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भारतीय सेनाओं की ताकत बढ़ाने को बड़ा कदम, डीआरडीओ की मिसाइल तकनीक अब देसी कंपनियों को सौंपने की मंजूरीभारत
25 अग॰ 2026, 1:49 pm (37 दिन पहले)· 2

भारतीय सेनाओं की ताकत बढ़ाने को बड़ा कदम, डीआरडीओ की मिसाइल तकनीक अब देसी कंपनियों को सौंपने की मंजूरी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय उद्योगों को देने की मंजूरी दी है, जिससे देश में मिसाइल निर्माण तेज होगा और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय कंपनियों को ट्रांसफर करने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा मकसद देश के भीतर ही उन्नत हथियारों और मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करना है। तकनीक हस्तांतरण की इस प्रक्रिया से भारतीय सेनाओं को मिसाइलों की समय पर आपूर्ति संभव होगी, जिससे सैन्य तैयारियों को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

लैब से कारखाने तक: स्वदेशी मिसाइल उत्पादन को मिलेगी नई रफ्तार

सरकार की इस नई नीति के तहत केवल उन भारतीय कंपनियों को मिसाइल बनाने का जिम्मा मिलेगा, जो सभी निर्धारित योग्यताएं, गुणवत्ता मानक और नियामकीय शर्तें पूरी करेंगी। अब तक डीआरडीओ मुख्य रूप से उन्नत मिसाइल प्रणालियों के अनुसंधान, विकास और शुरुआती परीक्षण का कार्य संभालता आया है। नई व्यवस्था के तहत डीआरडीओ केवल रिसर्च और नई तकनीकों के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा, जबकि प्रमाणित मिसाइल तकनीकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन घरेलू उद्योग करेंगे। इससे अनुसंधान और बड़े पैमाने पर निर्माण के बीच का अंतर समाप्त हो जाएगा।

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मिसाइलों का स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से विदेशी निर्भरता में भारी कमी आएगी। वैश्विक संकट या भू-राजनीतिक तनाव के समय विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर रहने के बजाय भारत अपनी सैन्य जरूरतों को घर में ही पूरा कर सकेगा। इससे सशस्त्र बलों को रणनीतिक रूप से बड़ी बढ़त मिलेगी और आवश्यक मिसाइल प्रणालियों का स्टॉक हमेशा तैयार रखा जा सकेगा।

एमएसएमई और छोटे उद्योगों के लिए खुलेंगे नए अवसर

इस फैसले का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। किसी भी मिसाइल प्रणाली के निर्माण के लिए केवल मुख्य बॉडी ही नहीं, बल्कि कई तरह के जटिल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, विशेष सामग्री और सेंसरों की आवश्यकता होती है। ऐसे में देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए रक्षा क्षेत्र में विकास के विशाल रास्ते खुलेंगे। बड़ी रक्षा कंपनियां मिसाइल असेंबली का काम करेंगी, जबकि एमएसएमई और तकनीकी पार्टनर्स विभिन्न कलपुर्जों की आपूर्ति संभालेंगे।

इस पूरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के बनने से देश में उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही निजी क्षेत्र द्वारा रक्षा अनुसंधान और उत्पादन में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य देश में एक ऐसा मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार तैयार करना है, जो न केवल भारतीय सेनाओं की जरूरतों को पूरा करे, बल्कि भविष्य में भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में भी स्थापित कर सके।

डीआरडीओ अब उन्नत अनुसंधान और नई तकनीकों पर देगा ध्यान

उत्पादन की जिम्मेदारी निजी और सरकारी भारतीय उद्योगों को सौंपे जाने से डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को अनुसंधान के लिए अधिक समय और संसाधन मिल सकेंगे। डीआरडीओ अब भविष्य की उन्नत सैन्य तकनीकों, हाइपरसोनिक प्रणालियों और आधुनिक हथियारों के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेगा। जैसे ही कोई नई तकनीक लैब में तैयार होकर परीक्षण पास करेगी, उसे तुरंत निर्माण के लिए घरेलू कंपनियों को सौंप दिया जाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की इस मंजूरी को भारतीय रक्षा क्षेत्र में प्रयोगशाला से कारखाने तक तकनीक पहुंचाने का एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। तकनीक के इस तेजी से हस्तांतरण से नई मिसाइल प्रणालियों को विकसित करने और उन्हें सेना में शामिल करने के बीच लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। इससे भारत की सामरिक संप्रभुता और स्वदेशी रक्षा क्षमता को लंबे समय तक मजबूती मिलती रहेगी।

सवाल-जवाब

डीआरडीओ मिसाइल तकनीक को लेकर क्या बड़ा फैसला लिया गया है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय घरेलू कंपनियों को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है।
कौन सी कंपनियां डीआरडीओ की मिसाइलों का उत्पादन कर सकेंगी?
सभी निर्धारित गुणवत्ता, प्रमाणन और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाली पात्र भारतीय निजी और सरकारी कंपनियां इन मिसाइलों का निर्माण कर सकेंगी।
इस फैसले से एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को क्या फायदा होगा?
मिसाइल निर्माण के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक घटकों, सामग्री और उपकरणों की आपूर्ति के लिए एमएसएमई को नए व्यापारिक अवसर मिलेंगे।
तकनीक हस्तांतरण के बाद डीआरडीओ की क्या भूमिका रहेगी?
डीआरडीओ का मुख्य ध्यान अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों और अगली पीढ़ी के अनुसंधान पर रहेगा, जबकि बड़े पैमाने पर उत्पादन उद्योग संभालेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 दिन पहले

यह नीतिगत निर्णय भारत की आंतरिक सुरक्षा और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएगा। डीआरडीओ द्वारा पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक घरेलू उद्योगों को सौंपे जाने से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटेगी और सेना को समय पर हथियार मिल सकेंगे। इस कदम से एमएसएमई और छोटे उद्योगों को भी बड़े अनुबंधों का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा, जिससे देश में एक मजबूत रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी बाधाएं दूर होंगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 दिन पहले

यह निर्णय भारत के रक्षा विनिर्माण को 'खरीदार' से 'निर्माता और निर्यातक' की भूमिका में बदलने का मार्ग प्रशस्त करता है। जब डीआरडीओ केवल अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा और घरेलू उद्योग बड़े पैमाने पर उत्पादन संभालेंगे, तो इससे लागत घटेगी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत होगी।

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