अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कड़े बयान ने वैश्विक वित्तीय बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार में भारी भूचाल ला दिया है। ईरान के साथ रिश्तों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के आक्रामक रुख के तुरंत बाद दलाल स्ट्रीट पर अफरातफरी मच गई और महज आधा घंटे के भीतर सेंसेक्स में एक हजार अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ अब किसी भी तरह की बातचीत या समझौते की गुंजाइश नहीं बची है और पुराना समझौता पूरी तरह से खत्म हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस सख्त तेवर का असर सीधे तौर पर निवेशकों की धारणा पर पड़ा, जिससे चौतरफा बिकवाली शुरू हो गई। इस बयान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिसका खामियाजा भारतीय शेयर बाजार को भुगतना पड़ा है।
नाटो शिखर बैठक में डोनाल्ड ट्रंप के तीखे तेवर
नाटो के महासचिव मार्ग रेट्टी के साथ सैन्य गठबंधन की वार्षिक बैठक में भाग लेने पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी आक्रामक मूड में दिखाई दिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके लिए ईरान का अध्याय अब पूरी तरह से बंद हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह इस मुद्दे पर अपना और अधिक समय बर्बाद करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। ट्रंप का मानना है कि ईरान के मौजूदा नेतृत्व के साथ किसी भी तरह के समझौते पर आगे बढ़ना व्यर्थ है। उन्होंने ईरान के नेताओं को बेहद अस्वस्थ मानसिकता का करार दिया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया। इस तीखे बयान ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया।
दोपहर के कारोबार में महज 40 मिनट में ढह गया बाजार
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान का असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय इक्विटी बाजार पर तत्काल देखने को मिला। 8 जुलाई की दोपहर को भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स दोपहर 1 बजकर 40 मिनट पर 77,603.99 अंकों के स्तर पर सामान्य रूप से कारोबार कर रहा था। लेकिन जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया, बाजार में तेज गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। अगले 40 मिनट के भीतर ही सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक टूटकर 76,587.81 अंकों के स्तर पर आ गिरा। इस तरह महज कुछ ही मिनटों में बाजार ने करीब 1.4 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की। इस अचानक आई गिरावट से बाजार में घबराहट फैल गई और भारतीय शेयर बाजार का वोलैटिलिटी इंडेक्स भी 27 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ 14.77 के स्तर पर पहुंच गया, जो बाजार में अस्थिरता और डर के माहौल को दर्शाता है।
हवाई हमले और होर्मुज जलडमरू मध्य में बढ़ा खतरा
तनाव की शुरुआत डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से थोड़ी देर पहले ही हो चुकी थी। अमेरिका ने ईरान पर नए सिरे से हवाई हमले शुरू कर दिए थे और इसके साथ ही ईरान को तेल निर्यात के लिए दी गई विशेष छूट को भी तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया। इस फैसले के बाद क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं पैदा हो गईं। विशेष रूप से वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते विवाद के कारण होर्मुज जलडमरू मध्य से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर दोनों देशों की सीधी नजरें टिकी हुई हैं। यह जलमार्ग दुनिया भर में कच्चे तेल के परिवहन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में इस मार्ग से गुजरने वाले तेल के टैंकरों और जहाजों पर एक बार फिर हमले हो सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
ईरान पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंका
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना कड़ा रुख जारी रखते हुए उसे पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते जिनकी मानसिकता बीमार और हिंसक है। ट्रंप ने आशंका जताई कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आते हैं, तो वह उनका इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेगा। दरअसल, ट्रंप के इस आक्रामक बयान के पीछे एक बड़ा कारण यह भी था कि अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की थी। तेहरान की इस त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की घोषणा कर दी।
कारोबार की समाप्ति पर लाल निशान में बंद हुए सूचकांक
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस सैन्य व राजनीतिक तनाव का असर भारतीय निवेशकों के मनोबल पर बहुत गहरा पड़ा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मंदी की आशंका के चलते भारतीय बाजार में भी घबराहट में बिकवाली का दौर शुरू हो गया। मुनाफावसूली और बिकवाली के इस दबाव के कारण सेंसेक्स कारोबार की समाप्ति पर 1,677 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,503.60 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 516.65 अंकों के भारी नुकसान के साथ 23,882 अंकों के स्तर पर बंद हुआ। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो बीएसई सेंसेक्स में 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 2.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। इस पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों में से केवल 1000 कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि 3,095 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए।











