भारतीय टेलीविजन के इतिहास में जब भी स्टाइलिश और यादगार खलनायिकाओं का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम उर्वशी ढोलकिया का आता है। पर्दे पर 'कोमोलिका' के रूप में उन्होंने जो छाप छोड़ी, वह आज भी दर्शकों के दिलों में ताजा है। हालांकि, उनकी निजी जिंदगी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम चुनौतीपूर्ण नहीं रही है। उनका जन्म 9 जुलाई 1979 को दिल्ली में हुआ था। अभिनय के प्रति उनका झुकाव बचपन से ही था, यही कारण है कि मात्र 6 साल की उम्र में उन्होंने लक्स साबुन के विज्ञापन के जरिए कैमरे का सामना किया।
कम उम्र में मिली बड़ी चुनौतियां
उर्वशी का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में शादी के बंधन में कदम रखा। उनकी निजी जिंदगी की कठिन परीक्षा तब शुरू हुई जब 17 साल की उम्र तक वह जुड़वां बेटों की मां बन चुकी थीं। नियति को कुछ और ही मंजूर था और उनकी यह शादी लंबे समय तक नहीं चल सकी। महज डेढ़ साल के भीतर ही उनका तलाक हो गया। एक बहुत ही छोटी उम्र में उन्होंने न केवल वैवाहिक विफलता का सामना किया, बल्कि अकेले ही सिंगल मदर के तौर पर अपने दोनों बेटों की जिम्मेदारी भी उठाई।
कोमोलिका बनकर बदला टीवी का नजरिया
90 के दशक में उर्वशी ने 'देख भाई देख', 'शक्तिमान' और 'कभी सौतन कभी सहेली' जैसे प्रसिद्ध सीरियल्स के जरिए अपनी अभिनय यात्रा जारी रखी। लेकिन उनके करियर का असली मोड़ एकता कपूर के शो 'कसौटी जिंदगी की' से आया। इसमें उन्होंने 'कोमोलिका बसु' का नकारात्मक किरदार निभाया, जिसने उन्हें रातों-रात घर-घर में प्रसिद्ध कर दिया। उनके अनोखे स्टाइल और उनके किरदार के लिए इस्तेमाल किए गए खास बैकग्राउंड म्यूजिक ने खलनायिका की परिभाषा को पूरी तरह बदल कर रख दिया। इस यादगार भूमिका के लिए उन्हें न केवल दर्शकों का प्यार मिला, बल्कि ढेरों पुरस्कार भी हासिल हुए।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे टीवी के सबसे बड़े रियलिटी शो 'बिग बॉस 6' की विजेता बनीं। इसके अलावा उन्होंने 'नच बलिए 9' और 'झलक दिखला जा 11' जैसे शो में भी हिस्सा लिया। टीवी के साथ-साथ उन्होंने 'बाबुल' और 'इज्जत' जैसी फिल्मों में भी अभिनय किया। आज 47 साल की उम्र में भी उर्वशी सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनके बोल्ड और बेबाक अंदाज को उनके प्रशंसक खूब पसंद करते हैं। एक कम उम्र की सिंगल मदर से लेकर टीवी की आइकॉनिक विलेन बनने तक का उनका यह सफर उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो जीवन में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी पहचान बनाने का साहस रखती हैं।











