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मानसून में घर की रौनक बढ़ाएगी अपराजिता, गमले में नीले और बैंगनी फूल उगाने का आसान तरीकाराजस्थान
28 अग॰ 2026, 7:10 am (1 घंटे पहले)· 2

मानसून में घर की रौनक बढ़ाएगी अपराजिता, गमले में नीले और बैंगनी फूल उगाने का आसान तरीका

सावन और बारिश के मौसम में अपराजिता की बेल तेजी से फैलती है और इसमें आकर्षक नीले, सफेद व बैंगनी फूल खिलते हैं। सही गमले, मिट्टी और कटाई-छंटाई की मदद से आप इसे आसानी से अपने गार्डन में तैयार कर सकते हैं।

मानसून की सुहानी बारिश पेड़-पौधों में नई जान फूंक देती है। यदि आप इस मौसम में अपने होम गार्डन या किचन गार्डन की बनावट को अधिक खूबसूरत बनाना चाहते हैं, तो अपराजिता की बेल एक शानदार विकल्प है। इस पौधे की हरी-भरी शाखाओं पर खिलने वाले नीले, सफेद और बैंगनी रंग के मनमोहक फूल पूरे परिसर का आकर्षण बढ़ा देते हैं। बारिश का मौसम अपराजिता की बेल के प्राकृतिक विकास के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। यदि सही तकनीक और नियमित देखभाल पर ध्यान दिया जाए, तो छोटे से स्थान में भी इस बेल को बहुत सरलता से पनपाया जा सकता है।

अपराजिता का पौधा उगाने के लिए गमले और मिट्टी का चुनाव

अपराजिता के पौधे की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसे उगाने के लिए आपको बहुत बड़े जमीन के टुकड़े की आवश्यकता नहीं होती। शहरी घरों या बालकनी गार्डन में इसे साधारण गमलों में आसानी से लगाया जा सकता है। पौधे की स्वस्थ वृद्धि के लिए लगभग 10 से 12 इंच का गमला पूरी तरह से पर्याप्त होता है। गमला चुनते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि उसके निचले हिस्से में पानी निकासी के लिए छिद्र मौजूद हों।

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मिट्टी की गुणवत्ता पौधे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अपराजिता के लिए ऐसी बलुई या भुरभुरी मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है, जिससे अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल सके। साधारण बगीचे की मिट्टी में थोड़ी मात्रा में गोबर की खाद, केंचुआ खाद या जैविक कंपोस्ट मिला देने से मिट्टी की उर्वरता कई गुना बढ़ जाती है। उपजाऊ और जल-निकासी वाली मिट्टी में पौधे की जड़ें तेजी से फैलती हैं और पौधा स्वस्थ बना रहता है।

बीज और कटिंग से पौधा तैयार करने की सही विधि

अपराजिता की बेल को अपने घर में लगाने के लिए दो प्रमुख तरीके अपनाए जा सकते हैं, पहला बीजों के माध्यम से और दूसरा तने की कटिंग द्वारा। यदि आप बीजों से नया पौधा तैयार करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन करें। बीजों को बोने से पहले उन्हें लगभग एक दिन (24 घंटे) के लिए साफ पानी में भिगोकर रखना चाहिए। पानी में भिगोने से बीजों का बाहरी आवरण नरम हो जाता है और अंकुरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

भिगोए गए बीजों को गमले की मिट्टी में बहुत अधिक गहराई में न दबाएं, बल्कि हल्की गहराई पर ही बोएं। इसके बाद मिट्टी के ऊपर हल्का पानी छिड़ककर उसमें नमी बनाए रखें। ध्यान रखें कि बीजों पर तेज धार से पानी न डालें जिससे बीज बह न जाएं। गमले में जलजमाव बिलकुल भी न होने दें। सही तापमान और उचित नमी मिलने पर कुछ ही दिनों के भीतर बीज अंकुरित होकर छोटे पौधों के रूप में बाहर आने लगते हैं। इसके अलावा, किसी पुराने स्वस्थ पौधे की कटिंग लेकर भी उसे सीधे मिट्टी में रोपकर नया पौधा उगाया जा सकता है।

धूप की आवश्यकता और बारिश में जड़ों का बचाव

अपराजिता एक ऐसा पौधा है जिसे उचित धूप और प्रकाश की सख्त आवश्यकता होती है। गमले को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां प्रतिदिन कम से कम चार से छह घंटे की सीधी धूप मिलती हो। मानसून के दिनों में जब बारिश की बूंदों के साथ पर्याप्त धूप का संतुलन बनता है, तब यह बेल दोगुनी गति से बढ़ती है और उसमें अधिक संख्या में कलियां आती हैं।

हालाँकि, बारिश के मौसम में अति-सिंचाई पौधे को नुकसान भी पहुँचा सकती है। यदि आपका गमला खुले आसमान के नीचे रखा है और लगातार तेज बारिश हो रही है, तो गमले में पानी जमा होने की आशंका बढ़ जाती है। जड़ों के आसपास लगातार पानी खड़ा रहने से वे सड़ने लगती हैं और पौधा सूख सकता है। इसलिए बारिश के दौरान गमले की जल-निकासी व्यवस्था जांचते रहें और जरूरत पड़ने पर गमले को थोड़े ढके हुए स्थान पर स्थानांतरित कर दें।

बेल को सहारा देने और नियमित देखभाल के उपाय

जैसे-जैसे अपराजिता का पौधा बढ़ता है, उसकी शाखाएं बेल का रूप लेने लगती हैं। बेल को ऊपर की ओर चढ़ाने और सही आकार देने के लिए सहारे की आवश्यकता होती है। इसके लिए गमले के अंदर ही एक मजबूत लकड़ी की डंडी, बांस की छड़ी या लोहे की जाली लगा देनी चाहिए। बेल की कोमल शाखाओं को हल्के हाथों से उस सहारे की ओर लपेट दें ताकि वह व्यवस्थित दिशा में ऊपर फैल सके।

पौधे को हरा-भरा और रोगमुक्त रखने के लिए समय-समय पर इसकी देखभाल करना बेहद आवश्यक है। बेल पर दिखाई देने वाली सूखी पत्तियों, पीले पड़ चुके पत्तों और कमजोर टहनियों को कैंची से काट कर अलग करते रहें। छंटाई करने से पौधे की नई शाखाएं निकलती हैं और अधिक फूल खिलते हैं। मानसून में आवश्यकता से अधिक पानी देने से बचें और केवल मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने पर ही पानी दें। इन सरल नियमों का पालन करके आप मानसून में अपराजिता के पौधे से अपने किचन गार्डन को बेहद खूबसूरत बना सकते हैं।

सवाल-जवाब

अपराजिता का पौधा उगाने के लिए किस आकार का गमला सही रहता है?
अपराजिता के पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए 10 से 12 इंच का गमला पर्याप्त माना जाता है।
अपराजिता के बीजों को बोने से पहले पानी में कितनी देर भिगोना चाहिए?
बीजों का अंकुरण तेज करने के लिए उन्हें बोने से पहले लगभग एक दिन (24 घंटे) पानी में भिगोकर रखना चाहिए।
अपराजिता की बेल पर किस-किस रंग के फूल खिलते हैं?
अपराजिता की बेल पर आकर्षक नीले, सफेद और बैंगनी रंग के फूल खिलते हैं।
मानसून में अपराजिता के पौधे को पानी देते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?
गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि लगातार जलजमाव से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
अपराजिता के पौधे को कितनी धूप की आवश्यकता होती है?
अपराजिता के पौधे को पर्याप्त मात्रा में धूप मिलने वाली जगह पर रखना बेहतर होता है ताकि बेल तेजी से बढ़ सके।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·50 मिनट पहले

अपराजिता की बेल और बागवानी पर आधारित यह लेख यद्यपि घरेलू सौंदर्य के लिए उपयोगी है, किंतु एक क्राइम संवाददाता के दृष्टिकोण से इस प्रकार की वनस्पति या औषधीय पौधों के वाणिज्यिक उत्पादन में अवैध भूमि अतिक्रमण, कृषि भूमि के व्यावसायिक दुरुपयोग और फर्जी पौध नर्सरी के घोटालों जैसे कानूनी मामलों पर भी प्रशासनिक निगरानी की आवश्यकता होती है।

Rohan Verma@rohan-verma·50 मिनट पहले

यह लेख घरेलू बागवानी के लिए ठीक है, लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और क्षेत्रीय राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में कृषि भूमि के व्यावसायिक उपयोग और अवैध पौध नर्सरी के संचालन पर कड़े भू-राजस्व नियमों की आवश्यकता है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार से स्थानीय भू-विवाद और प्रशासनिक चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं, जिन पर शासन स्तर से सख्त निगरानी जरूरी है।

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