मेट्रो शहरों में रहते हुए जेब को कंट्रोल में रखना आसान नहीं होता. ऊंचा किराया, रोजाना का ट्रैवल खर्च, दोस्तों के साथ बाहर निकलना और सोशल लाइफ मेंटेन रखने का दबाव, इन सबके बीच ज्यादातर लोग मान बैठते हैं कि बचत बढ़ानी है तो शौक और आराम में कटौती करनी ही पड़ेगी. बेंगलुरु में रहने वाले अक्षय CN ने अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए इस सोच को सिरे से चुनौती दी है. उन्होंने बताया कि लाइफस्टाइल में कोई बड़ा बदलाव किए बिना भी हर महीने अच्छी खासी रकम बचाई जा सकती है, बस कुछ रोजमर्रा की आदतों को सुधारने की जरूरत है.
अक्षय ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल @bangalore_viral पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल से कोई समझौता किए बगैर बेंगलुरु में अपने खर्च कैसे घटाए. इस पोस्ट में उन्होंने कुल 7 आसान तरीके गिनाए हैं, जिन्हें कोई भी नौकरीपेशा व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से उतार सकता है.
मेट्रो के पास घर लेकर बचाया रोजाना का ट्रैवल खर्च
अक्षय की पहली आदत घर की लोकेशन से जुड़ी है. उन्होंने शहर के किसी चमक-दमक वाले या ट्रेंडी इलाके में रहने के बजाय मेट्रो स्टेशन के आसपास घर लेना चुना. उनका कहना है कि भले ही मेट्रो के करीब किराया शुरुआत में थोड़ा ज्यादा महसूस हुआ हो, लेकिन इसने रोजाना के पेट्रोल, ऑटो और कैब के खर्च को बहुत हद तक घटा दिया. ट्रैफिक जाम में फंसने की नौबत नहीं आई, जिससे न सिर्फ मानसिक तनाव कम हुआ बल्कि लंबे समय में पैसों की भी बड़ी बचत हुई. यानी शुरुआत में ज्यादा दिखने वाला किराया असल में हर महीने के हिसाब-किताब में फायदे का सौदा साबित हुआ.
क्विक कॉमर्स की सहूलियत पर लगाई लगाम
बेंगलुरु में 10 मिनट में सामान पहुंचाने वाले क्विक कॉमर्स ऐप्स और इंस्टेंट डिलीवरी सेवाओं का जबरदस्त चलन है. अक्षय ने महसूस किया कि यही 'सहूलियत' धीरे धीरे उनका बजट बिगाड़ रही थी, चाहे वो बेवजह ऑटो-रिन्यू होने वाले सब्सक्रिप्शन हों या छोटी छोटी ऑनलाइन खरीदारी. हर बार सिर्फ इसलिए ऑर्डर कर देना कि सामान मिनटों में घर आ जाएगा, महीने के आखिर में जेब पर भारी पड़ रहा था. इसके बाद उन्होंने सहूलियत के नाम पर रोज-रोज पैसे उड़ाने की आदत पर पूरी तरह लगाम लगा दी.
बिना प्लान के आउटिंग निकली सबसे महंगी आदत
अक्षय के मुताबिक दोस्तों के साथ अचानक निकल जाना, पब जाना या एक कैफे से दूसरे कैफे में घूमना जेब पर सबसे ज्यादा असर डालता है. उन्होंने लिखा, "बिना प्लान के घूमना-फिरना लोगों की उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से बैंक बैलेंस खत्म करता है." इसी वजह से उन्होंने अपने वीकेंड की योजना पहले से बनाना शुरू कर दिया. पहले से तय बजट और प्लान के साथ बाहर निकलने से फिजूलखर्ची अपने आप कम हो गई और वीकेंड मनोरंजन भी बना रहा.
हर नए गैजेट के पीछे भागना छोड़ा
आईटी हब होने की वजह से बेंगलुरु के वर्क कल्चर में एक अलग तरह का दबाव रहता है, जहां आसपास के लोगों को नया आईफोन या लेटेस्ट गैजेट खरीदते देख हर किसी का मन ललचाता है. अक्षय ने इस पीयर प्रेशर से खुद को दूर रखा और सिर्फ दूसरों को दिखाने के लिए अपने गैजेट अपग्रेड करना बंद कर दिया. उनका मानना है कि जरूरत के आधार पर खर्च करना, दिखावे के आधार पर खर्च करने से कहीं ज्यादा समझदारी भरा फैसला है.
दिखावे की लाइफस्टाइल से किया किनारा
अक्षय का कहना है, "कई लोग यहां सिर्फ इसलिए पैसे खर्च करते हैं ताकि वे सामाजिक रूप से अपडेटेड दिख सकें, न कि इसलिए कि उन्हें सच में उन चीजों की जरूरत होती है." उन्होंने इस बनावटी और दिखावटी लाइफस्टाइल ट्रेंड को फॉलो करना पूरी तरह छोड़ दिया. जैसे ही उन्होंने दिखावे की इस दुनिया से खुद को बाहर निकाला, उनका मासिक खर्च लगभग आधा रह गया. यह बदलाव बताता है कि दूसरों की नकल करने की जगह अपनी असली जरूरतों पर फोकस करने से कितना बड़ा फर्क पड़ सकता है.
बाहर का खाना घटाया, घर पर खाना बनाना अपनाया
रोज-रोज रेस्टोरेंट से खाना मंगाना या बार-बार बाहर खाने जाना न सिर्फ जेब खाली करता है बल्कि सेहत पर भी बुरा असर डालता है. अक्षय ने रोजाना बाहर खाने की जगह घर पर खाना पकाना शुरू किया. उनके मुताबिक इस एक आदत ने उनकी सेहत और उनकी सेविंग्स, दोनों में जबरदस्त सुधार ला दिया. जो पैसा पहले हर हफ्ते बाहर के खाने पर खर्च होता था, वही अब सीधे उनकी बचत में जुड़ने लगा.
ज्यादा सैलरी नहीं, अच्छी आदतें बदलती हैं आर्थिक तस्वीर
अपनी पोस्ट के आखिर में अक्षय ने सबसे अहम बात कही. उनके मुताबिक सिर्फ सैलरी बढ़ जाने से किसी की आर्थिक परेशानियां खत्म नहीं होतीं. अगर खर्च करने की आदतें खराब हों, तो कितनी भी ज्यादा कमाई क्यों न हो, वह कम पड़ ही जाती है. बेंगलुरु जैसे महंगे शहर में टिके रहने और पैसा जोड़ने के लिए मजबूत वित्तीय आदतें डालना सबसे जरूरी शर्त है, बड़ी सैलरी उसका विकल्प नहीं बन सकती.
अगर हर महीने सैलरी खत्म होने की शिकायत बनी रहती है, तो अक्षय के बताए इन सात तरीकों को आजमाया जा सकता है. इनमें न तो कोई बड़ा त्याग है और न ही लाइफस्टाइल से समझौता, बस रोजमर्रा की आदतों में छोटा सा बदलाव है जो हर महीने बंपर बचत का रास्ता खोल सकता है.











