ब्राउज़र के मेनू आइकन पर क्लिक करने से विकल्पों की एक सूची खुलती है। वहां 'ऑप्शंस' पर क्लिक करने पर सेटिंग्स पेज खुल जाता है। इसके बाद पेज के बाएं हाथ पर मौजूद 'प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी' विकल्पों पर क्लिक करें। पेज को नीचे स्क्रॉल करके 'परमिशन' सेक्शन में आएं, जहां नोटिफिकेशन विकल्प के 'सेटिंग्स' टैब पर क्लिक करना होता है। इसके बाद एक पॉप-अप खुलेगा जिसमें सभी सूचीबद्ध साइटें दिखाई देंगी, जहां स्टेटस हेड के तहत संबंधित साइट के लिए 'अलाउ' चुनकर नोटिफिकेशन की अनुमति दी जा सकती है। बदलाव करने के बाद 'सेव चेंजेस' विकल्प पर क्लिक करना जरूरी है।
मेटा का नया एआई टूल और विवाद
मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा तैयार किया गया 'म्यूज इमेज' एक उन्नत एआई इमेज जनरेटर है, जिसके लॉन्च होते ही प्राइवेसी और उपयोगकर्ता की सहमति को लेकर बहस छिड़ गई है। उपयोगकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने इसके प्रॉम्प्ट फीचर पर सवाल उठाए हैं, जो इंस्टाग्राम की सार्वजनिक तस्वीरों से डेटा खींच सकता है। आलोचकों का मानना है कि यह तकनीक लोगों की अनुमति के बिना उनकी तस्वीरों का उपयोग कर एआई इमेज बनाने में सक्षम है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
म्यूज इमेज की क्षमताएं
मेटा इसे अब तक का अपना सबसे शक्तिशाली इमेज मॉडल बता रहा है। कंपनी का दावा है कि यह निर्देशानुसार काम करता है, सटीक एडिटिंग करता है और विभिन्न संदर्भों को जोड़कर इंस्टाग्राम की सोशल जानकारी का लाभ उठा सकता है। इसमें एजेंटिक टूल का उपयोग और म्यूज स्पार्क के साथ तालमेल की सुविधा भी शामिल है।
डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स पर विशेषज्ञों की चेतावनी
चिंता का मुख्य केंद्र वह प्रॉम्प्ट फीचर है जो इंस्टाग्राम यूजरनेम को शामिल करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फीचर डिफ़ॉल्ट रूप से सार्वजनिक प्रोफाइल के लिए चालू रहता है, जिससे उपयोगकर्ता अनजाने में अपनी तस्वीरों को एआई के लिए फीड के रूप में साझा कर रहे हैं। काउंटरपॉइंट रिसर्च के सीनियर एनालिस्ट प्राचीर सिंह का कहना है कि यह सार्वजनिक अकाउंट रखने के मायने को पूरी तरह बदल देता है। अब इसका मतलब केवल अधिक लोगों द्वारा पोस्ट देखना नहीं, बल्कि अनजान लोगों द्वारा किसी के चेहरे का उपयोग करना भी है। उन्होंने इन्फ्लुएंसर्स और आम उपयोगकर्ताओं के लिए ऑनलाइन गलत इस्तेमाल और उत्पीड़न के जोखिम की चेतावनी दी है।
कानूनी जोखिम और उत्तरदायित्व
प्राचीर सिंह ने यह भी साफ किया कि यदि कोई व्यवसाय एआई द्वारा निर्मित किसी ऐसी तस्वीर का उपयोग करता है जिसमें अनजाने में किसी का चेहरा शामिल है, तो इसके लिए मेटा नहीं बल्कि वह कंपनी खुद कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकती है। साइबरमीडिया रिसर्च के उपाध्यक्ष प्रभु राम के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया उपयोगकर्ताओं की पसंद के बजाय 'यूजर इनर्शिए' यानी निष्क्रियता का लाभ उठाती है। उन्होंने कहा कि इससे ब्रांड की साख खराब होने और वित्तीय नुकसान का भी खतरा है।
नियंत्रण और सुरक्षा के दावे
मेटा का कहना है कि उपयोगकर्ताओं के पास अपनी सामग्री को एआई निर्माण से बाहर रखने का विकल्प है और वे सेटिंग्स के जरिए 'रियूज' फीचर को बंद कर सकते हैं। इंस्टाग्राम की सेटिंग्स को इसके बारे में स्पष्ट जानकारी देने के लिए अपडेट किया गया है। मेटा ने कंटेंट की प्रामाणिकता के लिए अदृश्य वॉटरमार्किंग और कंटेंट सील जैसी सुरक्षा तकनीक पेश करने की बात कही है। कंपनी जल्द ही वीडियो के लिए भी इसे लाने और एक डिटेक्शन टूल प्रदान करने की योजना बना रही है, जिससे पता लगाया जा सके कि क्या कोई इमेज मेटा एआई द्वारा बनाई गई है।
उपलब्धता और भविष्य की दिशा
फिलहाल यह टूल मेटा एआई ऐप और meta.ai पर उपलब्ध है। अमेरिका में इसे इंस्टाग्राम स्टोरीज पर भी पेश किया गया है। व्हाट्सएप पर इसकी पहुंच सीमित है और फेसबुक पर भी इसे जल्द जारी किया जाएगा। म्यूज वीडियो पर भी काम चल रहा है। इस पूरी घटना के बाद से यह बहस तेज हो गई है कि सोशल मीडिया पोस्ट का उपयोग एआई ट्रेनिंग और जनरेशन में कैसे और किस स्तर तक होना चाहिए।











