महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों ने स्थानीय लोगों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। शनिवार की सुबह एक बार फिर इस इलाके की धरती डोल उठी, जिससे घबराए लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में लगातार आ रहे इन झटकों के कारण नागरिक अब एक डर के साए में जीने को मजबूर हो गए हैं। बार-बार हिलती धरती के कारण स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटा जा सके।
ताजा झटके की तीव्रता और गहराई
शनिवार सुबह 11 बजकर 26 मिनट पर आए इस ताजा भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.5 मापी गई है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र जमीन से केवल 5 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। राहत की बात यह रही कि इतनी कम गहराई पर केंद्र होने के बावजूद इस घटना में फिलहाल किसी भी प्रकार की जनहानि या किसी के घायल होने की खबर सामने नहीं आई है। हालांकि, कम अंतराल पर बार-बार आते ये झटके स्थानीय लोगों की चिंता को लगातार बढ़ा रहे हैं।
इसी सप्ताह पहले भी कांपी थी धरती
इस ताजा भूकंप से ठीक पहले, इसी हफ्ते गुरुवार को भी इस पूरे इलाके में भारी दहशत का माहौल देखा गया था। उस दिन हिंगोली के साथ-साथ इसके पड़ोसी जिलों परभणी और नांदेड़ में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। गुरुवार के तड़के 1:37 बजे से लेकर सुबह 3:23 बजे के बीच कुल चार बार धरती कांपी थी। इन झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.6 से लेकर 4.6 तक दर्ज की गई थी। अधिकारियों ने बताया था कि उन झटकों का मुख्य केंद्र हिंगोली जिले के वसमत तालुका के अंतर्गत आने वाला शिरली गांव था। गुरुवार को आए इन झटकों के कारण कई कच्चे और पुराने घरों को नुकसान पहुंचा था, जिससे लोगों में डर और बढ़ गया है।
समझें रिक्टर स्केल पर भूकंप का पैमाना
भूकंप की तीव्रता को वैज्ञानिक तौर पर रिक्टर स्केल के जरिए मापा जाता है। इस पैमाने पर दर्ज होने वाली अलग-अलग तीव्रता के आधार पर नुकसान का आकलन किया जाता है। इसकी रूपरेखा कुछ इस प्रकार है
- 4 से 4.9 तीव्रता: इस स्तर के भूकंप में घरों के भीतर रखी हल्की वस्तुएं अपनी जगह से हिलकर नीचे गिर सकती हैं।
- 5 से 5.9 तीव्रता: इस तीव्रता के झटकों में भारी सामान और बड़े फर्नीचर भी अपनी जगह से खिसक सकते हैं।
- 6 से 6.9 तीव्रता: इस स्तर पर मजबूत इमारतों की नींव और बुनियादी ढांचे में गंभीर दरारें आ सकती हैं।
- 7 से 7.9 तीव्रता: यह एक विनाशकारी स्तर है, जिसमें बड़ी इमारतें पूरी तरह ढह जाती हैं।
- 8 से 8.9 तीव्रता: इस तीव्रता का भूकंप समुद्र में भयानक सुनामी ला सकता है और बड़े पैमाने पर तबाही मचाता है।
- 9 या उससे अधिक तीव्रता: इसे सबसे चरम स्तर माना जाता है, जिसमें पृथ्वी पर पूर्ण और अकल्पनीय विनाश होता है।
आखिर क्यों आते हैं लगातार भूकंप?
हाल के दिनों में भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। अगर इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझें, तो हमारी पृथ्वी के भीतर कुल 7 मुख्य टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं। ये प्लेटें लगातार और बेहद धीमी गति से अपने स्थान पर घूमती रहती हैं। इस निरंतर संचलन के दौरान कई बार ये प्लेट्स आपस में टकरा जाती हैं या इनके बीच तीव्र घर्षण पैदा होता है। जब इन प्लेटों के बीच बहुत अधिक दबाव बनता है, तो ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकलती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बुरा असर इंसानी बस्तियों पर पड़ता है, जहां पल भर में बड़े ढांचे जमींदोज हो जाते हैं।











