भारतीय निशानेबाजी का एक पूरा युग खत्म हो गया। देश को कई पदक दिलाने वाले और नई पीढ़ी के निशानेबाजों को गढ़ने वाले दिग्गज कोच जसपाल राणा का महज 49 साल की उम्र में निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से हुई उनकी असमय मौत ने न सिर्फ खेल बिरादरी, बल्कि देश के हर उस शख्स को झकझोर दिया है, जिसने उनकी निशानेबाजी और कोचिंग को करीब से देखा था।
आखिरी दौरे से लौटते ही बिगड़ी तबीयत
जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप में हिस्सा लेकर स्वदेश लौट रहे थे। इसी सफर के दौरान अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और दिल्ली के एक अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके जाने की खबर फैलते ही खेल मैदानों से लेकर राजनीति के गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पर्दे पर आने वाली थी उनकी जिंदगी की कहानी
उनके निधन से जुड़ा एक भावुक पहलू फिल्म इंडस्ट्री से सामने आया। जाने-माने निर्माता Siddharth Roy Kapur की कंपनी ‘Roy Kapur Films’ ने सोशल मीडिया पर शोक जताते हुए एक अहम बात का खुलासा किया। असल नायकों की कहानियां पर्दे पर लाने के लिए पहचाने जाने वाले इस बैनर ने बताया कि वे जसपाल राणा के जीवन और उनके संघर्ष पर एक बायोपिक तैयार कर रहे थे। खास बात यह थी कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने में खुद राणा मेकर्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जुटे हुए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और कहानी पूरी होने से पहले ही वे इस दुनिया से रुखसत हो गए।
प्रोडक्शन हाउस ने अपने शोक संदेश में लिखा, ‘हम भारत की खेल उत्कृष्टता के शिल्पकार जसपाल राणा के निधन से गहरे सदमे में हैं. पदकों से इतर उनका असली ठिकाना उन अनगिनत युवा एथलीटों के भविष्य में है, जिन्हें उन्होंने तराशा. उनके साथ इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम करते हुए हम उनके खेल के प्रति समर्पण से बेहद प्रभावित हुए थे. लेकिन इन सब से अलग, हम उनकी हाजिरजवाबी, उनके ‘ड्राई सेंस ऑफ ह्यूमर’ और हर माहौल में जान फूंक देने वाले उनके मजाकिया अंदाज को हमेशा याद रखेंगे. वह हर परिस्थिति में अपनी कहानियों और चुटकुलों से हमें हंसाते थे.’
मनु भाकर के ‘द्रोणाचार्य’
राणा की पहचान सिर्फ एक बेहतरीन निशानेबाज तक सीमित नहीं थी। वे एक ऐसे गुरु थे जिन्होंने कई खिलाड़ियों का भविष्य संवारा। हाल के वर्षों में वे भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई परफॉर्मेंस कोच की भूमिका निभा रहे थे। भारतीय निशानेबाजी में सख्त और अनुशासित ट्रेनिंग रूटीन की नींव रखने का श्रेय उन्हीं को जाता है। इसी कड़े अनुशासन का असर था कि उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर ने Paris Olympics में इतिहास रचते हुए दो पदक अपने नाम किए।
शानदार रहा खुद का खेल करियर
बतौर खिलाड़ी भी उनका रिकॉर्ड बेमिसाल रहा। उन्होंने 1994 से 2006 के बीच चार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल हैं। यही वजह है कि वे भारत के सबसे सफल कॉमनवेल्थ गेम्स एथलीट कहलाते हैं। इसके साथ ही एशियन गेम्स में भी उन्होंने देश की झोली में 8 पदक डाले। खेल और कोचिंग में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें अर्जुन अवार्ड, पद्म श्री और साल 2020 में द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजा गया था।













