एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग अपने सारे ऐप गूगल के प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करते हैं। कभी-कभार किसी वेबसाइट से सीधे ऐप साइडलोड कर लेना, या फिर फोन बनाने वाली कंपनी के अपने स्टोर, जैसे सैमसंग स्टोर, का इस्तेमाल कर लेना आम बात है, लेकिन असली भरोसा हमेशा प्ले स्टोर पर ही रहा है। अब यह तस्वीर बदलने वाली है। प्ले स्टोर कहीं जाने वाला नहीं है, लेकिन गूगल अब अपने ही ऐप स्टोर के भीतर दूसरी कंपनियों के ऐप मार्केटप्लेस को भी जगह देने जा रहा है।
22 जुलाई से क्या बदलेगा
22 जुलाई से डेवलपर्स अपने खुद के ऐप मार्केटप्लेस लॉन्च कर सकेंगे, और ये मार्केटप्लेस सीधे प्ले स्टोर के भीतर ही काम करेंगे। ये थर्ड-पार्टी मार्केटप्लेस अपने खुद के ऐप तो बेच ही सकेंगे, साथ ही उन ऐप को भी दिखा सकेंगे जो पहले से गूगल के प्ले स्टोर पर मौजूद हैं। इसमें एक दिलचस्प मोड़ यह है कि अमेरिका में बने हर ऐप को अपने आप इन थर्ड-पार्टी मार्केटप्लेस पर उपलब्ध करा दिया जाएगा, जब तक कि उस ऐप का डेवलपर खुद इससे बाहर निकलने का विकल्प, यानी ऑप्ट-आउट, न चुन ले।
फिर भी गूगल के नियम लागू रहेंगे
थर्ड-पार्टी मार्केटप्लेस भले ही अपने ऐप बांट सकें, लेकिन वे पूरी तरह गूगल के नियमों के दायरे में ही रहेंगे। गूगल ने सुरक्षा, प्राइवेसी और यूजर सेफ्टी को लेकर शर्तों की एक लंबी सूची तय की है, जिसका पालन हर मार्केटप्लेस डेवलपर को करना होगा। इसके अलावा, प्ले स्टोर पर मौजूद ऐप को अपने मार्केटप्लेस में शामिल करने के लिए हर कंपनी को गूगल को पहले से 5,000 डॉलर देने होंगे, ताकि सुरक्षा और पॉलिसी जांच हो सके। यह रकम हर साल दोबारा चुकानी होगी।
अचानक यह फैसला क्यों आया
गूगल ने यह कदम अपनी मर्जी से नहीं उठाया है। यह फैसला गूगल और फोर्टनाइट गेम बनाने वाली कंपनी एपिक गेम्स के बीच हुए एक समझौते का नतीजा है। एपिक गेम्स पिछले कई सालों से गूगल और ऐपल, दोनों के खिलाफ अदालत में लड़ाई लड़ रही है। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब फोर्टनाइट को आईओएस के ऐप स्टोर और गूगल के प्ले स्टोर, दोनों से हटा दिया गया था। एपिक गेम्स दोनों प्लेटफॉर्म की भारी-भरकम फीस से नाराज थी, और विरोध जताने के लिए उसने यूजर्स को सीधे एपिक गेम्स को पैसे चुकाने का रास्ता दे दिया था, ताकि वे यह फीस बचा सकें। यह तरीका ऐप स्टोर और प्ले स्टोर, दोनों की नीतियों के खिलाफ था, और इसी वजह से फोर्टनाइट को हटाया गया।
2021 का फैसला और गूगल की दो साल की कोशिश
2021 में इस कानूनी लड़ाई का बड़ा नतीजा सामने आया, जब एक जज ने कहा कि एंड्रॉयड ऐप को लेकर गूगल का एकाधिकार गैरकानूनी है, और उसे अपने प्लेटफॉर्म पर थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर को इजाजत देनी होगी। इसके बाद गूगल करीब दो साल तक इस फैसले को पलटने की कोशिश करता रहा। वह इसमें लगभग कामयाब भी हो गया था, जब उसने एपिक गेम्स को 800 मिलियन डॉलर देकर मामला निपटाने के लिए राजी कर लिया। इस समझौते की कोशिश के तहत गूगल ने थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर को इजाजत देने की बात मानी थी, लेकिन प्ले स्टोर के जरिए नहीं, बल्कि अलग, स्वतंत्र डाउनलोड के तौर पर। मामले की सुनवाई कर रहे जज ने इस व्यवस्था को नाकाफी बताते हुए खारिज कर दिया।
गूगल ने वापस लिया अदालती आवेदन
गुरुवार को गूगल और एपिक गेम्स, दोनों को इस मामले पर आगे बहस के लिए अदालत में पेश होना था। लेकिन इसकी जगह गूगल ने अपना आवेदन ही वापस ले लिया। कंपनी के एक प्रवक्ता ने जज को दिए बयान में इस फैसले की वजह बताई: "हमने एपिक के साथ मिलकर अमेरिकी अदालत के आदेश में बदलाव वाले अपने आवेदन को वापस लेने का फैसला किया है, बजाय इसके कि इस प्रक्रिया को और लंबा खींचा जाए, जिससे पूरे इकोसिस्टम में अनिश्चितता बनी रहती। इससे हमें हाल ही में घोषित अपने वैश्विक बिजनेस मॉडल में बदलाव को लागू करने पर ध्यान लगाने का मौका मिलेगा, ताकि ऐप स्टोर के मामले में ज्यादा विकल्प, कम कीमतें और डेवलपर्स व यूजर्स के लिए ज्यादा मौके मिल सकें। हम एंड्रॉयड की दुनिया में अग्रणी सुरक्षा बनाए रखने और एक प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहां हर ऐप स्टोर और हर डेवलपर को आगे बढ़ने की आजादी मिले। साथ ही, हम अमेरिकी अदालत के आदेश का पालन करना जारी रखेंगे।"
आगे क्या होगा
असल में यूजर्स का अनुभव कैसा रहेगा, यह तभी साफ होगा जब 22 जुलाई को ये थर्ड-पार्टी मार्केटप्लेस प्ले स्टोर पर लाइव होंगे। गूगल ने मार्केटप्लेस चलाने वालों पर इतनी सख्त शर्तें रखी हैं कि उम्मीद है, चाहे यूजर किसी भी स्टोर से ऐप डाउनलोड करे, अनुभव लगभग एक जैसा ही रहेगा। एपिक गेम्स को देखते हुए, जिसकी वजह से यह पूरा मामला शुरू हुआ, माना जा रहा है कि वह जल्द ही अपना मार्केटप्लेस लॉन्च करेगी, लेकिन बाकी कौन-कौन सी कंपनियां इस मौके का फायदा उठाती हैं, यह देखना बाकी है। तुलना के लिए, ऐपल अभी सिर्फ यूरोपीय संघ में थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर की इजाजत देता है, और वह भी वहां के नियमों की मजबूरी में। ऐसे में गूगल का यह कदम फिलहाल कहीं ज्यादा व्यापक नजर आता है।











