दृढ़ संकल्प और अटूट मेहनत हो तो सफलता जरूर कदम चूमती है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां रहने वाली प्रतिभा पांडेय ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रतिभा ने केवल एक दिन में 11 अलग-अलग योग रिकॉर्ड बनाकर वर्ल्डवाइड बुक्स ऑफ रिकॉर्ड में अपनी जगह पक्की कर ली है। यह उपलब्धि उनके समर्पण का परिणाम है, जिसके लिए उन्हें संस्था की ओर से आधिकारिक प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है।
योग यात्रा की शुरुआत और प्रेरणा
प्रतिभा की योग के प्रति रुचि की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान हुई थी। उस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए उन्होंने योग को अपना सहारा बनाया। प्रतिभा ने घर पर ही ऑनलाइन माध्यमों से योग सीखना शुरू किया और बाद में एक निजी ट्रेनर की मदद से इसके कठिन आसनों और तकनीकों में निपुणता हासिल की। हालांकि, अपनी बीएड की पढ़ाई पूरी करने के दौरान उन्होंने योग से कुछ समय का अंतराल लिया था, लेकिन डिग्री पूरी होने के बाद उन्होंने पुनः योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाया और नई ऊंचाइयों को छूने का लक्ष्य रखा।
रिकॉर्ड बनाने का सफर
घोड़े शहीद क्षेत्र की निवासी प्रतिभा पांडेय ने जब योग के विभिन्न आसनों में महारत हासिल कर ली, तब उन्होंने वर्ल्डवाइड बुक्स ऑफ रिकॉर्ड में आवेदन करने का निर्णय लिया। उन्होंने कम समय में कठिन योगासनों का प्रदर्शन किया, जिसके बाद समिति द्वारा उनके प्रयासों की जांच की गई और उन्हें 11 रिकॉर्ड्स के लिए सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया। यह सर्टिफिकेट उन्हें दिसंबर के महीने में प्राप्त हुआ, जिसने मिर्जापुर का मान बढ़ाया है।
योग का संदेश और सामाजिक चुनौतियां
योग के महत्व पर बात करते हुए प्रतिभा बताती हैं कि यह न केवल शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाता है, बल्कि पूरे दिन ऊर्जावान रहने में भी मदद करता है। उन्होंने मिर्जापुर में योग के प्रति जागरूकता की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि साक्षरता दर कम होने के कारण आज भी महिलाएं और लड़कियां घर से बाहर निकलकर योग करने में असहज महसूस करती हैं। प्रतिभा का मानना है कि योग महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का समाधान है, इसलिए उन्हें विशेष रूप से इसका अभ्यास करना चाहिए।
परिवार का सहयोग और सरकारी अपेक्षाएं
इस उपलब्धि पर प्रतिभा के पिता शिव शंकर पांडेय ने खुशी जताते हुए कहा कि पूरे परिवार ने हमेशा उनकी बिटिया का उत्साहवर्धन किया है। हालांकि, पिता ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार भले ही योग को बढ़ावा देने के दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके सकारात्मक परिणाम अभी भी सीमित हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को केवल योग को ही नहीं, बल्कि योग करने वाले साधकों को भी प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि इसे व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाया जा सके।











