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विजय, आपकी रैली की त्रासदी का हर्जाना सरकारी खजाने से क्यों भरा जा रहा हैराजनीति
10 जुल॰ 2026, 7:47 pm (45 दिन पहले)· 2

विजय, आपकी रैली की त्रासदी का हर्जाना सरकारी खजाने से क्यों भरा जा रहा है

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय द्वारा करूर रैली भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने के फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं। क्या जनता के कर का पैसा निजी आयोजनों की गलतियों की भरपाई के लिए इस्तेमाल होना सही है?

वाह मिस्टर चीफ मिनिस्टर, आपकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आप अब एक अभिनेता नहीं, बल्कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। हाल ही में आपने करूर में आयोजित एक रैली के दौरान मची भगदड़ में जान गंवाने वाले 32 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। 27 सितंबर को हुई वह दुखद घटना पूरे देश के लिए एक झकझोर देने वाला अनुभव थी, जिसमें बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी शामिल थे। वे सभी आपके प्रशंसक थे, लेकिन यह रैली आपकी थी और इसका आयोजन भी आपने ही किया था। अब जब आप राज्य के शीर्ष पद पर आसीन हैं, तो सरकारी खजाने से उन परिवारों को नौकरी देने का औचित्य समझ से परे है, जिनकी जान आपके निजी कार्यक्रम की अव्यवस्था के कारण गई।

आपकी संपत्ति और आपकी जवाबदेही

सवाल यह है कि यदि रैली आपकी थी, तो मुआवजा आपकी व्यक्तिगत संपत्ति से क्यों नहीं दिया गया? सी जोसेफ विजय के चुनावी हलफनामे के अनुसार, आपकी कुल नेटवर्थ 624 करोड़ रुपये है। आपके पास 220 करोड़ की अचल संपत्ति, 115 करोड़ का रियल एस्टेट और 82.8 करोड़ की कमर्शियल प्रॉपर्टी है। इसके अलावा, आपके पास 22 करोड़ की गैर-कृषि भूमि और कोडाइकनाल जैसी जगहों पर प्लॉट हैं। आपके बैंक डिपॉजिट 313 करोड़ रुपये हैं और आपके वाहनों का काफिला 13.52 करोड़ रुपये का है। साथ ही, आपके पास 883 ग्राम सोना और शेयरों में 20 लाख रुपये का निवेश है। आपकी सालाना आय 184 करोड़ रुपये है। इतनी अकूत संपत्ति होने के बावजूद अपनी गलती की भरपाई जनता के टैक्स के पैसों से करना नैतिक रूप से कितना उचित है?

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जांच को प्रभावित करने की कोशिश

इस हादसे की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI कर रही है। ऐसे में पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने का आपका निर्णय एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या यह कदम गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं है? यदि आप किसी परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दे देते हैं, तो स्वाभाविक है कि वह परिवार आपके या आपके आयोजन के खिलाफ गवाही देने से हिचकिचाएगा। यह पूरी प्रक्रिया न्यायिक जांच की निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

अधिकारों का अनुचित उपयोग

मुख्यमंत्री के पास अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का अधिकार जरूर होता है, जिसका उपयोग अक्सर स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों या किसी प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों के लिए किया जाता है। हालांकि, करूर हादसा कोई प्राकृतिक विपदा नहीं थी। यह एक मानवीय भूल और कुप्रबंधन का नतीजा था। इसके मुख्य सूत्रधार आप स्वयं थे, इसलिए सारी भरपाई आपकी ओर से होनी चाहिए थी। मुख्यमंत्री बनने का अर्थ यह कतई नहीं है कि आप अपने अधिकारों का उपयोग उन लोगों को खुश करने के लिए करें जो आपकी गलतियों के शिकार हुए। उन करोड़ों युवाओं का क्या, जो पूरी मेहनत के साथ सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हैं और एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं? उनके हिस्से की नौकरी एक ऐसी त्रासदी के पीड़ितों को क्यों दी जा रही है, जिसके लिए आप प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं?

सवाल-जवाब

करूर में क्या घटना हुई थी?
27 सितंबर को करूर में आयोजित एक रैली के दौरान भगदड़ मचने से 32 लोगों की जान चली गई थी।
पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी क्यों दी गई है?
राज्य के मुख्यमंत्री ने अनुकंपा के आधार पर इन परिवारों को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है।
इस फैसले पर विवाद क्यों है?
विवाद इस बात पर है कि निजी रैली की गलतियों की भरपाई सरकारी खजाने से क्यों की जा रही है, साथ ही यह सीबीआई जांच को प्रभावित कर सकता है।
सीबीआई जांच का इस मामले से क्या लेना-देना है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई इस भगदड़ की जांच कर रही है और नौकरी देने से गवाहों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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