लखनऊ। ऑनलाइन ठगी अब सिर्फ शहरों की समस्या नहीं रह गई है। ठगों के फोन अब गांवों की पगडंडियों तक पहुंच चुके हैं और किसान, गृहिणी, विद्यार्थी, छोटे दुकानदार से लेकर बुजुर्ग तक इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसी बढ़ती चुनौती को ध्यान में रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य और नारी सशक्तीकरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था Psy-Naree ने RT Cyber Academy के साथ मिलकर बक्शी का तालाब के ग्राम कठवारा में एक अनोखी 'साइबर पंचायत' का आयोजन किया।
देश के जाने-माने साइबर विशेषज्ञ और RT Cyber Academy के संस्थापक श्री रक्षित टंडन के मार्गदर्शन में हुए इस आयोजन ने एक आम ग्रामीण सभा को ऑनलाइन सुरक्षा पर खुली और व्यावहारिक बातचीत में बदल दिया। यह Psy-Naree और RT Cyber Academy की संयुक्त तीसरी ग्रामीण साइबर सुरक्षा कार्यशाला रही, एक ऐसी मुहिम जो धीरे-धीरे भारत के गांव-गांव तक डिजिटल जागरूकता पहुंचा रही है।
किसने संभाली कमान
कार्यक्रम की मेजबानी Ikigai के संस्थापक और Psy-Naree के मेंटर कर्नल संजीव सहाय ने की। ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने Ikigai की अवधारणा से उनका परिचय कराया और बताया कि साइबर अपराध तथा उससे पैदा होने वाले मानसिक तनाव के बीच कितना गहरा रिश्ता है। मंच का संचालन Psy-Naree की वॉलंटियर सिमरन राय ने किया, जबकि पूरे आयोजन का समन्वय Psy-Naree की कार्यक्रम समन्वयक वैभव नाइक ने संभाला।
रोजमर्रा की हकीकत से जुड़ी रही बातचीत
चर्चा का हर पहलू गांव वालों के रोजमर्रा के अनुभवों से जुड़ा रहा। बात इस पर हुई कि एक फर्जी कॉल असल में कैसी सुनाई देती है, क्यों एक बार किसी के साथ साझा किया गया OTP वर्षों की जमा पूंजी पल भर में खाली कर सकता है, और क्यों ठगी के बाद महसूस होने वाली शर्मिंदगी अक्सर असली आर्थिक नुकसान से भी ज्यादा भारी पड़ जाती है।
ये रहे आयोजन के मुख्य संदेश
- अपनी गोपनीय जानकारी संभालकर रखें: OTP, PIN, पासवर्ड, CVV और बैंक डिटेल किसी के साथ, कभी साझा न करें।
- कॉल करने वाले पर सवाल उठाएं: पुलिस, CBI, बैंक कर्मचारी या कस्टमर केयर बनकर फोन करने वाले ठगों से सतर्क रहें, साथ ही बढ़ते 'डिजिटल अरेस्ट' और वीडियो कॉल पर ब्लैकमेल से भी।
- म्यूल अकाउंट का जाल समझें: अपना बैंक खाता किसी को उधार या किराये पर देना एक निर्दोष इंसान को चुपचाप अपराध का हिस्सेदार बना सकता है।
- लालच को पहचानें: फर्जी नौकरी, KYC अपडेट, लॉटरी और सरकारी योजना के नाम पर होने वाली ठगी तथा 'पैसा दोगुना' करने वाली निवेश योजनाओं से दूर रहें।
- मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी: ठगी का शिकार होना शर्म की बात नहीं है, असली खतरा चुप्पी है। पीड़ित को दोष देने की नहीं, उसका साथ देने की जरूरत होती है।
- तुरंत कार्रवाई करें: किसी भी ठगी की रिपोर्ट बिना देरी किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं।
लघु फिल्मों से दिखाया गया ठगी का जाल
कार्यक्रम के दौरान असली घटनाओं पर आधारित लघु फिल्में भी दिखाई गईं, ताकि ग्रामीण सिर्फ सुनें ही नहीं बल्कि अपनी आंखों से देख सकें कि ये जाल आखिर बिछाए कैसे जाते हैं और इनसे बचने का तरीका क्या है।
पूरे गांव ने ली साइबर सुरक्षा की शपथ
आयोजन का सबसे यादगार पल तब आया जब रक्षित टंडन ने पूरे गांव को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई। माना जा रहा है कि प्रदेश के किसी गांव में इस तरह की यह अपनी किस्म की पहली शपथों में से एक है। इस मौके पर ग्रामवासियों ने अपने परिवार, अपनी मेहनत की कमाई और अपने गांव के डिजिटल भविष्य की रक्षा करने का संकल्प लिया।
कठवारा को बनाना है साइबर अपराध मुक्त गांव
आगे की योजना साझा करते हुए कर्नल संजीव सहाय ने बताया कि Psy-Naree, Ikigai के सहयोग से कठवारा को गोद लेकर इसे एक साइबर अपराध मुक्त गांव बनाना चाहती है। इसके साथ ही संस्था यहां मानसिक स्वास्थ्य और नारी सशक्तीकरण से जुड़ी गतिविधियां लगातार चलाती रहेगी, ताकि गांव को सामाजिक बुराइयों से मुक्त कर एक ऐसा आदर्श गांव बनाया जा सके जिसका अनुसरण आसपास के दूसरे गांव भी कर सकें।













