मानसून जहां चिलचिलाती गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं घरों में रखे लकड़ी के फर्नीचर पर यही मौसम आफत बनकर टूटता है। बारिश के दिनों में हवा में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है और इसका सीधा असर अलमारी, दरवाजे, खिड़कियां, बेड, टेबल और कुर्सियों जैसी लकड़ी की चीजों पर पड़ता है। नमी बढ़ते ही दीमक लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है और कई बार छोटे-छोटे कीड़े भी लकड़ी को अंदर ही अंदर खोखला करने लगते हैं। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो लाखों रुपये का फर्नीचर भी गिनती के महीनों में बर्बाद हो सकता है।
नमी ही है दीमक की असली वजह
लकड़ी के काम के एक्सपर्ट संतोष ठाकुर का कहना है कि फर्नीचर की देखभाल बारिश शुरू होने का इंतजार किए बिना, पहले से ही शुरू कर देनी चाहिए। उनके मुताबिक सबसे जरूरी बात यही है कि लकड़ी को पानी और ज्यादा नमी से जितना हो सके दूर रखा जाए, क्योंकि नमी ही दीमक और कीड़ों के पनपने की पहली शर्त होती है।
बंद खिड़की-दरवाजे बढ़ाते हैं सीलन
संतोष ठाकुर बताते हैं कि आमतौर पर लोग बारिश के दौरान घर की खिड़कियां और दरवाजे लगातार बंद रखते हैं, ताकि पानी अंदर न आए। लेकिन यही आदत कमरे में सीलन बढ़ा देती है और सीलन दीमक व कीड़ों के लिए मुफीद माहौल तैयार कर देती है। इसलिए उनकी सलाह है कि बीच-बीच में खिड़कियां और वेंटिलेशन जरूर खोले जाएं, जिससे ताजी हवा का आना-जाना बना रहे और कमरे में नमी जमा न होने पाए।
सफाई और फर्नीचर की जगह पर भी ध्यान दें
एक्सपर्ट के अनुसार लकड़ी के फर्नीचर की नियमित सफाई भी उतनी ही जरूरी है जितनी हवा का आना-जाना। धूल और गंदगी जमा होने पर वह नमी को जल्दी पकड़ लेती है, इसलिए सूखे और साफ कपड़े से समय-समय पर फर्नीचर पोंछते रहना चाहिए। इसके अलावा फर्नीचर को दीवार से सटाकर रखने के बजाय थोड़ा हटाकर रखें, ताकि उसके पीछे भी हवा का प्रवाह बना रहे और सीलन कम हो। अगर फर्नीचर पर कहीं भी दीमक के निशान नजर आएं तो उसका इलाज तुरंत कराना चाहिए, क्योंकि देर करने पर नुकसान तेजी से फैल सकता है।
एंटी-टर्माइट उत्पाद का सही इस्तेमाल
बरसात से पहले लकड़ी को सुरक्षित रखने के लिए बाजार में मिलने वाले एंटी-टर्माइट उत्पादों का भी सहारा लिया जा सकता है। संतोष ठाकुर बताते हैं कि ‘टर्मिनेटर’ जैसे एंटी-टर्माइट उत्पाद को तारपीन के तेल में अच्छी तरह मिलाकर, ब्रश की मदद से लकड़ी की सतह पर लगाना चाहिए। यह मिश्रण लकड़ी के भीतर तक पहुंच जाता है, जिससे दीमक और छोटे कीड़ों से लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है। उनकी सलाह है कि दरवाजों, खिड़कियों, अलमारी के निचले हिस्सों और उन तमाम जगहों पर इसका इस्तेमाल जरूर किया जाए, जहां नमी सबसे ज्यादा टिकती है।
पॉलिश-वार्निश बनाती है सुरक्षा कवच
इसके अलावा समय-समय पर लकड़ी पर पॉलिश या वार्निश करवाना भी काफी फायदेमंद साबित होता है। यह लकड़ी की सतह पर एक मजबूत परत बना देता है, जो नमी को अंदर तक जाने से रोकती है। अगर किसी वजह से फर्नीचर पर पानी गिर जाए तो उसे फौरन सूखे कपड़े से पोंछ देना चाहिए। लकड़ी को लंबे समय तक गीला छोड़ना खतरे को और बढ़ा देता है, इसलिए यह छोटी सी सावधानी भी काफी असरदार साबित होती है।
थोड़ी सतर्कता, लंबी बचत
मानसून में बरती गई थोड़ी सी सावधानी महंगे लकड़ी के फर्नीचर को बरसों तक सुरक्षित रख सकती है। इसलिए बारिश शुरू होने से पहले ही फर्नीचर की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए और नमी से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपना लेने चाहिए। जरूरत पड़ने पर एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट कराने में देर न करें। इससे न सिर्फ घर सुरक्षित रहेगा, बल्कि लकड़ी का सामान भी सालों तक नए जैसा बना रहेगा।











