तेहरान की ऐतिहासिक सड़कों पर रविवार को दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान लाखों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस ऐतिहासिक और विशाल आयोजन के बीच एक बहुत बड़ा खालीपन साफ नजर आया, जिसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता के इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम से पूरी तरह गायब रहे। मोजतबा की इस रहस्यमयी गैर-मौजूदगी ने उनकी सुरक्षा और सेहत को लेकर दुनिया भर में चल रही अटकलों को एक बार फिर हवा दे दी है। हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि अमेरिकी और इसराइली एयरस्ट्राइक में, जिसमें उनके पिता की जान गई थी, मोजतबा भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मार्च की शुरुआत में पद संभालने के बाद से उनका जनता के सामने न आना कई तरह के गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है।
नए सुप्रीम लीडर की गैर-मौजूदगी और हमलों की आशंका
दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अन्य तीन बेटे मसूद खामेनेई, मुस्तफ़ा खामेनेई और मीसम खामेनेई रविवार को आयोजित इस प्रार्थना सभा में प्रमुखता से उपस्थित थे। उनके साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वाहिदी सहित देश के तमाम बड़े अधिकारी और सैन्य नेता मौजूद थे। मोजतबा खामेनेई को मार्च की शुरुआत में ही ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया था, लेकिन अपने इस बड़े पदभार को संभालने के बाद से वे एक बार भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इस रहस्यमयी गायब होने के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वे एयरस्ट्राइक के हमलों से उबर नहीं पाए हैं, जबकि राजनीतिक हलकों में यह डर भी सता रहा है कि इसराइल उन्हें भी अपना निशाना बनाने की फिराक में है, जिसके कारण उनकी सुरक्षा को बेहद गुप्त और कड़ा रखा गया है।
'सदी का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार' और उमड़ा जनसैलाब
ईरानी प्रशासन ने इस पूरे आयोजन को "सदी का अंतिम संस्कार" करार दिया है और उनका अनुमान है कि हफ्ते भर चलने वाले इन कार्यक्रमों में लगभग 12 से 20 मिलियन लोग शामिल हो सकते हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई ने साल 1989 से लेकर इस साल फरवरी में अपनी मृत्यु तक ईरान पर पूरी तरह से एकछत्र राज किया था। उनके सम्मान में रविवार को पूरे ईरान में सरकारी छुट्टी घोषित की गई थी ताकि अधिक से अधिक लोग इस अंतिम विदाई में शामिल हो सकें। दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर फिलहाल तेहरान के विशाल धार्मिक परिसर ग्रैंड मुसल्ला में रखा गया है। अंतिम संस्कार की प्रार्थना का नेतृत्व शिया समुदाय के बेहद सम्मानित और प्रसिद्ध विद्वान जाफ़र सोभानी ने किया। 97 वर्षीय जाफ़र सोभानी पवित्र शहर कुम के शिया मदरसों में अध्यापन का कार्य करते हैं और उनकी धार्मिक जगत में काफी बड़ी प्रतिष्ठा है।
भीषण गर्मी के बीच बिगड़ी लोगों की तबीयत
तेहरान के इस धार्मिक परिसर में उमड़ी अभूतपूर्व भीड़ और बढ़ते तापमान ने वहां मौजूद लोगों के लिए भारी मुश्किलें खड़ी कर दीं। गर्मी और उमस से लोगों को बचाने के लिए वहां मौजूद स्वयंसेवकों और सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ पर लगातार पानी और धुंध की बौछारें कीं। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, ग्रैंड मुसल्ला और उसके आसपास बनाए गए अस्थाई चिकित्सा केंद्रों में 4,000 से अधिक लोगों को इलाज के लिए जाना पड़ा। अंतिम संस्कार के दृश्यों में देखा गया कि चिकित्सा दल बीमार और थके हुए लोगों की मदद कर रहे थे और एक बुजुर्ग महिला को स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा था। गनीमत यह रही कि इस अत्यधिक भीड़ के बावजूद किसी के हताहत होने या मौत की कोई खबर सामने नहीं आई। प्रशासन ने तेहरान में ही 10 मिलियन से अधिक लोगों के जुटने की आशंका को देखते हुए भगदड़ जैसी स्थितियों से बचने के लिए कड़े दिशा-निर्देश और चेतावनी जारी की थी।
परिवार के सदस्यों की मौत और पश्चिमी देशों के खिलाफ नफरत
ग्रैंड मुसल्ला में अली खामेनेई के ताबूत के बगल में उनके चार अन्य रिश्तेदारों के ताबूत भी रखे गए थे, जो तेहरान में हुए हवाई हमलों में मारे गए थे। इन मृतकों में उनकी महज एक साल की पोती ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगनी भी शामिल थी, जिसके ताबूत को देखकर वहां मौजूद भीड़ का गुस्सा और दुख और अधिक बढ़ गया। अपने लंबे शासनकाल के दौरान अली खामेनेई ने हमेशा पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका और इसराइल के खिलाफ एक आक्रामक और सीधे टकराव की नीति अपनाई थी। उन्होंने मध्य पूर्व में अमेरिका और इसराइल विरोधी सशस्त्र समूहों को हर तरह का वित्तीय और सैन्य समर्थन दिया था, जिसमें गाजा का हमास, लेबनान का हिजबुल्लाह और यमन का हूती आंदोलन शामिल हैं। इस वैचारिक और सैन्य टकराव का असर अंतिम संस्कार में आए लोगों के हाव-भाव और नारों में भी साफ देखा जा सकता था।
ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ भड़काऊ नारेबाजी
अंतिम संस्कार के इस मौके पर पूरे परिसर में भारी तनाव और पश्चिमी ताकतों के प्रति नफरत का माहौल था। भीड़ में मौजूद लोगों के हाथों में बड़े-बड़े बैनर थे, जिन पर "ट्रंप को मार डालो" और "बीबी को मार डालो" जैसे नारे लिखे हुए थे। यहाँ "बीबी" शब्द का इस्तेमाल सीधे तौर पर इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए किया गया था। भीड़ ने लगातार "अमेरिका की मौत" और "इसराइल की मौत" के नारे लगाए। प्रार्थना की शुरुआत से ठीक पहले एक प्रसिद्ध कवि मोहम्मद रसूली ने मंच से एक कविता पाठ किया। रसूली ने कविता के माध्यम से कहा कि "ट्रंप की हत्या करना अब हमारी जिम्मेदारी है।" इस बात को सुनते ही पूरी भीड़ ने जोरदार नारों के साथ उनका समर्थन किया और अपने नेताओं की मौत का बदला लेने की कसमें खाईं।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान और ईरान की जनता का पलटवार
इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन से कई तीखे और विवादास्पद बयान दिए। ट्रंप ने बताया कि ईरान के इस विशाल अंतिम संस्कार को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही शांति वार्ताओं को एक सप्ताह के लिए टाल दिया गया है। ट्रंप ने आगे एक बेहद आक्रामक बयान देते हुए कहा कि चूंकि ईरान के सभी शीर्ष अधिकारी और सैन्य कमांडर इस समय एक ही जगह पर एकत्रित हैं, इसलिए वाशिंगटन चाहता तो "एक ही झटके" में उन सभी का खात्मा कर सकता था। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ा, "लेकिन हम ऐसा नहीं करने जा रहे हैं, क्योंकि अगर हमने ऐसा कर दिया तो फिर हमारे पास बातचीत करने के लिए कोई बचेगा ही नहीं।" इसके अलावा, ट्रंप ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि ईरान की जनता अपने दिवंगत नेता के लिए इस कदर रो रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता था कि ईरान के लोग खामेनेई से नफरत करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "हो सकता है कि ये आंसू झूठे हों।"
ट्रंप के इस बयान पर अंतिम संस्कार में शामिल हुईं 50 वर्षीय महिला ज़हरा सफ़ाई ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया और तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता ने 47 साल पहले कोई नकली आंसू बहाने के लिए क्रांति नहीं की थी और न ही उनके देश ने अपने अनगिनत शहीदों का बलिदान इसलिए दिया था कि आज वे यहाँ खड़े होकर झूठा विलाप करें। ईरानी जनता का यह दर्द पूरी तरह से वास्तविक है और वे अपने नेताओं के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।
ताबूत की आगे की यात्रा का पूरा कार्यक्रम
ग्रैंड मुसल्ला में धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद दिवंगत खामेनेई के ताबूत को सोमवार को तेहरान की सड़कों पर एक विशाल जुलूस के रूप में निकाला जाएगा। इसके बाद इस राजकीय अंतिम संस्कार का एक लंबा और व्यवस्थित कार्यक्रम तय किया गया है। मंगलवार को इस ताबूत को शिया धर्मशास्त्र के प्रमुख केंद्र पवित्र शहर कुम ले जाया जाएगा। बुधवार को इस काफिले को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराकर पड़ोसी देश इराक के एक बेहद महत्वपूर्ण शिया धार्मिक स्थल पर ले जाया जाएगा, जहां स्थानीय शिया समुदाय के लोग उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद, गुरुवार को दिवंगत सुप्रीम लीडर के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गृहनगर मशहद, जो उत्तर-पूर्वी ईरान में स्थित है, ले जाया जाएगा, जहां उन्हें सुपुर्दे-खाक किया जाएगा।













