अगर बाइक चलाते वक्त अचानक बैटरी जवाब दे जाए और लाइट-हॉर्न दोनों बंद हो जाएं, तो रात के अंधेरे में यह किसी मुसीबत से कम नहीं होता. लेकिन बिहार के छपरा में मैकेनिक ऐसी दिक्कत को महज ₹40 के खर्च में चुटकियों में सुलझा दे रहे हैं.
टेक्निवास बाजार के मिस्त्री का कमाल
यह मामला सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड स्थित टेक्निवास बाजार का है. यहां बाइक मिस्त्री श्रवण कुमार ग्राहकों की गाड़ियों में बैटरी फेल होने के बाद बंद पड़ी लाइट और हॉर्न को एक देसी जुगाड़ से ठीक कर देते हैं. ग्रामीण इलाकों के युवा इस तरह के जुगाड़ में पहले से ही माहिर माने जाते हैं और अपने आसपास मौजूद सामान से ही काम चला लेते हैं. इस जुगाड़ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें ना तो ज्यादा पैसा खर्च होता है और ना ही समय बर्बाद होता है.
सिर्फ ₹40 में कैसे ठीक होता है लाइट और हॉर्न
इसके लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक दुकान से एक कंडेनसर खरीदना होता है, जो छपरा ही नहीं बल्कि लगभग हर जगह आसानी से मिल जाता है. इस कंडेनसर के दोनों छोर पर तार जोड़े जाते हैं और फिर इसे उसी तार में जोड़ दिया जाता है, जिसमें बैटरी का कनेक्शन लगा होता है. यह पूरा काम एक मिनट से भी कम समय में हो जाता है. इतना करते ही गाड़ी की लाइट बिल्कुल नई बैटरी जैसी रोशनी देने लगती है और हॉर्न भी पहले से कहीं ज्यादा तेज आवाज में बजने लगता है. मिस्त्री श्रवण कुमार बताते हैं कि गांव के बच्चे तक इस तरह का जुगाड़ आसानी से लगा लेते हैं.
यह जुगाड़ कितने दिन तक टिकता है
बाइक में इलेक्ट्रिक कंडेनसर लगाने के बाद यह 3 से 6 महीने तक बेहतर तरीके से काम करता है. कंडेनसर लगते ही बैटरी की पावर बढ़ जाती है, जिससे लाइट पहले से ज्यादा तेज जलने लगती है और हॉर्न की आवाज भी दमदार हो जाती है. इससे कम बजट में ही बड़ी दिक्कत टल जाती है और गाड़ी सवार को तुरंत राहत मिल जाती है.
मिस्त्री का बरसों का अनुभव
श्रवण कुमार ने बताया कि उन्होंने खुद कई साल पहले इस जुगाड़ का इस्तेमाल किया था और तब से अब तक सैकड़ों गाड़ियों में इसी तरह का इलेक्ट्रॉनिक कंडेनसर लगाकर लाइट और हॉर्न की समस्या ठीक कर चुके हैं. उनका कहना है कि विकट परिस्थिति में यह जुगाड़ बेहद कम खर्च में बड़ा काम कर जाता है. बाजार में एक कंडेनसर करीब ₹30 में मिल जाता है, जबकि इसे लगाने के लिए मिस्त्री को ₹10 का चार्ज देना पड़ता है. यानी कुल ₹40 के खर्च में ही बाइक की लाइट और हॉर्न पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. श्रवण कुमार के मुताबिक इसे लगाने से गाड़ी को किसी तरह का नुकसान नहीं होता, बल्कि बैटरी की पावर बढ़ने से लाइट और हॉर्न दोनों बेहतर तरीके से काम करने लगते हैं. उनकी सलाह है कि अगर कभी विकट परिस्थिति में जेब में पैसे भी कम हों, तो लोग खुद यह जुगाड़ लगाकर आसानी से अपना काम चला सकते हैं.











