उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अदलहाट इलाके में इस मोहर्रम मंसूर अहमद का ताजिया चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस बार उन्होंने माचिस की तीलियों या कागज की बजाय मूंगफली और दाल के दाने मुख्य सामग्री के रूप में चुने। सजावट के लिए लाई और चमकीले सितारों का इस्तेमाल किया गया, जिसने इस ताजिये को एक अलग और आकर्षक रूप दे दिया।
हर मोहर्रम पर कुछ नया
मंसूर अहमद हर साल मोहर्रम के मौके पर ताजिया बनाने में नई सामग्री आजमाते हैं। एक बार उन्होंने करीब साढ़े सात लाख माचिस की तीलियों से ताजिया तैयार किया था, जिसमें बेहद मेहनत लगी थी। उससे पहले कागज के गिलासों की मदद से ताजिया बनाया गया था। इस बार मूंगफली और दाल के दाने उनकी पसंद बने, जो एक बिल्कुल नया प्रयोग है।
15 दिन, चार लोग और अनथक मेहनत
इस ताजिये को तैयार करने में चार लोगों ने मिलकर 15 दिन की मेहनत की। पूरे काम में करीब साढ़े सात हजार रुपए का खर्च आया। मंसूर अहमद ने बताया कि इस बार उन्होंने पहले से ही काम शुरू कर दिया था, जिसकी वजह से इसे तय समय में पूरा किया जा सका।
मंसूर अहमद की जुबानी
मंसूर अहमद ने बताया:
हमारी कोशिश रहती है कि हर साल ताजिया में कुछ अलग और अनोखा बने। यही वजह है कि इस बार ताजिया में हमने पहले से मेहनत करना शुरू किया और मूंगफली और दाल की मदद से दोनों से इसे तैयार किया है। सजावट के लिए चमकीले सितारों का प्रयोग किया गया है।
उन्होंने आगे कहा:
अल्लाह से मिली प्रेरणा के बाद ही इसको हम लोग तैयार करते हैं, इसमें सभी का पूरा मदद मिलता है। मेहनत के बाद इसे तैयार किया जाता है।
अदलहाट में सबसे अलग पहचान
मंसूर अहमद के मुताबिक, अदलहाट क्षेत्र से जितनी भी ताजियां कर्बला पर जाती हैं, उनमें उनकी ताजिया एकदम अलग नजर आती है। हर साल उनकी इस कोशिश को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं और यही अनोखापन उन्हें भीड़ से अलग करता है।













