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वडनगर और काशी के जुड़ाव पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, युवाओं के सेवा संकल्प को सराहाभारत
24 सित॰ 2026, 10:37 am (1 दिन पहले)· 2

वडनगर और काशी के जुड़ाव पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, युवाओं के सेवा संकल्प को सराहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा संकल्प यात्रा के प्रतिभागियों से संवाद करते हुए सेवा को सबसे बड़ा प्रेरक तत्व बताया और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा संकल्प यात्रा में हिस्सा ले रहे युवाओं से सीधा संवाद साधा और उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि वडनगर और वाराणसी दोनों ही ऐसे प्राचीन एवं ऐतिहासिक शहर हैं, जिनकी जीवंत परंपरा हजारों सालों से निरंतर चली आ रही है। प्रधानमंत्री ने अपने जीवन के संदर्भ को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि वडनगर उनकी जन्मभूमि है और वाराणसी उनकी कर्मभूमि है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े इन सेवा यात्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यात्राओं के माध्यम से धरातल को समझना राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

वडनगर से काशी तक का आध्यात्मिक और सामाजिक सेतु

प्रधानमंत्री ने दोनों शहरों के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि काशी पर जहां देवाधिदेव बाबा विश्वनाथ की असीम कृपा बरसती है, वहीं वडनगर हाटकेश्वर महादेव के पावन आशीर्वाद की धरती है। युवा प्रतिभागी इन दोनों ऐतिहासिक नगरों के मध्य सेवा की एक सशक्त श्रृंखला स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान यह भी साझा किया कि वडनगर से वाराणसी की दिशा में आगे बढ़ रहे इन युवाओं के अनुभवों को सुनकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो वे स्वयं भी उस पदयात्रा में उनके कदम से कदम मिलाकर चल रहे हों।

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कठिनाइयों से सीख और संगठन का पुराना अनुभव

अपने पुराने दिनों को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब वे संगठन के स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, तब उन्हें कई यात्राओं में शामिल होने और उनकी व्यवस्था देखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला था। हालांकि, जब व्यक्ति स्वयं लंबी यात्रा पर पैदल निकलता है, तब उसे असल रूप में यह आभास होता है कि रास्ते में कितने संघर्षों, चुनौतियों और शारीरिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन तमाम अवरोधों के बाद भी युवा साथियों ने पूरे समर्पण, अनुशासन और लगन के साथ इस सेवा अभियान को आगे बढ़ाने का काम किया है।

कल्याणकारी पहलों की बुनियाद है सेवा भाव

जनहित के कार्यों पर बात रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब शासन या समाज में सेवा भाव को प्राथमिकता दी जाती है, तभी बड़े परिवर्तन संभव होते हैं। इसी भावना की बदौलत देश के करोड़ों जरूरतमंद नागरिकों तक मुफ्त अनाज पहुंचाने की व्यवस्था बनी और आयुष्मान योजना जैसी युगांतरकारी स्वास्थ्य पहलों ने जन्म लिया। उन्होंने कहा कि यात्रा के मार्ग में युवाओं ने खुद जमीनी स्तर पर सेवा कार्यों के विस्तार को देखा होगा। प्रधानमंत्री ने इस दौरान पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम सूर्य घर योजना का विशेष जिक्र किया और कहा कि ये कार्यक्रम कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सीधी पहुंच बनाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने दोहराया कि सेवा ही मनुष्य और समाज की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति होती है।

वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं का दायित्व

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति, चुनावी गतिविधियां और औपचारिक प्रशासनिक व्यवस्थाएं अपनी जगह निरंतर चलती रहती हैं, लेकिन सर्वोपरि संकल्प राष्ट्र निर्माण और एक सशक्त भारत का है। उन्होंने बल देकर कहा कि वर्ष 2047 तक एक पूर्णतः विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की युवा शक्ति की क्षमता और ऊर्जा को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाना अनिवार्य है। आज की युवा पीढ़ी इस विकसित भारत की मुख्य निर्माता है और भविष्य में इस व्यवस्था की सबसे बड़ी लाभार्थी भी वही बनेगी।

जमीनी हकीकत और विविधता को समझने की सीख

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए देश की जमीनी हकीकत को प्रत्यक्ष रूप से देखना और समझना बेहद आवश्यक है। युवाओं को चाहिए कि वे देश के अलग-अलग क्षेत्रों, भौगोलिक संरचनाओं और विविध सामाजिक वर्गों के लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलें। आम नागरिकों के सपनों, उनकी वास्तविक समस्याओं और उनकी रोजमर्रा की आकांक्षाओं को गहराई से जानना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि यह सेवा संकल्प यात्रा इन युवाओं के व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक दृष्टिकोण को समृद्ध करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किन दो शहरों को अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि बताया?
प्रधानमंत्री ने वडनगर को अपनी जन्मभूमि और वाराणसी को अपनी कर्मभूमि बताया।
सेवा संकल्प यात्रा किन दो स्थानों के बीच आयोजित की जा रही है?
यह यात्रा वडनगर से वाराणसी के बीच निकाली जा रही है।
प्रधानमंत्री ने संबोधन में किन प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया?
उन्होंने आयुष्मान योजना, पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम सूर्य घर योजना का विशेष रूप से उल्लेख किया।
विकसित भारत का निर्माण किस वर्ष तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है?
वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को किस प्रकार का अनुभव हासिल करने की सलाह दी?
उन्होंने देश की जमीनी हकीकत समझने, विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से मिलकर उनके सपने जानने की सलाह दी।
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टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·7 घंटे पहले

वडनगर और काशी का यह जुड़ाव बहुत प्यारा लगा, सच में अपनी जड़ों से जुड़ना एक अलग ही अहसास देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·23 घंटे पहले

वडनगर से काशी तक युवाओं का यह पैदल चलना और ज़मीनी हक़ीक़त देखना वाकई अलग अनुभव रहा होगा। प्रधानमंत्री ने ठीक कहा कि संगठन के दिनों की पुरानी यादें और लंबी यात्राओं के संघर्ष बिना खुद चले समझ नहीं आते। ऐसे अभियानों से देश और समाज को पास से जानने का मौक़ा मिलता है।

Divya Reddy@divya-reddy·23 घंटे पहले

रविकेश जी, सही कहा आपने। हाटकेश्वर महादेव और बाबा विश्वनाथ के इन दोनों शहरों का आध्यात्मिक जुड़ाव सचमुच बहुत गहरा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

वडनगर से काशी तक की इतनी लंबी पदयात्रा बिना किसी कानून-व्यवस्था की समस्या के शांति से पूरी होना वाकई बड़ी बात है। युवाओं का ऐसा अनुशासन बहुत कुछ कहता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

करण जी, बात तो सही है, पर इतनी लंबी पदयात्रा का खर्च किसने उठाया?

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