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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोने की कीमतों में सुधार, 4,100 डॉलर के पार पहुंची वैल्यूबाज़ार
1 घंटे पहले· 2

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोने की कीमतों में सुधार, 4,100 डॉलर के पार पहुंची वैल्यू

शुक्रवार को एशियाई बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखी गई, जो 4,120 डॉलर के करीब पहुंच गई। व्यापारी अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव और फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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शुक्रवार को एशियाई सत्र की शुरुआत के साथ ही सोने की कीमतों में रिकवरी दर्ज की गई है। बहुमूल्य धातु का भाव 4,120 डॉलर के स्तर के आसपास पहुंच गया है। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़कते संघर्ष के संकेतों के बीच आई है। निवेशक इन भू-राजनीतिक अस्थिरताओं का आकलन कर रहे हैं, जिसका असर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर पड़ रहा है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जो इस कीमती धातु की तेजी पर लगाम लगा सकती है।

फेडरल रिजर्व की नीति और बाजार की उम्मीदें

फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक के मिनटों से संकेत मिलता है कि नीति निर्माता भविष्य की दरों को लेकर एकमत नहीं हैं। दस्तावेजों के अनुसार, कई प्रतिभागियों का मानना है कि साल के अंत तक फेडरल फंड्स रेट वर्तमान लक्ष्य सीमा के भीतर या उससे थोड़ा नीचे होना चाहिए। वहीं, दूसरी ओर अन्य अधिकारियों का आकलन है कि दरें वर्तमान लक्ष्य से ऊपर जानी चाहिए। इस प्रकार की 'हॉकिश' उम्मीदें सोने की कीमत के लिए ऊपरी सीमा तय कर सकती हैं, क्योंकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी गैर-उपज वाली संपत्ति के लिए चुनौतीपूर्ण होती है।

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सोने का ऐतिहासिक महत्व और उपयोग

मानव इतिहास में सोने ने हमेशा से धन के भंडार और विनिमय के माध्यम के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज के समय में, जेवर या सजावट के अलावा, सोना एक प्रमुख 'सेफ-हेवन' संपत्ति माना जाता है। अशांत समय में, जब शेयर बाजार या अन्य जोखिम वाली संपत्तियां अस्थिर होती हैं, तो निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं। यह मुद्रास्फीति और गिरती हुई मुद्राओं के खिलाफ एक बेहतरीन बचाव (हेज) के रूप में कार्य करता है, क्योंकि इसकी वैल्यू किसी विशेष सरकार या जारीकर्ता पर निर्भर नहीं होती।

केंद्रीय बैंकों की बढ़ती रुचि

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। कठिन आर्थिक दौर में अपनी मुद्राओं को सहारा देने और अर्थव्यवस्था की मजबूती का भरोसा दिलाने के लिए, ये बैंक अपने भंडार में विविधता लाते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना खरीदा, जिसका मूल्य लगभग 70 अरब डॉलर था। यह खरीद अब तक के रिकॉर्ड में सबसे अधिक है। चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक तेजी से अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ा रहे हैं।

बाजार की गतिशीलता और सोने का संबंध

सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स के साथ विपरीत संबंध होता है। जब डॉलर का मूल्य गिरता है, तो सोना आमतौर पर ऊपर जाता है। इसके अलावा, शेयर बाजार में तेजी आने पर अक्सर सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में गिरावट सोने के लिए फायदेमंद साबित होती है। चूँकि सोने की कीमत डॉलर में तय होती है (XAU/USD), इसलिए डॉलर का प्रदर्शन इसकी चाल को प्रभावित करता है। एक मजबूत डॉलर सोने की कीमत को नियंत्रित रखता है, जबकि कमजोर डॉलर सोने के भाव को ऊपर धकेलता है।

अन्य मुद्राओं और क्रिप्टो बाजार का रुख

अन्य बाजारों में भी हलचल तेज है। GBP/USD की जोड़ी 1.3430 के तीन-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद वापस नीचे आई है। यूके में राजनीतिक अनिश्चितता कम होने से पाउंड को कुछ सहारा मिल रहा है, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा है। EUR/USD भी 1.1400 के ऊपर अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश में है। इसी बीच, क्रिप्टो बाजार में Aave 90.00 डॉलर से ऊपर कारोबार कर रहा है। कंपनी ने 'स्टेबल वॉल्ट्स' नाम का एक प्लेटफॉर्म पेश किया है, जिससे व्यवसायों को निश्चित दर पर स्टेबलकॉइन यील्ड प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

इसका आप पर असर

भारत में: सोने की कीमतों में वैश्विक वृद्धि का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर पड़ेगा, जिससे गहनों की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।

निवेशकों के लिए: वैश्विक अस्थिरता और डॉलर में उतार-चढ़ाव सोने की निवेश वैल्यू को प्रभावित करते हैं, इसलिए निवेशकों को बाजार की खबरों पर नजर रखनी चाहिए।

सवाल-जवाब

सोने की कीमत में हालिया उछाल का मुख्य कारण क्या है?
सोने की कीमतों में सुधार मुख्य रूप से मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण हुआ है।
क्या फेडरल रिजर्व की नीतियां सोने की कीमतों को प्रभावित करती हैं?
हां, फेडरल रिजर्व की 'हॉकिश' नीति और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना सोने की कीमतों को सीमित कर सकती है, क्योंकि सोना एक गैर-उपज वाली संपत्ति है।
केंद्रीय बैंक सोने को क्यों खरीदते हैं?
केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं को सहारा देने और कठिन आर्थिक समय में अपनी अर्थव्यवस्था की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए अपने भंडार में विविधता लाने हेतु सोना खरीदते हैं।
डॉलर का सोने से क्या संबंध है?
सोना डॉलर में आंका जाता है, इसलिए डॉलर और सोने के बीच विपरीत संबंध होता है। डॉलर के कमजोर होने पर सोने की कीमतें अक्सर बढ़ती हैं।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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