आयुर्वेद की परंपरा में मोरिंगा को केवल एक सामान्य आहार नहीं, बल्कि कई औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। घर की बालकनी में गमले में या बगीचे में इसका पौधा बहुत सरलता से पनप जाता है, और स्थानीय बाजारों में भी इसकी ताजी हरी पत्तियां आसानी से मिल जाती हैं। आमतौर पर लोग किसी एक डिश के लिए हरी पत्तियों का उपयोग करते हैं और बचा हुआ हिस्सा हटा देते हैं, लेकिन थोड़ी सी समझदारी से आप एक ही तैयारी में दो अलग-अलग स्वास्थ्यवर्धक चीजें तैयार कर सकते हैं। इस दोहरे नुस्खे में पहले ताजी पत्तियों से ताजगी देने वाली हर्बल चाय बनाई जाती है, और फिर छानने के बाद बची पत्तियों से पौष्टिक पराठा या रोटी सेंकी जाती है।
पत्तियों की प्रारंभिक सफाई और तैयारी
इस व्यंजन प्रक्रिया को शुरू करने के लिए सबसे पहले ताजी और हरी मोरिंगा की पत्तियां लेकर आएं। इन पत्तियों को साफ बहते पानी में अच्छी तरह धो लें ताकि उन पर जमी धूल और मिट्टी पूरी तरह निकल जाए। धोने के बाद पत्तियों को छलनी या साफ कपड़े पर रखकर अतिरिक्त पानी निथरने दें। इसके बाद एक धारदार चाकू से पत्तियों को बारीक काट लें। बारीक कटी पत्तियों को अदरक कूटने वाले खरल या छोटी ओखली में डालकर हल्का सा कूट लें। पत्तियों को इस तरह कूटने से उनका प्राकृतिक रस और पोषक तत्व पकने के दौरान आसानी से पानी में घुल जाते हैं।
स्वास्थ्यवर्धक मोरिंगा चाय तैयार करने का तरीका
चाय तैयार करने के लिए एक बर्तन में 1 गिलास पीने का पानी चढ़ाएं। जब पानी थोड़ा गर्म होने लगे, तब उसमें लगभग 1 मुट्ठी बारीक कटी और कुटी हुई मोरिंगा की पत्तियां डाल दें। आंच को मध्यम रखें और पानी को तब तक उबलने दें जब तक कि वह घटकर ठीक 1 कप न रह जाए। ऐसा करने से पत्तियों के सारे लाभदायक तत्व काढ़े जैसे इस पेय में समा जाते हैं। जब पानी 1 कप जितना बचे, तब आंच बंद कर दें और एक छन्नी की मदद से इस गरमा-गरम चाय को कप में छान लें। इसे सीधे सादे रूप में पिया जा सकता है, अथवा स्वाद और ताजगी बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा सा नींबू का रस, चुटकी भर चाट मसाला और शहद भी मिलाया जा सकता है। चाय छानने के बाद छलनी में बचे हुए उबले पत्तों को अलग सुरक्षित रख लें।
उबली पत्तियों से बनाएं पौष्टिक पराठे
छलनी में बची हुई उबली पत्तियों को फेंकने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। इन पत्तियों को आवश्यकतानुसार गेहूं के आटे में मिला लें। आटे का स्वाद और पोषक मूल्य और अधिक बढ़ाने के लिए उसमें हल्का नमक, थोड़ी सी अजवाइन और थोड़ा बेसन भी मिलाया जा सकता है। इन सभी सामग्रियों को एक साथ मिलाकर गुनगुने पानी की मदद से एक नरम और लचीला आटा गूंथ लें। अब इस गूंथे हुए आटे की लोइयां बनाकर तवे पर गरमा-गरम पराठे या सादी रोटियां सेकें। उबली हुई पत्तियों में मौजूद फाइबर सुरक्षित रहता है, जो पाचन तंत्र और गट हेल्थ को सुधारने में बेहद मददगार सिद्ध होता है। इस दोहरे उपयोग से पत्तियों की बर्बादी शून्य हो जाती है और शरीर को भरपूर पोषण मिल जाता है।



















