रैनसमवेयर हैकर समूह वर्ल्ड लीक्स ने एक ऐसे बड़े साइबर हमले का दावा किया है, जो भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए गंभीर चिंता का सबब बन गया है। इस समूह का आरोप है कि उसने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के नेटवर्क में घुसपैठ करके दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियों ऐपल और टेस्ला के अत्यंत संवेदनशील व्यापारिक रहस्य और कंपोनेंट डिजाइन चुरा लिए हैं। ये दोनों कंपनियां टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की ग्राहक हैं।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने साइबर घटना को माना
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस साइबर सुरक्षा घटना की पुष्टि की है। कंपनी ने कहा:
कुछ सप्ताह पहले टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने कुछ सिस्टम में साइबर सुरक्षा घटना की पहचान की थी। हमारी प्रतिक्रिया प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई और इस घटना का हमारे कारोबार या परिचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
हालांकि सूत्रों के मुताबिक, हैकर्स ने चुराए गए डेटा को डिलीट या सार्वजनिक न करने के बदले टाटा समूह से मोटी फिरौती की मांग की है। कंपनी ने फिरौती की मांग पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।
डार्क वेब पर 630 GB से अधिक डेटा की बाढ़
सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार, वर्ल्ड लीक्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के नेटवर्क से चुराई 2 लाख से ज्यादा फाइलें डार्क वेब पर अपलोड कर दी हैं। इस लीक हुए डेटा का कुल आकार 630 गीगाबाइट (GB) से अधिक है। इन फाइलों की जांच में पता चला कि इनमें ऐपल और टेस्ला के परिचालन से सीधे जुड़ी बेहद संवेदनशील सामग्री है।
भारतीय साइबर सुरक्षा विश्लेषक राजशेखर राजाहरिया के अनुसार, इन लीक फाइलों में केवल कंपनियों के डिजाइन दस्तावेज ही नहीं, बल्कि कई वर्षों के ईमेल, इवेंट लॉग और टाटा के विदेशी कर्मचारियों के पासपोर्ट की कॉपियां भी शामिल हैं।
iPhone के राज और टेस्ला की इंजीनियरिंग ड्रॉइंग बेनकाब
लीक हुई फाइलों में 'com.apple.factorydata' नाम के फोल्डर मिले हैं, जिनमें iPhone के सर्किट बोर्ड कंपोनेंट्स की गुणवत्ता जांच से जुड़ा 52 पन्नों का एक खुफिया दस्तावेज भी है। टेस्ला की आने वाली अपग्रेडेड Model Y SUV का NV36 चार्जपोर्ट कंट्रोलर डिजाइन और नई Model 3 सेडान की इंजीनियरिंग ड्रॉइंग भी इस लीक का हिस्सा हैं। इन दस्तावेजों पर साफ शब्दों में 'ट्रेड सीक्रेट' लिखा हुआ है, जो इनकी अत्यंत गोपनीय प्रकृति को उजागर करता है।
भारत की मैन्युफैक्चरिंग रणनीति को बड़ा झटका
चीन के बाहर भारत को अपना नया और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने की ऐपल की रणनीति को इस घटना से गहरा धक्का लगा है। भारत में तैयार होने वाले कुल iPhone का लगभग एक-तिहाई यानी 33% अकेले टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स बनाता है। इस डेटा लीक ने टाटा के होसूर स्थित मुख्य iPhone असेंबली प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की वैश्विक महाशक्ति बनाने की जो मुहिम चल रही है, उसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सबसे अग्रणी भूमिका में है। ऐपल और टेस्ला जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ट्रेड सीक्रेट का एक भारतीय कंपनी के जरिए बाहर आना, देश की डिजिटल सुरक्षा और वैश्विक कंपनियों के भरोसे, दोनों के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
ऐपल और टेस्ला की चुप्पी, ऐपल की आंतरिक जांच शुरू
अब तक न ऐपल और न ही टेस्ला ने इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान दिया है। सूत्रों के अनुसार ऐपल ने इस मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने फिरौती की मांग पर कुछ भी कहने से मना कर दिया है, लेकिन कंपनी का दावा है कि इस साइबर घटना का उनके मौजूदा कारोबार और परिचालन पर कोई असर नहीं है।












