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अमेरिकी हवाई हमलों से भड़का ईरान संकट और फेड की सख्ती, डाउ जोंस में भारी गिरावट के बीच नैस्डैक में उछालबाज़ार
2 घंटे पहले· 4

अमेरिकी हवाई हमलों से भड़का ईरान संकट और फेड की सख्ती, डाउ जोंस में भारी गिरावट के बीच नैस्डैक में उछाल

अमेरिकी सैन्य हमलों के कारण अमेरिका-ईरान युद्धविराम टूटने और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के संकेत मिलने से अमेरिकी बाजार में भारी हलचल देखी गई, जहां डाउ जोंस में भारी गिरावट आई लेकिन चिप निर्माता कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी से नैस्डैक बढ़त के साथ बंद हुआ।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 7 मिनट पढ़ें AI के लिए
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वैश्विक वित्तीय बाजारों में उस समय भारी हलचल मच गई जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई। अमेरिकी शेयर बाजार ने फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की नवीनतम बैठक के ब्यौरे और अमेरिका तथा ईरान के बीच अचानक बढ़े सैन्य गतिरोध पर बेहद मिश्रित प्रतिक्रिया प्रदर्शित की है। जहां एक ओर सुरक्षा चिंताओं और सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों के कारण डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में भारी बिकवाली देखी गई, वहीं दूसरी ओर तकनीकी और विशेष रूप से सेमीकंडक्टर क्षेत्र के शेयरों में आई जोरदार तेजी ने नैस्डैक कंपोजिट को निचले स्तरों से उबारकर हरे निशान में बंद होने में मदद की। इस विरोधाभासी बाजार चाल ने निवेशकों को वैश्विक जोखिमों के बीच अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

युद्धविराम का अंत और हवाई हमलों से भड़का भू-राजनीतिक तनाव

मध्य पूर्व में लंबे समय से चली आ रही अशांति एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्धविराम समझौते को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। संघर्ष के नए दौर की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर और उसके आसपास 80 से अधिक रणनीतिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। सैन्य कमांडरों के अनुसार, इन हमलों के निशाने पर ईरान की वायु रक्षा प्रणालियां, मिसाइल प्रक्षेपण स्थल, रडार प्रतिष्ठान और सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास की नौसैनिक संपत्तियां थीं। यह भीषण सैन्य कार्रवाई वास्तव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई थी। इस नए सैन्य टकराव के कारण पूरे मध्य पूर्व में सायरन की आवाजें गूंज उठीं और विस्फोटों के धमाकों से अशांति फैल गई।

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ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख से शेयर बाजार में कोहराम, सेंसेक्स में आई भारी गिरावट
जॉब्स के कमजोर आंकड़ों के बीच डाउ जोन्स ने बनाया नया रिकॉर्ड, चिप शेयरों की पिटाई से लुढ़का नैस्डैक; टेस्ला 7% टूटा

इस गंभीर सैन्य टकराव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि अब बातचीत का दौर समाप्त हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा:

मेरे लिए, मुझे लगता है कि यह अब खत्म हो चुका है। मैं अब उनके साथ कोई व्यवहार नहीं करना चाहता। वे दुष्ट लोग हैं। उनका नेतृत्व बीमार लोगों द्वारा किया जा रहा है। मैं हमारे वार्ताकारों से बात करूंगा। वे बातचीत करना चाहते हैं, वे अच्छे लोग हैं, लेकिन उन्हें मेरे पास वापस आना होगा। जहां तक मेरा सवाल है, उनके साथ सौदा करना केवल समय की बर्बादी है।

इस अचानक भड़के संघर्ष का पहला और सबसे सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा। आपूर्ति में संभावित बाधा की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। अमेरिकी पश्चिमी टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में लगभग 6 प्रतिशत की भारी तेजी देखी गई और यह 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इसी तरह, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी तेजी से चढ़ते हुए 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आसपास पहुंच गया। युद्ध की वजह से उत्पन्न होने वाले मुद्रास्फीति के दबावों के बीच अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ, जिससे डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101 के स्तर को पार कर गया।

बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि इस सैन्य कार्रवाई ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पोनमुडी आर ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा:

ईरान पर अमेरिका के नए हमलों के बाद निवेशकों की धारणा लगातार दबाव में बनी हुई है, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा कर दी है कि युद्धविराम समाप्त हो गया है। इस नए सैन्य घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताओं को बहुत बढ़ा दिया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान के डर को जन्म दिया है।

डाउ जोंस में भारी गिरावट लेकिन चिप शेयरों ने नैस्डैक को बचाया

भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दोहरे झटके के कारण डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज (DJIA) में सत्र के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान यह सूचकांक कम से कम 855 अंक तक टूट गया और 52,069.87 के इंट्राडे निचले स्तर को छू गया। हालांकि, बाद में मामूली सुधार के साथ डाउ जोंस 576.76 अंक अथवा 1.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 52,348.39 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के पीछे कई बड़े कॉर्पोरेट दिग्गजों के शेयरों में आई भारी बिकवाली जिम्मेदार थी। अमेरिकन एक्सप्रेस, बोइंग, प्रॉक्टर एंड गैंबल, जेपीमॉर्गन चेस, मर्क एंड कंपनी, सेल्सफोर्स और हनीवेल इंटरनेशनल जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 2 प्रतिशत से लेकर 4 प्रतिशत तक टूट गए, जिससे सूचकांक पर भारी दबाव बना। व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला S&P 500 सूचकांक भी इसी मंदी की राह पर चला और यह 21.14 अंक या 0.28 प्रतिशत गिरकर 7,482.71 पर बंद हुआ।

इसके बिल्कुल विपरीत, तकनीकी कंपनियों के प्रभुत्व वाले नैस्डैक कंपोजिट ने विपरीत परिस्थितियों में भी उल्लेखनीय जुझारू क्षमता का प्रदर्शन किया। चिप और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में आई आक्रामक खरीदारी के दम पर नैस्डैक कंपोजिट 51.96 अंक अथवा 0.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,870.65 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा। इस तेजी की अगुवाई एनवीडिया ने की, जिसके शेयर 3.65 प्रतिशत उछल गए। इसके अलावा ब्रॉडकॉम के शेयर में 4.83 प्रतिशत की शानदार तेजी दर्ज की गई। एशियाई तकनीकी दिग्गज सैमसंग के शेयरों में भी 2.70 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि एप्पल के शेयर 1 प्रतिशत मजबूत हुए। सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अन्य प्रमुख कंपनियों में सैनडिस्क के शेयर रिकॉर्ड 7 प्रतिशत तक चढ़ गए, जबकि माइक्रोन और डेल के शेयरों में क्रमशः 1.1 प्रतिशत और 3.52 प्रतिशत की तेजी देखी गई।

FOMC की बैठक के ब्यौरे: महंगाई का खतरा और ब्याज दरों पर मतभेद

शेयर बाजार की इस हलचल के बीच फेडरल रिजर्व की जून नीतिगत बैठक के ब्यौरे (FOMC minutes) जारी किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को लेकर बेहद सतर्क है और उसका रुख काफी सख्त बना हुआ है। 16 और 17 जून को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श और नीति निर्माता सदस्यों ने सर्वसम्मति से संघीय निधि दर (federal funds rate) को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत की सीमा पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था। नीतिगत ब्यौरे से स्पष्ट होता है कि सदस्य इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि निकट भविष्य में मुद्रास्फीति ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।

बैठक के विवरण के अनुसार, नीति निर्माताओं ने अनुमान जताया है कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ी रहेगी, लेकिन जैसे-जैसे नए टैरिफ के प्रभाव कम होंगे, ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता आएगी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बंदी के कारण आपूर्ति श्रृंखला में पैदा हुए व्यवधान कम होंगे, वैसे-वैसे महंगाई में गिरावट आनी शुरू हो जाएगी। हालांकि, सदस्यों ने यह भी चेतावनी दी कि महंगाई के आउटलुक को लेकर जोखिम अभी भी ऊपर की ओर झुके हुए हैं। कई सदस्यों ने आगाह किया कि जिंसों (कमोडिटी) की ऊंची कीमतें और वैश्विक आपूर्ति व्यवधान उम्मीद से अधिक समय तक बने रह सकते हैं, जो केंद्रीय बैंक के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

श्रम बाजार और आर्थिक विकास की स्थिति पर चर्चा करते हुए नीति निर्माताओं ने संतोष व्यक्त किया। बैठक के दौरान यह पाया गया कि पिछले एक वर्ष के दौरान बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत स्थिर रही है और यह नीति निर्माताओं के दीर्घकालिक अनुमानों के बेहद करीब है। रोजगार सृजन के संदर्भ में सदस्यों ने कहा कि इस वर्ष वेतनभोगी नौकरियों में वृद्धि मजबूत हुई है, जो श्रम बल की अंतर्निहित वृद्धि के अनुकूल प्रतीत होती है। इसके अलावा, नीति निर्माताओं ने चालू वर्ष की शेष अवधि में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में ठोस वृद्धि जारी रहने की उम्मीद जताई है। इस आर्थिक विस्तार को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े निवेश, मजबूत घरेलू उपभोक्ता खर्च और सरकार की वित्तीय नीतियां शामिल हैं।

भविष्य की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के मार्ग को लेकर नीति निर्माताओं के बीच गहरा विभाजन और अनिश्चितता दिखाई दी। अर्थव्यवस्था की विभिन्न संभावित परिस्थितियों पर विचार करते हुए कई सदस्यों ने संकेत दिया कि इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों का उचित स्तर मौजूदा लक्षित सीमा के भीतर या उससे थोड़ा नीचे होना चाहिए। इसके विपरीत, कई अन्य सदस्यों का आकलन था कि इस वर्ष के अंत में उचित ब्याज दरें वर्तमान लक्षित सीमा से ऊपर होनी चाहिए। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की नीतिगत कार्रवाइयां पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की दिशा पर निर्भर करेंगी।

निवेशकों के लिए आगे की चुनौतियां और कॉरपोरेट अर्निंग्स

इस अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य के बीच निवेशकों की नजर अब आगामी आर्थिक आंकड़ों और कॉरपोरेट परिणामों पर टिकी हुई है। बाजार को दिशा देने के लिए निवेशक गुरुवार को जारी होने वाले साप्ताहिक बेरोजगारी दावों और मौजूदा घरों की बिक्री के आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिससे ब्याज दरों के भविष्य को लेकर कुछ नए संकेत मिल सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कॉरपोरेट जगत की बड़ी कंपनियों जैसे पेप्सिको, प्रोग्रेसिव और सिनटास के तिमाही वित्तीय नतीजे भी घोषित होने वाले हैं, जो बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इसका आप पर असर

  • वैश्विक और भारतीय बाजारों में: मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में बिकवाली बढ़ सकती है, जिससे घरेलू म्यूचुअल फंड और शेयर पोर्टफोलियो में अल्पकालिक गिरावट आने की आशंका है।
  • महंगाई पर असर: कच्चे तेल के $79 प्रति बैरल के पास पहुंचने और डॉलर के मजबूत होने से आयात लागत बढ़ सकती है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों में खुदरा महंगाई बढ़ सकती है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या था?
बाजार में भारी गिरावट के दो प्रमुख कारण थे- पहला, अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमलों के कारण युद्धविराम का टूटना और दूसरा, फेडरल रिजर्व की ओर से नीतिगत दरों को लेकर सख्त (Hawkish) रुख के संकेत मिलना।
डाउ जोंस और नैस्डैक के प्रदर्शन में इतना अंतर क्यों देखा गया?
डाउ जोंस में अमेरिकन एक्सप्रेस और बोइंग जैसे बड़े औद्योगिक और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के कारण भारी गिरावट आई। इसके विपरीत, एनवीडिया और ब्रॉडकॉम जैसी कंपनियों के नेतृत्व में चिप और सेमीकंडक्टर शेयरों में जोरदार खरीदारी होने से नैस्डैक बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।
फेडरल रिजर्व ने अपनी जून बैठक में ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लिया था?
फेड चेयरमैन केविन वॉर्श और नीति निर्माताओं ने जून की बैठक में संघीय निधि दर (federal funds rate) को बिना किसी बदलाव के 3.5% से 3.75% की सीमा पर बरकरार रखने का फैसला किया था।
कच्चे तेल की कीमतों पर इस सैन्य तनाव का क्या प्रभाव पड़ा?
सैन्य संघर्ष के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 6 प्रतिशत उछलकर $75 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड तेजी के साथ $79 प्रति बैरल के पास बंद हुआ।
क्या फेडरल रिजर्व के नीति निर्माता ब्याज दरों की कटौती पर एकमत हैं?
नहीं, बैठक के ब्यौरे से पता चलता है कि नीति निर्माता विभाजित हैं। कई सदस्यों का मानना है कि दरें इस साल के अंत तक वर्तमान सीमा से थोड़ी नीचे होनी चाहिए, जबकि अन्य कई सदस्यों का मानना है कि दरें वर्तमान सीमा से ऊपर रहनी चाहिए।
आगे बाजार की दिशा के लिए कौन से आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे?
निवेशकों की नजर अब अमेरिका के साप्ताहिक बेरोजगारी दावों और मौजूदा घरों की बिक्री के आंकड़ों के साथ-साथ पेप्सिको, प्रोग्रेसिव और सिनटास जैसी दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी है।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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