इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक से एक चौंकाने वाला सीसीटीवी वीडियो सामने आया है, जिसमें एक बॉर्डर पुलिस अफसर कार के अंदर स्टन ग्रेनेड फेंकते नजर आ रहा है। इस फुटेज के सामने आने के बाद इजरायली पुलिस को अफसर के खिलाफ जांच बिठानी पड़ी। इसी वीकेंड इलाके में दो और अलग घटनाओं में एक 16 साल के लड़के और चार महीने के एक मासूम की भी जान चली गई, जिससे कब्जे वाले इलाकों में फिलिस्तीनियों की जिंदगी कितनी असुरक्षित है, यह एक बार फिर सामने आ गया।
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना
वीडियो में साफ दिख रहा है कि अफसर ड्राइवर की तरफ का दरवाजा जबरदस्ती बंद करके पकड़े हुए है, जबकि गाड़ी की दूसरी तरफ यानी पैसेंजर साइड से धुआं उठने लगता है। कार के अंदर स्टन ग्रेनेड फटने के तुरंत बाद, अंदर बैठे दोनों लोग दूसरी तरफ के दरवाजे से बाहर निकलकर भागते हैं, जाहिर तौर पर धुएं और धमाके के झटके से बचने के लिए। जैसे ही दोनों बाहर झुककर खुद को बचाने की कोशिश करते हैं, अफसर अपनी राइफल से उनकी तरफ फायर करता हुआ भी दिखता है। यह पूरा नजारा देखने में जितना डरावना लगता है, इजरायली मानवाधिकार संगठन बीत्सेलम, जिसने यह फुटेज सार्वजनिक की, ने बताया कि कार में मौजूद दोनों लोग इस घटना में बच गए।
पुलिस ने खुद माना, नियमों का उल्लंघन हुआ
फुटेज सामने आने के बाद इजरायली पुलिस के पास सफाई देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। पुलिस ने स्थानीय मीडिया को बताया कि अफसर ने इस दौरान तय प्रक्रिया के मुताबिक काम नहीं किया। पुलिस ने यह भी बताया कि यह मामला अब आंतरिक पुलिस जांच विभाग को सौंप दिया गया है, यानी वह विभाग जो सेवारत पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों और गड़बड़ी के आरोपों की जांच करता है। इस मामले को आगे भेजना खुद इस बात का संकेत है कि सीसीटीवी में जो कुछ कैद हुआ, वह तय नियमों से बाहर था, हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि अफसर पर आखिरकार क्या कार्रवाई होगी।
क़लैंडिया में 16 साल के लड़के की गोली मारकर हत्या
स्टन ग्रेनेड वाली घटना अकेली नहीं है जिसने इस वीकेंड सुर्खियां बटोरीं। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, रविवार को क़लैंडिया में एक अलग घटना में इजरायली सैनिकों ने गोली मारकर 16 साल के वालिद अबू स्नीनेह की जान ले ली। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इसी घटना में दो और बच्चे घायल हुए, दोनों के पैरों में गोली लगी। फिलहाल इजरायली अधिकारियों की तरफ से इस गोलीबारी को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, इसलिए यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर सैनिकों ने गोली क्यों चलाई।
गेट पर रोके जाने से चार महीने के बच्चे की मौत
रविवार को एक तीसरी दुखद घटना भी हुई, जिसमें गंभीर रूप से बीमार चार महीने के बच्चे अहमद जैद की जान चली गई। संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय मानवाधिकार दफ्तर के प्रमुख के मुताबिक, रामल्लाह से पश्चिम में बसे उसके गांव के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगा गेट इजरायली सैनिकों ने खोलने से इनकार कर दिया, जिससे अहमद को समय पर इलाज नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई। इस दफ्तर के प्रमुख अजित सुंघे ने बताया कि देइर अम्मार गांव के बाहर गेट के दूसरी तरफ एक एम्बुलेंस अहमद को अस्पताल ले जाने के लिए पहले से खड़ी थी, लेकिन बंद गेट की वजह से वह उस तक नहीं पहुंच पाई। सुंघे ने इस मासूम की मौत को बेमतलब बताया और कहा कि यह एक कब्जा करने वाली ताकत की तरफ से कब्जे में रह रहे फिलिस्तीनियों की इंसानियत और अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी करने की मिसाल है।
इजरायली सेना का अलग बयान
सुंघे के दावे के उलट, इजरायली सेना ने इजरायल के हारेत्ज़ अखबार को अपनी बात रखते हुए कहा कि उसके सैनिकों ने बच्चे और उसके परिवार को बिना किसी देरी के इलाज जारी रखने के लिए आगे जाने दिया। यानी सेना का बयान सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र दफ्तर के उस दावे से टकराता है, जिसमें बंद गेट को इस मौत की देरी की वजह बताया गया था। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर कायम हैं और अभी तक किसी स्वतंत्र सूत्र से इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि परिवार को गेट पर कितनी देर रोका गया या इस देरी का बच्चे की मौत में कितना असर रहा।
इस तरह एक ही वीकेंड में वेस्ट बैंक में तीन अलग-अलग घटनाएं सामने आईं, कार में स्टन ग्रेनेड फेंकना, क़लैंडिया में एक किशोर की गोली मारकर हत्या, और देइर अम्मार में गेट बंद होने से एक मासूम की मौत। स्टन ग्रेनेड वाले मामले में इजरायली पुलिस ने कम से कम नियमों के उल्लंघन की बात मानकर उसे जांच के लिए भेज दिया है, लेकिन क़लैंडिया की गोलीबारी और अहमद की मौत को लेकर फिलिस्तीनी व संयुक्त राष्ट्र पक्ष और इजरायली सेना के दावे अब भी आमने-सामने हैं।





