राजस्थान पुलिस की सीआईडी इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी पिछले करीब चार वर्षों से जासूसी नेटवर्क तक पैसा पहुंचाने का काम कर रहा था। उसे 30 जून को गिरफ्तार किया गया था और अब उसे अदालत में पेश किया जा रहा है, जहां जांच एजेंसी उसकी रिमांड मांग सकती है।
कैसे सामने आया रफीक का नाम
सीआईडी इंटेलिजेंस के अतिरिक्त महानिदेशक प्रफुल्ल कुमार के मुताबिक यह गिरफ्तारी पहले से दर्ज एक जासूसी मामले की जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर हुई है। इसी मामले में इससे पहले जैसलमेर निवासी झबरा राम और असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन में एमटीएस के पद पर तैनात सुमित कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन दोनों पर भारतीय सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी कथित तौर पर आईएसआई हैंडलरों तक पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसी को शक है कि रफीक इसी नेटवर्क की आर्थिक कड़ी के तौर पर काम कर रहा था और उसी की वजह से पैसों का असली स्रोत छिपा रहता था।
बैंक खातों के जाल से होती थी पैसों की आवाजाही
सीआईडी इंटेलिजेंस की जांच में सामने आया कि कथित जासूसी गतिविधियों के बदले मिलने वाली रकम सीधे आरोपियों के पास नहीं पहुंचती थी, बल्कि रफीक चांद शेख एक बिचौलिए की तरह काम करता था। वह अलग-अलग बैंक खातों के जरिए पैसा ट्रांसफर कर नेटवर्क को आर्थिक मदद पहुंचाता था, ताकि असली लेन-देन की कड़ी छिपी रहे। पूछताछ में उसने कथित तौर पर कबूल किया कि वह पिछले करीब चार साल से सोशल मीडिया के जरिए आईएसआई के एक हैंडलर के संपर्क में था और वहीं से उसे निर्देश मिलते थे, जिसके आधार पर वह फंड ट्रांसफर की गतिविधियां अंजाम देता था। जांच में यह भी पता चला कि उसने सिर्फ अपने नाम से ही नहीं, बल्कि दूसरे लोगों के नाम पर भी कई बैंक खाते खुलवा रखे थे। इन्हीं खातों के जरिए कथित तौर पर जासूसी नेटवर्क से जुड़े लोगों तक रकम भेजी जाती थी।
मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच
बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल सबूतों की पड़ताल में अब तक इस कथित फंडिंग नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की पहचान हो सके। शुरुआती सबूतों के आधार पर सीआईडी इंटेलिजेंस ने रफीक चांद शेख को आईएसआई का कथित फंडिंग एजेंट मानते हुए गिरफ्तार किया है। फिलहाल अन्य बैंक खातों, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, सोशल मीडिया संपर्कों और संभावित सहयोगियों की गहराई से जांच जारी है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि नेटवर्क की परतें खुलने पर आगे और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
कोर्ट ने दी 6 दिन की पुलिस रिमांड
गुरुवार को रफीक चांद शेख को अदालत में पेश किया गया। राजस्थान इंटेलिजेंस ने आरोपी को 30 जून को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने पूछताछ के लिए 7 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने 6 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की। अब आरोपी को 7 जुलाई को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस दौरान इंटेलिजेंस टीम बैंक लेन-देन, डिजिटल सबूतों और संभावित सहयोगियों की गहन पड़ताल करती रहेगी, ताकि पूरे फंडिंग नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सके।













