बेंगलुरु में सोने की कीमतों में गुरुवार को फिर से तेजी देखने को मिली है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में लगातार गिरावट के बाद, अब 24-कैरेट, 22-कैरेट और 18-कैरेट सोने के भाव में सुधार हुआ है। हालांकि, इस स्थिति के विपरीत, चांदी की कीमतों में गुरुवार को गिरावट दर्ज की गई। कर्नाटक की राजधानी में सोने में यह हल्की वृद्धि वैश्विक बाजारों में छाई मंदी के विपरीत है।
बेंगलुरु में सोने और चांदी के वर्तमान भाव
गुरुवार, 9 जुलाई को सुबह 11:45 बजे के आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु में 24-कैरेट सोने का भाव 11 रुपये प्रति ग्राम की बढ़त के साथ 14,324 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गया। इसी तरह, 22-कैरेट सोने की कीमतों में 10 रुपये प्रति ग्राम का उछाल आया और यह 13,130 रुपये प्रति ग्राम हो गया। वहीं, 18-कैरेट सोना 8 रुपये की बढ़त के साथ 10,743 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
दूसरी ओर, चांदी के भाव में गिरावट आई है। गुरुवार को चांदी की कीमत 10 रुपये प्रति ग्राम कम होकर 235 रुपये प्रति ग्राम पर आ गई। किलोग्राम के हिसाब से देखें तो इसमें 10,000 रुपये की भारी कमी आई है और अब यह 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रही है। चांदी पिछले कुछ हफ्तों से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही है, हालांकि जनवरी और फरवरी के महीनों में इसमें काफी उतार-चढ़ाव देखे गए थे।
वैश्विक बाजार और सोने पर असर
जहाँ घरेलू स्तर पर सोने की कीमतों में थोड़ी मजबूती दिखी, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की चाल सुस्त रही। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 4,100 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे गिर गए हैं। यह डेटा 9 जुलाई को ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के जरिए सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस उतार-चढ़ाव के पीछे ईरान-अमेरिका के संबंधों में बढ़ती अनिश्चितता और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा फिर से सोने की खरीदारी शुरू करना प्रमुख कारण है।
निवेशकों के लिए बाजार की राय
टाटा म्यूचुअल फंड की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर दुविधा, डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे कारक सोने को मौजूदा दायरे में बनाए रख सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति लंबे समय के निवेशकों के लिए सोना जमा करने का एक अच्छा अवसर हो सकती है। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना के कारण छोटी अवधि में सोने पर दबाव बना रह सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए, रुपये में आई गिरावट एक सुरक्षा कवच का काम कर रही है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में घरेलू सोने की कीमतें अधिक स्थिर बनी हुई हैं और इनमें गिरावट का असर कम दिखाई देता है। टाटा म्यूचुअल फंड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वे सोने के प्रति मध्यम से लंबी अवधि के अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक मानते हैं। उनका मानना है कि बुनियादी कारकों के समर्थन के चलते बाजार में लंबी अवधि की तेजी बनी रह सकती है, इसलिए किसी भी गिरावट के दौरान निवेशकों को खरीदारी पर विचार करना चाहिए।











