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अरावली की पहाड़ियों में बसा अनोखा देवमाली गांव, जहां करोड़पति भी रहते हैं कच्चे घरों में, मानसून में घूमने के लिए है सबसे बेहतरीन जगहयात्रा
8 जुल॰ 2026, 5:56 pm (45 दिन पहले)· 2

अरावली की पहाड़ियों में बसा अनोखा देवमाली गांव, जहां करोड़पति भी रहते हैं कच्चे घरों में, मानसून में घूमने के लिए है सबसे बेहतरीन जगह

अजमेर के पास स्थित देवमाली गांव अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जहां मानसून के दौरान हरियाली और बरसाती झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

मानसून के खुशनुमा मौसम में अगर आप किसी ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं जो जेब पर भारी न पड़े और जहां शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध संस्कृति का बेजोड़ संगम मिले, तो आपके लिए देवमाली एक बेहतरीन गंतव्य साबित हो सकता है। राजस्थान के ऐतिहासिक शहर अजमेर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव वर्षा ऋतु में एक अद्भुत हरे-भरे स्वर्ग में बदल जाता है। अरावली पर्वतमाला की गोद में बसे इस क्षेत्र में चारों ओर बिखरी मखमली हरियाली, पहाड़ों से कलकल बहते बरसाती झरने और ग्रामीण जीवन का सादापन सैलानियों का मन मोह लेता है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी वरदान से कम नहीं है।

सतयुग की याद दिलाती गांव की अनोखी परंपराएं

देवमाली केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अद्भुत मान्यताओं और धार्मिक आस्था के लिए भी जाना जाता है। इस गांव में आज के कलयुग के समय में भी प्राचीन सतयुग जैसी सादगी और नियम दिखाई देते हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार, यह पूरी धरती भगवान देवनारायण की अत्यंत पवित्र भूमि है। इसी अगाध श्रद्धा के कारण यहां रहने वाले संपन्न और समृद्ध परिवार, जिनके पास लाखों-करोड़ों की संपत्ति है, आज भी मिट्टी और घास-फूस से बने कच्चे मकानों में ही निवास करते हैं। इस पूरे क्षेत्र में सीमेंट, चूना, शराब, मांसाहार और मिट्टी के तेल (केरोसिन) के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी है। इन्हीं कड़े नियमों के चलते यह गांव आधुनिकता की दौड़ में भी अपनी प्राचीन धरोहर और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने में कामयाब रहा है।

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देश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का गौरव

इस अनोखे गांव की पहाड़ी पर स्थित भगवान देवनारायण का विशाल और भव्य मंदिर यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है। प्रतिवर्ष देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर इस पावन दर पर शीश नवाने आते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि पूरे गांव में केवल भगवान देवनारायण का यह मंदिर ही एकमात्र पक्की यानी सीमेंट-कंक्रीट की इमारत है, जबकि बाकी सभी घर पूरी तरह कच्चे बने हुए हैं। अपनी इसी विलक्षण संस्कृति, प्राकृतिक दृश्यों और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली की वजह से देवमाली को देश का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव यानी बेस्ट टूरिस्ट विलेज घोषित किया जा चुका है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब यहां फिल्मों और वृत्तचित्रों यानी डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग भी होने लगी है। बारिश के दिनों में बादलों और पहाड़ों की अठखेलियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

देवमाली पहुंचने का सबसे आसान रास्ता

जो पर्यटक इस अनूठे गांव की यात्रा करना चाहते हैं, उनके लिए यहां पहुंचना बेहद सरल है। देवमाली का सबसे निकटतम मुख्य रेलवे स्टेशन ब्यावर है, जिसकी गांव से दूरी लगभग 15 से 20 किलोमीटर है। ब्यावर रेलवे स्टेशन देश के कई प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, जयपुर और जोधपुर से सीधी और नियमित ट्रेन सेवाओं के माध्यम से जुड़ा हुआ है। स्टेशन पर उतरने के बाद यात्री स्थानीय टैक्सी, सार्वजनिक बसों या अपने निजी वाहनों के जरिए आसानी से सड़क मार्ग से देवमाली गांव पहुंच सकते हैं।

सवाल-जवाब

देवमाली गांव कहां स्थित है?
देवमाली गांव राजस्थान के अजमेर जिले से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है।
देवमाली के लोग पक्के मकान क्यों नहीं बनाते हैं?
इस गांव के लोगों की गहरी आस्था है कि यह भगवान देवनारायण की पवित्र भूमि है। इसी धार्मिक मान्यता के सम्मान में अमीर परिवार भी कंक्रीट के पक्के घर नहीं बनाते और कच्चे मकानों में रहते हैं।
देवमाली गांव में किन चीजों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है?
इस गांव में सीमेंट, चूना, केरोसिन (मिट्टी का तेल), शराब और मांसाहार के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है।
देवमाली गांव पहुंचने का सबसे आसान रास्ता क्या है?
यहां का सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन ब्यावर है, जो करीब 15 से 20 किलोमीटर दूर है। वहां से आप टैक्सी, बस या निजी वाहन से आसानी से गांव पहुंच सकते हैं।
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