त्योहारी सीजन में डांडिया और गरबा की तैयारियों के बीच फैशन के तौर-तरीकों में नया बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक चनिया-चोली और एथनिक परिधानों के साथ अब लोग अपने नाखूनों के स्टाइल पर भी पूरा ध्यान दे रहे हैं। इसी वजह से उत्सव के माहौल को ध्यान में रखकर तैयार किए गए कस्टमाइज़्ड और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले प्रेस-ऑन नेल्स की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।
ऑक्सिडाइज़्ड सिल्वर और पारंपरिक लटकन से बढ़ा आकर्षण
इस बार के त्योहारी नेल आर्ट में सबसे ज्यादा ध्यान पारंपरिक आभूषणों से प्रेरित डिजाइनों पर दिया गया है। इन नेल सेट्स में ऑक्सिडाइज़्ड सिल्वर चार्म्स का बेहद खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है। हर सेट को सजाने के लिए धातु से बने फूल, तितली वाले चार्म्स, डायमंड पेंडेंट और छोटे लटकते घुंघरू या मोतियों को जोड़ा गया है। जब लोग गरबा के दौरान हाथों का मूवमेंट करते हैं, तब ये लटकन और घुंघरू हाथों की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।
हाथों से उकेरे गए मंडला और बोहो पैटर्न
इन नेल्स पर की गई बारीक कारीगरी भी लोगों को खूब लुभा रही है। आर्टिस्ट इन पर हाथों से बोहो-स्टाइल लाइन वर्क, बारीक मंडला आर्ट, डॉट पैटर्न और पारंपरिक ज्यामितीय बॉर्डर तैयार कर रहे हैं। इसके साथ ही सफेद एक्सेंट और उभरी हुई टेक्सचर्ड आर्ट का उपयोग किया गया है, जिससे हर नेल सेट पूरी तरह से हस्तनिर्मित और अनोखा नजर आता है।
रंगों का कंट्रास्ट और खास संयोजन
गरबा के रंग-बिरंगे कपड़ों के साथ मेल बैठाने के लिए रंगों के कंट्रास्ट पर खास जोर दिया गया है। नेवी ब्लू और सफेद रंग के बेस पर घुंघरू और रिंग चार्म्स का मेल काफी पसंद किया जा रहा है। यह कॉम्बिनेशन पारंपरिक चनिया-चोली के साथ हाथों को अलग और आकर्षक दिखाने में मदद करता है।
सैलून के लंबे इंतजार से राहत और रीयूज़ेबल खूबी
नेल आर्टिस्ट क्रिया शाह के मुताबिक, त्योहारी भागदौड़ में सैलून जाकर घंटों बैठने की जगह लोग इन रेडीमेड विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह विकल्प बिना किसी झंझट के तुरंत लग जाता है और इसे दोबारा भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसके अलावा, पारंपरिक ऑक्सिडाइज़्ड गहनों के साथ इसका सटीक तालमेल पूरे फेस्टिव लुक को निखार देता है।



















