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बारिश के मौसम में घर लाएं यह चमत्कारी बेल, नीले फूल देंगे सेहत और सुख-समृद्धि दोनोंजीवनशैली
3 घंटे पहले· 3

बारिश के मौसम में घर लाएं यह चमत्कारी बेल, नीले फूल देंगे सेहत और सुख-समृद्धि दोनों

मानसून में गमले में आसानी से उगने वाली अपराजिता की बेल पूजा-पाठ से लेकर सेहत तक कई मायनों में फायदेमंद मानी जाती है, जानिए इसे लगाने का सही तरीका और इसके नीले फूलों से बनने वाली चाय के फायदे।

प्रिया शर्माप्रिया शर्मालाइफस्टाइल एडिटर 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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बारिश का मौसम शुरू होते ही अगर आप अपने घर के गमले में कोई ऐसा पौधा लगाना चाहते हैं जो देखने में खूबसूरत भी हो और सेहत के लिए भी फायदेमंद हो, तो अपराजिता की बेल एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। गहरे नीले रंग के इसके फूल न सिर्फ आंगन की रौनक बढ़ाते हैं बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा भी लाते हैं। सबसे खास बात यह है कि इस बेल की देखभाल बहुत आसान है और छोटे गमले में भी यह बड़ी आसानी से फल-फूल जाती है, यही वजह है कि आजकल लोग इसे अपने घरों में लगाना खूब पसंद कर रहे हैं। एक ऐसा पौधा जो खुशियां भी बांटे और सेहत भी संवारे, वह हर घर के लिए मुफीद माना जाता है।

सतना की सोहावल विकासखंड की अधिकारी सुधा पटेल ने बताया कि इस बेल का हिंदू रीति-रिवाजों और पूजा-पाठ में गहरा महत्व है। इसके नीले फूल भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा में खासतौर पर चढ़ाए जाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में इस पौधे को रखने से सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। धार्मिक महत्व के अलावा विंध्य क्षेत्र में लोग सदियों से इसे कारगर औषधि के तौर पर भी इस्तेमाल करते आए हैं, यानी यह पौधा सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं बल्कि पीढ़ियों के अनुभव से जुड़ा एक घरेलू नुस्खा भी है।

गमले में अपराजिता कैसे लगाएं

एक्सपर्ट्स की मानें तो बारिश का मौसम अपराजिता लगाने के लिए सबसे सही समय होता है क्योंकि इस दौरान नमी और तापमान दोनों पौधे के अनुकूल रहते हैं। इसे उगाने के लिए सबसे पहले 10 से 12 इंच का ऐसा गमला चुनें जिसमें पानी की निकासी की अच्छी व्यवस्था हो। इसके बाद इसमें सामान्य मिट्टी, वर्मी कंपोस्ट और कोकोपीट मिलाकर एक उपजाऊ मिश्रण तैयार करें और गमला भर दें, ताकि जड़ों को शुरुआत से ही भरपूर पोषण मिल सके।

बीज जल्दी अंकुरित हों, इसके लिए एक आसान तरकीब अपनाई जा सकती है। बीजों को मिट्टी में डालने से पहले 3 से 4 घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगो दें, इससे बीज की ऊपरी सख्त परत नरम पड़ जाती है और अंकुरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके बाद इन भीगे बीजों को नम मिट्टी में करीब आधा इंच गहरा दबाएं, ऊपर से हल्की मिट्टी डालें और स्प्रे बोतल से पानी का छिड़काव करें। गमले को ऐसी जगह रखें जहां रोजाना 6 से 8 घंटे सीधी धूप आती हो, क्योंकि पर्याप्त धूप मिलने पर ही यह पौधा अच्छी तरह बढ़ता है। ऐसा करने पर महज 5 से 10 दिनों के भीतर छोटे-छोटे पौधे मिट्टी से बाहर निकल आते हैं।

पानी देते वक्त एक बात का खास ख्याल रखें कि मिट्टी की ऊपरी परत सूखी दिखे तभी पानी डालें, वरना जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं। चूंकि यह एक बेल है, इसलिए थोड़ा बड़ा होने पर इसे बढ़ने के लिए लकड़ी, बालकनी की रेलिंग या ट्रेलिस का सहारा जरूर दें, वरना यह जमीन पर फैलकर कमजोर हो सकती है।

ज्यादा और घना फूल पाने के उपाय

बीज लगाने के करीब 60 से 90 दिनों के भीतर पौधे में सुंदर फूल खिलने लगते हैं और अनुकूल मौसम में कलियां भी तेजी से बनने लगती हैं। फूल जल्दी और ज्यादा मात्रा में मिलें, इसके लिए पौधे की ऊपरी टहनियों की समय-समय पर छंटाई करते रहना चाहिए, इससे नई शाखाएं निकलती हैं और पौधा घना बनता है। इसके अलावा हर महीने मिट्टी में थोड़ी गोबर की खाद या पोटैशियम युक्त जैविक खाद जरूर मिलाएं, इससे पौधे को जरूरी पोषण मिलता रहता है और फूलों की संख्या भी बढ़ती है।

नीले फूलों की चाय के सेहत से जुड़े फायदे

विंध्य क्षेत्र में अपराजिता के फूलों से बनी चाय बरसों से लोगों की पसंदीदा रही है और इसे बनाना बेहद आसान है। एक कप उबलते पानी में 4 से 5 सूखे या ताजे नीले फूल डालकर 5 मिनट के लिए ढक दें, फिर इसे छानकर स्वादानुसार शहद या नींबू का रस मिलाएं। नींबू का रस मिलाते ही चाय का रंग नीले से बैंगनी में बदल जाता है, जो देखने में भी बेहद आकर्षक लगता है। यह हर्बल चाय एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है, जो फ्री रेडिकल्स से लड़कर त्वचा में निखार लाती है और बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकती है।

इसमें मौजूद औषधीय तत्व दिमाग में एसिटाइलकोलाइन का स्तर बढ़ाकर याददाश्त तेज करने में मदद करते हैं और साथ ही तनाव व एंग्जायटी को भी कम करते हैं। इतना ही नहीं, यह चाय मेटाबॉलिज्म को बूस्ट कर वजन नियंत्रित रखने और ब्लड शुगर लेवल को स्थिर बनाए रखने में भी सीधे तौर पर मददगार साबित होती है। यानी एक छोटी सी बेल से मिलने वाले ये नीले फूल पूजा की थाली से लेकर सेहत की चाय तक हर तरह से काम आते हैं।

इसका आप पर असर

यह कोई नीति या घटना की खबर नहीं बल्कि एक व्यावहारिक जीवनशैली टिप है, फिर भी इसका असर सीधे रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

  • गार्डनिंग के शौकीनों के लिए: जो लोग घर में मानसून सीजन में गमले वाला पौधा लगाना चाहते हैं, वे अपराजिता को बिना ज्यादा खर्च और मेहनत के आसानी से उगा सकते हैं।
  • सेहत के प्रति जागरूक पाठकों के लिए: घर में उगे नीले फूलों से बनी चाय एक बिना खर्च वाला घरेलू उपाय है जो त्वचा, बाल, याददाश्त और वजन नियंत्रण में मदद कर सकता है।

सवाल-जवाब

अपराजिता का पौधा लगाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
मानसून यानी बारिश का मौसम इस बेल को लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।
अपराजिता के बीज कितने दिनों में अंकुरित होते हैं?
बीजों को गुनगुने पानी में भिगोकर लगाने पर महज 5 से 10 दिनों के भीतर छोटे पौधे मिट्टी से बाहर आ जाते हैं।
पौधे में फूल आने में कितना समय लगता है?
बीज लगाने के करीब 60 से 90 दिनों के भीतर पौधे में सुंदर नीले फूल खिलने लगते हैं।
अपराजिता के फूलों का धार्मिक महत्व क्या है?
इसके नीले फूल भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा में चढ़ाए जाते हैं और वास्तु शास्त्र के अनुसार यह घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
अपराजिता की चाय कैसे बनाई जाती है?
एक कप उबलते पानी में 4 से 5 नीले फूल डालकर 5 मिनट ढककर छान लें और स्वादानुसार शहद या नींबू का रस मिलाएं।
इस चाय से सेहत को क्या फायदे मिलते हैं?
यह चाय एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होकर त्वचा में निखार लाती है, बालों को सफेद होने से रोकती है, याददाश्त बढ़ाती है और तनाव व वजन को नियंत्रित करने में मदद करती है।
गमले में पानी कब देना चाहिए?
मिट्टी की ऊपरी परत सूखी दिखे तभी पानी दें, वरना जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं।
पौधे को सहारे की जरूरत क्यों पड़ती है?
चूंकि यह एक बेल है, इसलिए बड़ा होने पर इसे बढ़ने के लिए लकड़ी, बालकनी की रेलिंग या ट्रेलिस का सहारा देना जरूरी होता है।
प्रिया शर्मा
लेखक के बारे मेंप्रिया शर्मालाइफस्टाइल एडिटर नई दिल्ली
विशेषज्ञतालाइफस्टाइल पत्रकारिता, वेलनेस, यात्रा, संस्कृति, रिश्ते, खानपान, फ़ैशन, आधुनिक जीवन, व्यक्तित्व विकास, संपादकीय क्यूरेशन

प्रिया शर्मा एक लाइफस्टाइल एडिटर हैं जो आधुनिक जीवनशैली, वेलनेस, यात्रा, संस्कृति, रिश्तों और रोज़मर्रा के लाइफस्टाइल रुझानों को कवर करती हैं। वे समकालीन जीवन और पाठकों की रुचियों को दर्शाने वाली दिलचस्प सामग्री तैयार करती हैं।

प्रिया शर्मा एक लाइफस्टाइल एडिटर हैं जो लाइफस्टाइल पत्रकारिता — वेलनेस, यात्रा, संस्कृति, रिश्ते, खानपान, फ़ैशन और आधुनिक जीवन के रुझानों — में विशेषज्ञता रखती हैं। वे बदलती जीवनशैली, रोज़मर्रा की आदतों और सांस्कृतिक बदलावों को दर्शाने वाली दिलचस्प कहानियों की देखरेख और क्यूरेशन करती हैं। स्पष्टता और प्रासंगिकता पर मज़बूत संपादकीय ज़ोर के साथ प्रिया ऐसी कहानियाँ सामने लाती हैं जो पाठकों को स्वस्थ, संतुलित और रुझान-सजग जीवन के लिए प्रेरित व सूचित करती हैं। उनका काम वैश्विक लाइफस्टाइल आंदोलनों, व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि और आधुनिक पाठकों के लिए रोज़मर्रा की प्रेरणा को उजागर करता है।

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