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चेहरे की बनावट बिगाड़ सकते हैं टेढ़े-मेढ़े दांत, दंत विशेषज्ञ से जानें इसकी मुख्य वजहें और सही उम्र में उपचारस्वास्थ्य
10 अक्तू॰ 2026, 12:34 am (2 मिनट पहले)· 0

चेहरे की बनावट बिगाड़ सकते हैं टेढ़े-मेढ़े दांत, दंत विशेषज्ञ से जानें इसकी मुख्य वजहें और सही उम्र में उपचार

बचपन की कुछ गलत आदतों और आनुवंशिक कारणों से दांत बाहर की ओर निकल आते हैं। सही समय पर दंत चिकित्सक से परामर्श लेकर इस समस्या को आसानी से ठीक किया जा सकता है।

अक्सर सही जानकारी और जागरूकता की कमी के चलते लोग शुरुआती शारीरिक बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर जीवनभर की परेशानी और पछतावे का सबब बन जाते हैं। ऐसी ही एक सामान्य परेशानी चेहरे की सुंदरता और बनावट को प्रभावित करने वाले बाहर निकले या ऊपर-नीचे उगे दांतों की है। जब दांत अपनी सामान्य सीध में नहीं होते हैं, तो इससे पूरे चेहरे का रूप-रंग बदल जाता है। पूर्वी चंपारण के दंत चिकित्सक डॉक्टर श्रीकांत के अनुसार, यदि इस शारीरिक समस्या पर शुरुआत में ही ध्यान दे दिया जाए, तो स्थायी विकृति से आसानी से बचाव किया जा सकता है।

दांतों के बाहर निकलने की प्रमुख वजहें और बचपन की आदतें

दांतों के असामान्य रूप से बाहर निकलने या अव्यवस्थित होने के पीछे कई अलग-अलग कारण जिम्मेदार होते हैं। डॉक्टर श्रीकांत ने स्पष्ट किया कि कई बच्चों में लंबे समय तक अंगूठा चूसने की आदत होती है, जिसके लगातार दबाव के कारण सामने के दांत आगे की ओर झुकने लगते हैं। इसके अलावा, कई बच्चों में मुंह खोलकर सोने की आदत देखी जाती है, जो जबड़े और दांतों के सामान्य विकास को प्रभावित कर उन्हें बाहर की तरफ धकेलती है।

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शिशुओं को बोतल से दूध पिलाने के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही भी इसका एक बड़ा कारक बनती है। कई बार अभिभावकों की असावधानी की वजह से बच्चे दूध की बोतल मुंह में दबाए हुए ही सो जाते हैं, जिससे आगे चलकर दांतों के बाहर आने की संभावना काफी बढ़ जाती है। वहीं कुछ मामलों में यह समस्या पारिवारिक या आनुवंशिक कारणों की वजह से भी पैदा होती है।

दूध के दांत न गिरना और जबड़े में जगह की कमी

अव्यवस्थित दांतों का एक अन्य प्रमुख कारण प्राथमिक यानी दूध के दांतों का सही समय पर न गिरना है। जब दूध का दांत अपनी तय समयसीमा पर स्वाभाविक रूप से नहीं टूटता, तो नीचे से निकलने वाले स्थायी दांत को सही जगह नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में स्थायी दांत को जबड़े में जहां भी थोड़ी जगह मिलती है, वह वहीं से टेढ़ा-मेढ़ा या ऊपर-नीचे बाहर निकलने लगता है, जिससे दांतों की बनावट अजीब दिखने लगती है। जैसे ही ऐसी स्थिति दिखे, तुरंत किसी योग्य दंत चिकित्सक से संपर्क कर उचित परामर्श लेना चाहिए।

उपचार के लिए 10 से 15 वर्ष की आयु सबसे उपयुक्त

दांतों के संरेखण को ठीक करने के लिए समय का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर श्रीकांत के मुताबिक, इस समस्या के सटीक और आसान इलाज के लिए 10 से 15 वर्ष की उम्र सबसे आदर्श मानी जाती है, क्योंकि इस विकासात्मक अवस्था में जबड़े और मसूड़ों को सही आकार में लाना अपेक्षाकृत काफी सरल होता है।

अक्सर लोग तब क्लिनिक पहुंचते हैं जब शादी-ब्याह के रिश्ते की बात चल रही होती है या संबंध टूटने की नौबत आ जाती है। इस उम्र तक जबड़े की हड्डियां पूरी तरह सख्त हो चुकी होती हैं और काफी समय बीत जाने के कारण इलाज जटिल और धीमा हो जाता है। इसलिए जैसे ही बचपन में दांतों के बाहर आने या टेढ़े होने के लक्षण महसूस हों, बिना देर किए समय रहते चिकित्सकीय उपचार शुरू करा लेना चाहिए।

सवाल-जवाब

दांतों के बाहर निकलने का मुख्य कारण क्या है?
बचपन में अंगूठा चूसना, मुंह खोलकर सोना, दूध की बोतल मुंह में रखकर सोना, दूध के दांत समय पर न गिरना और आनुवंशिक कारण इसके मुख्य कारक हैं।
दांतों को सीधा कराने के लिए सबसे सही उम्र कौन सी है?
दंत चिकित्सक डॉक्टर श्रीकांत के अनुसार 10 से 15 वर्ष की आयु में इसका इलाज कराना सबसे आसान और प्रभावी होता है।
दूध का दांत समय पर न गिरने से क्या समस्या होती है?
दूध का दांत न गिरने पर स्थायी दांत को निकलने की सही जगह नहीं मिलती, जिससे वह टेढ़ा-मेढ़ा या ऊपर-नीचे निकलने लगता है।
उम्र बीत जाने के बाद इलाज कराने में क्या परेशानी आती है?
बड़ी उम्र में जबड़े की हड्डियां सख्त हो जाने के कारण इलाज ज्यादा जटिल हो जाता है और इसमें काफी लंबा समय लगता है।
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