पटना फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद का कहना है कि अभी संतरे का मौसम नहीं चल रहा है। बाजार में इस वक्त जो फल संतरे जैसा दिखाई दे रहा है, वह असल में विदेश से आयातित माल्टा है। माल्टा एक खट्टा-मीठा साइट्रस फल है, जिसकी बाहरी दिखावट बिल्कुल संतरे जैसी होती है, जिस कारण ग्राहक अक्सर गच्चा खा जाते हैं और इन्हें एक ही समझ बैठते हैं।
माल्टा और संतरा: एक तकनीकी भ्रम
लोगों के बीच माल्टा को लेकर यह आम धारणा है कि यह संतरा और मौसमी का एक मिला-जुला रूप या क्रॉस ब्रीड है। हालांकि, यह स्वाद में संतरा और मौसमी के बीच का एहसास देता है। पटना के बाजार में माल्टा की आमद करीब 20 साल पहले शुरू हुई थी। यह फल दिखने में काफी आकर्षक, स्वाद में मीठा और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से काफी लाभकारी माना जाता है।
प्रमुख अंतर: पहचान के तरीके
संतरा और माल्टा दोनों एक ही साइट्रस परिवार से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन इनमें बुनियादी अंतर मौजूद हैं जिन्हें ध्यान से देखकर समझा जा सकता है:
- स्वाद: संतरा आमतौर पर अधिक मिठास वाला होता है, जबकि माल्टा में हल्के खट्टेपन के साथ कम मिठास होती है।
- रस की मात्रा: माल्टा अधिक रसीला होता है, जिसके कारण इसका इस्तेमाल जूस निकालने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
- छिलका और बनावट: माल्टा का छिलका संतरे के मुकाबले अधिक सख्त और मोटा होता है। संतरे की फांकें बड़ी आसानी से अलग हो जाती हैं, जबकि माल्टा का गूदा थोड़ा कसा हुआ और सख्त होता है।
- रंग: संतरा अक्सर हरे और नारंगी रंग के मिश्रण में आता है, वहीं माल्टा पूरी तरह से नारंगी रंग का दिखता है।
कीमत और उपलब्धता
शशिकांत प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि संतरा मूल रूप से सर्दियों का फल है, इसलिए वर्तमान में इसका सीजन नहीं है। मौजूदा समय में पटना के बाजारों में जो माल्टा बिक रहा है, वह मुख्य रूप से मिस्र और दक्षिण अफ्रीका से मंगवाया गया है। कीमत में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। थोक बाजार में माल्टा की कीमत जहां 80 से 120 रुपये प्रति किलो के बीच है, वहीं सामान्य तौर पर संतरे की कीमत 40 से 60 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है।
आयातित फलों का बाजार
पटना की बाजार समिति में केवल माल्टा ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कई देशों से बेहतरीन गुणवत्ता वाले फल पहुंच रहे हैं। न्यूजीलैंड, यूएसए, इजिप्ट, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से भारी मात्रा में विदेशी फलों का आयात किया जाता है। स्थानीय लोग इन विदेशी फलों को काफी पसंद भी करते हैं। हालांकि, इसी आयात के कारण बाजार में भ्रम की स्थिति बनी है, जहां लोग संतरे के नाम पर माल्टा खरीदने को मजबूर हैं।











