बिटकॉइन को लेकर माहौल एक बार फिर बिगड़ता दिख रहा है और बुरी खबरें थमने का नाम नहीं ले रहीं। चीन के जाने-माने माइनर जियांग जुओएर ने एक डराने वाला अनुमान सामने रखा है। उनका कहना है कि दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी साल 2026 खत्म होने से पहले गिरकर 42,000 से 44,000 डॉलर के बीच पहुंच सकती है। उनकी इस भविष्यवाणी की सबसे बड़ी वजह स्ट्रैटेजी कंपनी के अंदर दिख रहा एक खतरे का संकेत है, जो इस वक्त सबसे ज्यादा बिटकॉइन रखने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है।
mNAV का चेतावनी भरा संकेत
जुओएर के अनुमान की जड़ में स्ट्रैटेजी का मार्केट-टू-नेट एसेट वैल्यू यानी mNAV है, जो गिरकर 0.72 पर आ गया है। यह आंकड़ा अब 0.7 के उस स्तर के बेहद करीब पहुंच रहा है, जो आखिरी बार 2022 की भयानक गिरावट के दौरान देखा गया था। उस समय बिटकॉइन लुढ़ककर करीब 15,000 डॉलर के स्तर तक आ गया था। डर यही है कि अगर इतिहास खुद को दोहराता है, तो 2026 में एक बार फिर खून-खराबे जैसी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
यहां तक कैसे पहुंचा बिटकॉइन
बिटकॉइन की मुश्किलें अक्टूबर 2025 में शुरू हुईं, जब उसने 126,080 डॉलर का नया शिखर छुआ ही था। इसके बाद बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को बाजार से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। फरवरी 2026 में जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ा, तो बाजार को एक और झटका लगा।
इस महीने की शुरुआत में फिर गिरावट तब आई, जब मई 2026 में अमेरिका की महंगाई दर बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सवाल बने हुए हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से चढ़ सकती हैं। तेल महंगा होने से अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। फेडरल रिजर्व ने अपनी पिछली बैठक में ब्याज दरों को जस का तस रखा, लेकिन कई जानकार मानते हैं कि इस साल के आखिर तक दो बार दरें बढ़ाई जा सकती हैं। अगर ब्याज दरें बढ़ीं, तो बिटकॉइन में एक और गिरावट आ सकती है।
हर कोई मंदी का अनुमान नहीं लगा रहा
दूसरी तरफ कुछ लोग उम्मीद से भरे हैं। एंथनी स्कारामुची का मानना है कि बिटकॉइन पहले ही अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इसमें रफ्तार आएगी और अगले ही महीने यह 70,000 डॉलर तक चढ़ सकता है।
एक उम्मीद की किरण
राहत नियमों के मोर्चे से भी आ सकती है। माना जा रहा है कि क्लैरिटी एक्ट इसी साल कभी कानून बन सकता है, जिससे क्रिप्टो की दुनिया को नियमों को लेकर और स्पष्टता मिलेगी। ऐसा होने पर निवेशकों का भरोसा दोबारा बढ़ सकता है और इन हालात में बिटकॉइन को थोड़ी राहत मिल सकती है।













