अमेरिका से आए राहत भरे महंगाई के आंकड़ों ने हफ्ते की शुरुआत में ही एथेरियम में जोरदार खरीदारी लौटा दी। मंगलवार को ETH 7% से ज्यादा चढ़कर फिर 1,850 डॉलर के पार पहुंच गया, क्योंकि जून के महंगाई आंकड़े बाजार की उम्मीद से नरम निकले और जोखिम वाली संपत्तियों में निवेशकों की भूख दोबारा लौट आई। इस उछाल की नींव असल में सोमवार को ही पड़ चुकी थी, जब अमेरिका के जून महीने के ताजा महंगाई आंकड़े अनुमान से हल्के आए।
महंगाई के आंकड़ों में क्या दिखा
मुख्य महंगाई दर घटकर 3.5% रह गई, जो अनुमानित 3.8% से काफी कम है। महीने दर महीने आधार पर कीमतें 0.4% गिरीं, जो मई 2020 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। खाने-पीने और ऊर्जा की उतार-चढ़ाव वाली कीमतों को अलग रखने वाली कोर CPI भी 2.8% के अनुमान से नीचे फिसलकर 2.6% पर आ गई। जो बाजार लंबे समय से चिपकी हुई महंगाई और सख्त नीति की आशंका से परेशान था, उसके लिए ये आंकड़े साफ राहत लेकर आए और ट्रेडर्स ने तुरंत अपनी पोजीशन बदलनी शुरू कर दी।
शॉर्ट सेलर्स बुरी तरह फंसे
तेजी की रफ्तार ने मंदी का दांव लगाने वालों को चौंका दिया। फ्यूचर्स बाजार में ETH के गिरने पर दांव लगाने वाले ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन काटनी पड़ी और पिछले 24 घंटों में करीब 113 मिलियन डॉलर की शॉर्ट पोजीशन लिक्विडेट हो गईं। इस मजबूरी की खरीदारी ने तेजी में और आग लगा दी। ये बढ़त पिछले एक हफ्ते में धीरे-धीरे बन रही हल्की रिकवरी के ऊपर आई है, जो जोखिम वाली संपत्तियों को लेकर बेहतर होते माहौल के बीच दिख रही थी।
व्हेल और रिटेल पीछा नहीं कर रहे
कीमत में इतनी हलचल के बावजूद, सिक्के अपने पास रखने वालों में खास हरकत नहीं दिखी। रिटेल और व्हेल दोनों तरह के वॉलेट के बैलेंस में बहुत मामूली बदलाव आया है। बल्कि 100 से 1,000 ETH और 1,000 से 10,000 ETH रखने वाले वॉलेट ने पिछले एक हफ्ते में मिलकर करीब 30,000 ETH अपने भंडार से घटा लिए। इसका मतलब है कि बड़े और छोटे, दोनों निवेशक इस उछाल के पीछे भाग नहीं रहे।
अमेरिकी खरीदारों की मांग भी छोटी सी तेजी के बाद फिर ठंडी पड़ रही है। कॉइनबेस प्रीमियम इंडेक्स, जो बाकी बाजार के मुकाबले अमेरिकी ट्रेडर्स की उत्सुकता मापता है, सोमवार को गिरकर -0.121 पर आ गया। यह नकारात्मक आंकड़ा वहां की घटती रफ्तार की ओर इशारा करता है।
तेजी का बोझ उठा रहा है लीवरेज
डेरिवेटिव बाजार अलग कहानी कह रहा है। ओपन इंटरेस्ट, यानी बाजार में बकाया कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल कीमत, मंगलवार को करीब 680,000 ETH बढ़कर 14.41 मिलियन ETH पर पहुंच गया, जो एक महीने से ज्यादा का सबसे ऊंचा स्तर है। यह उछाल बताता है कि तेजी वाले लीवरेज ट्रेडर्स दोबारा भारी दांव लगा रहे हैं और इस बढ़त को स्पॉट खरीदारों से ज्यादा उन्हीं का पैसा आगे धकेल रहा है। फंडिंग रेट्स सकारात्मक झुकाव लिए हुए हैं, जो एथेरियम की इस महीने की शुरुआत में शुरू हुई रिकवरी के बाद से बना हुआ पैटर्न है।
चार्ट पर क्या हाल है
डेली चार्ट पर नजदीकी तस्वीर सकारात्मक झुकाव लिए दिख रही है। लाइव बाजार आंकड़ों के मुताबिक ETH इस समय करीब 1,880 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 1,774 डॉलर से लगभग 6% ऊपर है, और यह 20-दिन तथा 50-दिन के EMA के ऊपर 1,755 डॉलर और 1,802 डॉलर के आसपास टिका है। 1,948 डॉलर पर मौजूद 100-दिन का EMA फिलहाल छत की तरह काम कर रहा है। RSI 64 पर है और स्टोकास्टिक 96 के करीब खिंचा हुआ है, दोनों मजबूत तेजी की ओर इशारा करते हैं, हालांकि इतने ऊंचे (ओवरबॉट) संकेत चेतावनी देते हैं कि रेजिस्टेंस के पास पहुंचते ही रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। ऊपरी बॉलिंगर बैंड ठीक 1,909 डॉलर पर बैठा है, जो पहले रेजिस्टेंस स्तर से मेल खाता है।
किन स्तरों पर नजर रखें
ऊपर की ओर पहली रुकावट 1,909 डॉलर के हॉरिजॉन्टल बैरियर पर है, इसके बाद 2,018 डॉलर और 2,107 डॉलर आते हैं, जबकि इससे मजबूत रेजिस्टेंस का जमावड़ा 2,211 डॉलर और 2,388 डॉलर के आसपास बनता है। नीचे की ओर तुरंत सहारा 1,806 डॉलर और 1,802 डॉलर पर मौजूद 50-दिन के EMA से मिलता है, जिसे 1,755 डॉलर पर 20-दिन का EMA और 1,741 डॉलर का वह स्तर सहारा देता है जो एक बार फिर बाउंस दे चुका है। अगर ये स्तर टूटे तो अगला निशाना 1,524 डॉलर और 1,404 डॉलर पर होगा।
बाकी क्रिप्टो बाजार का हाल
एथेरियम अकेले नहीं चल रहा। रिपल (XRP) ने मंगलवार को 1.05 डॉलर के ऊपर हल्की जान दिखाई और करीब 1.07 डॉलर तक बढ़कर दबाव वाले बाजार में लगातार तीन दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ा। इस बीच बिटकॉइन करीब 62,500 डॉलर के आसपास सुस्त कारोबार में झूलता रहा, जबकि एथेरियम और रिपल दोनों क्रमश: 1,700 डॉलर और 1.05 डॉलर के अहम सहारे के ऊपर टिके रहे, जो पूरे सेक्टर में जारी कंसॉलिडेशन का संकेत है। कर्व डीएओ सबसे चमकदार रहा, जो पिछले दिन की 3% बढ़त के ऊपर मंगलवार को 4% चढ़कर 24 घंटों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला ऑल्टकॉइन बना, क्योंकि एक्सचेंज पर उपलब्ध सप्लाई घटी और बड़े होल्डर्स ने अपनी पोजीशन बढ़ाई। हालांकि सब कुछ हरा नहीं था, अमेरिका और ईरान के बीच नई भू-राजनीतिक तनातनी से जोखिम की भूख घटने के चलते बिटकॉइन 2% से ज्यादा फिसलकर 62,600 डॉलर पर दोबारा दबाव में आ गया।











