दक्षिण भारत की संगीत जगत की दिग्गज और सुर साम्राज्ञी के रूप में पहचानी जाने वाली पार्श्व गायिका एस जानकी का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मैसूर में अंतिम सांस लेने वाली इस महान कलाकार के जाने से संगीत और कला की दुनिया में एक बड़ा खालीपन आ गया है। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
नरेंद्र मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक शोक संदेश साझा करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि एस जानकी अम्मा का जाना संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। प्रधानमंत्री ने उनकी गायकी की विविधता को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने कई भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा और हर पीढ़ी के श्रोताओं के दिलों में जगह बनाई। उन्होंने हर भाव को बड़ी ही कोमलता और दक्षता के साथ पेश किया, जो उनकी कला की सबसे बड़ी विशेषता थी।
एक असाधारण संगीत विरासत
अपने दशकों लंबे करियर में, एस जानकी ने चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उन्हें 'दक्षिण भारत की कोकिला' कहा जाता था और उन्होंने ग्रामीण परिवेश की नायिकाओं की भावनाओं को अपनी आवाज में पिरोकर संगीत को एक जमीन से जुड़ी सच्चाई प्रदान की थी। उनका गायन न केवल तकनीकी रूप से परिपूर्ण था, बल्कि उसमें एक अनोखी आत्मा भी थी जिसने उन्हें अमर बना दिया।
राजनेताओं और प्रशंसकों का सम्मान
उनके निधन पर रजनीकांत, कमल हासन और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। राजनेताओं ने उनके गीतों के प्रति लोगों के लगाव को याद किया और कहा कि उनकी आवाज की मिठास हमेशा जिंदा रहेगी।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने एस जानकी को एक अमर आवाज बताते हुए श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनकी धुनें आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक अमूल्य धरोहर बनी रहेंगी। कई लोगों ने उनके द्वारा दी गई गीतों की विशाल श्रृंखला के प्रति आभार व्यक्त किया और अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
















