदान पर दोनों टीमों के बीच तनाव बेहद बढ़ गया था, जिसके बाद श्रीलंका ए के विकेटकीपर निरोशन डिकवेला को बीच-बचाव के लिए आगे आना पड़ा था। निरोशन डिकवेला ने दोनों खिलाड़ियों को अलग करके मामले को शांत कराया था।
उस समय भी संजय मांजरेकर ने वैभव के इस व्यवहार पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि अगर वह इंडिया ए टीम के कोच या मैनेजर की भूमिका में होते, तो अनुशासन सिखाने के लिए वैभव सूर्यवंशी को अफगानिस्तान ए के खिलाफ खेले जाने वाले अगले मुकाबले में अंतिम एकादश से बाहर बिठा देते।
फैंस की प्रतिक्रिया और अनुशासन पर क्रिकेट बिरादरी में बहस
मांजरेकर के इस सोशल मीडिया पोस्ट के आते ही क्रिकेट प्रेमियों के बीच बहस छिड़ गई। एक्स पर यूजर्स ने इस बयान पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। प्रशंसकों का एक बड़ा वर्ग यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी के समर्थन में उतर आया। कुछ क्रिकेट समर्थकों का तर्क था कि 80 और 90 के दशक का समय अब बीत चुका है, जब भारतीय खिलाड़ी मैदान पर रक्षात्मक या डरे-सहमे नजर आते थे। आज के दौर में टीम इंडिया आक्रामक शैली का क्रिकेट खेलती है और विरोधी टीम को उसी की भाषा में जवाब देती है।
वहीं कुछ अन्य फैंस ने कहा कि पूर्व क्रिकेटर को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने या खिलाड़ियों को कटघरे में खड़ा करने से पहले पूरे घटनाक्रम और विवाद के पीछे की वजहों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी दोनों ही बेहद कम उम्र के हैं और उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य का सितारा माना जा रहा है। खेल के मैदान पर आक्रामकता अपनी जगह है, लेकिन शारीरिक झड़प और दुर्व्यवहार की कोई जगह नहीं होती। ऐसे में भारतीय क्रिकेट को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रदर्शन के साथ-साथ मैदान के अनुशासन का पाठ भी गंभीरता से पढ़ाया जाए।



















